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तमिलनाडु के 50 सरकारी आईटीआई में एआई और मशीन लर्निंग कोर्स, 24,000 छात्रों को मिलेगा लाभ

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तमिलनाडु के 50 सरकारी आईटीआई में एआई और मशीन लर्निंग कोर्स, 24,000 छात्रों को मिलेगा लाभ

सारांश

तमिलनाडु सरकार का यह कदम महज़ पाठ्यक्रम अपडेट नहीं — यह राज्य के वोकेशनल ढाँचे की दिशा बदलने का प्रयास है। ₹10 करोड़ और पाँच साल में 50 आईटीआई तक पहुँचने का लक्ष्य तय है। असली कसौटी होगी उद्योग भागीदारी की गुणवत्ता और पाठ्यक्रम की बाज़ार-प्रासंगिकता।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार के 50 सरकारी आईटीआई में एआई और मशीन लर्निंग को नए ट्रेड के रूप में शुरू किया जाएगा।
यह पाँच वर्षीय योजना 2026-27 के संशोधित बजट में घोषित हुई; कुल लागत ₹10 करोड़ ।
प्रत्येक वर्ष 10 आईटीआई में कोर्स शुरू होंगे; अनुमानित लाभार्थी 24,000 छात्र ।
डायरेक्टरेट ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग ने पाठ्यक्रम निर्माण शुरू किया; पहले 10 संस्थानों की पहचान जारी।
कोर्स डिज़ाइन के लिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों और टेक्नोलॉजी फर्मों से सहयोग की योजना।
प्रवेश, पाठ्यक्रम अवधि, फैकल्टी प्रशिक्षण और सर्टिफिकेशन दिशानिर्देश पहले बैच से पहले अंतिम रूप लेंगे।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य के 50 सरकारी इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (आईटीआई) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) को नए ट्रेड के रूप में शुरू करने की घोषणा की है। ₹10 करोड़ की लागत वाली यह पाँच वर्षीय योजना 2026-27 के संशोधित बजट में घोषित की गई और इससे लगभग 24,000 छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम वोकेशनल शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और युवाओं के रोज़गार की संभावनाएँ बेहतर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

चरणबद्ध क्रियान्वयन की रूपरेखा

इस योजना के तहत प्रत्येक वर्ष 10 सरकारी आईटीआई में एआई और एमएल के कोर्स शुरू किए जाएँगे, जिससे पाँचवें वर्ष के अंत तक यह कार्यक्रम 50 संस्थानों तक पहुँच जाएगा। पहले चरण में उन 10 आईटीआई की पहचान की जा रही है जहाँ मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में ही ये कोर्स लागू किए जा सकें। इन संस्थानों का चयन उनकी मौजूदा सुविधाओं, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और संबंधित उद्योगों से भौगोलिक निकटता के आधार पर किया जाएगा।

पाठ्यक्रम और बुनियादी ढाँचे की तैयारी

लेबर वेलफेयर एवं स्किल डेवलपमेंट विभाग के अंतर्गत काम करने वाले डायरेक्टरेट ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग ने प्रस्तावित ट्रेड के लिए पाठ्यक्रम तैयार करना शुरू कर दिया है। डायरेक्टरेट आवश्यक लैब, उपकरण, टीचिंग रिसोर्स और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी आकलन कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया, कोर्स की अवधि, फैकल्टी प्रशिक्षण और सर्टिफिकेशन से जुड़े दिशानिर्देश पहले बैच की कक्षाएँ शुरू होने से पहले अंतिम रूप दे दिए जाएँगे।

उद्योग भागीदारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण

विभाग कोर्स डिज़ाइन और संचालन के लिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों और टेक्नोलॉजी फर्मों के साथ सहयोग की योजना बना रहा है। इस साझेदारी से प्रैक्टिकल सेशन, इंटर्नशिप, एक्सपोज़र विज़िट और तकनीकी क्षेत्र के पेशेवरों से मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है। यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि प्रशिक्षण इंडस्ट्री की वास्तविक ज़रूरतों के अनुरूप हो और छात्रों को कार्यस्थल पर तत्काल उपयोगी कौशल प्राप्त हो।

एआई-एमएल की बढ़ती माँग और इसकी प्रासंगिकता

मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, बैंकिंग और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में एआई और एमएल का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। इससे ऐसे प्रशिक्षित कर्मचारियों की माँग उभरी है जो ऑटोमेटेड सिस्टम, डेटा-आधारित प्रक्रियाओं और तकनीक-केंद्रित औद्योगिक कामकाज को समझते हों। गौरतलब है कि पारंपरिक आईटीआई पाठ्यक्रम अब तक इस तकनीकी बदलाव से काफी हद तक अछूते रहे हैं, और यह पहल उसी अंतर को पाटने का प्रयास है।

आगे की राह

तमिलनाडु सरकार इंडस्ट्रियल उत्पादन और भर्ती के बदलते तरीकों को देखते हुए अपने स्किल-डेवलपमेंट कार्यक्रमों का विस्तार और उन्नयन कर रही है। एआई और एमएल ट्रेड की शुरुआत से पारंपरिक आईटीआई पाठ्यक्रम को नई प्रासंगिकता मिलने और छात्रों को तकनीक-आधारित भूमिकाओं के लिए तैयार करने की उम्मीद है। यह योजना तमिलनाडु को देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकती है जो वोकेशनल शिक्षा को भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुकूल ढाल रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹10 करोड़ का बजट 50 संस्थानों में आधुनिक एआई लैब, प्रशिक्षित फैकल्टी और अद्यतन उपकरण जुटाने के लिए पर्याप्त है या नहीं — यह सवाल अभी अनुत्तरित है। देश के कई राज्यों में 'डिजिटल स्किलिंग' की घोषणाएँ होती हैं, पर क्रियान्वयन में इंस्ट्रक्टर की कमी और उद्योग-भागीदारी की सतही प्रकृति बाधा बनती है। असली परीक्षण यह होगा कि इंडस्ट्री सहयोग केवल 'एक्सपोज़र विज़िट' तक सीमित रहता है या वास्तविक प्लेसमेंट और पाठ्यक्रम सह-निर्माण तक पहुँचता है। बिना मज़बूत सत्यापन ढाँचे के, यह योजना एक और महत्वाकांक्षी कागज़ी योजना बनने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के आईटीआई में एआई और मशीन लर्निंग कोर्स कब से शुरू होंगे?
यह कोर्स चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे — पहले वर्ष में 10 सरकारी आईटीआई में, और हर साल 10 नए संस्थान जोड़े जाएँगे। पहले चरण के संस्थानों की पहचान मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में ही करने की कोशिश जारी है।
इस योजना से कितने छात्रों को फायदा मिलेगा?
पाँच वर्षों में 50 आईटीआई तक विस्तार के दौरान लगभग 24,000 छात्रों को इन नए कोर्स से लाभ मिलने की उम्मीद है। यह अनुमान सभी चरणों में नामांकन को मिलाकर लगाया गया है।
इस योजना पर कितना खर्च होगा और इसकी घोषणा कहाँ हुई?
इस पहल की कुल लागत ₹10 करोड़ है और इसे 2026-27 के संशोधित बजट में घोषित किया गया है। राशि को पाँच वर्षों में चरणबद्ध रूप से खर्च किया जाएगा।
एआई-एमएल ट्रेड के लिए पाठ्यक्रम कौन तैयार कर रहा है?
लेबर वेलफेयर एवं स्किल डेवलपमेंट विभाग के अंतर्गत काम करने वाला डायरेक्टरेट ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है। विभाग आवश्यक लैब, उपकरण और फैकल्टी की ज़रूरतों का भी आकलन कर रहा है।
क्या इन कोर्स में उद्योगों की भागीदारी होगी?
हाँ, सरकार औद्योगिक प्रतिष्ठानों और टेक्नोलॉजी फर्मों के साथ मिलकर कोर्स डिज़ाइन और संचालन की योजना बना रही है। इससे छात्रों को प्रैक्टिकल सेशन, इंटर्नशिप और उद्योग विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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