30 अगस्त 2026
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पीएम स्वनिधि योजना से जुड़ीं 35 लाख महिलाएं, मन की बात में मोदी ने गिनाई सफलता की कहानियां

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पीएम स्वनिधि योजना से जुड़ीं 35 लाख महिलाएं, मन की बात में मोदी ने गिनाई सफलता की कहानियां

सारांश

मन की बात के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने खुलासा किया कि पीएम स्वनिधि योजना की 46% लाभार्थी महिलाएं हैं — यानी 35 लाख महिला विक्रेता। गाजियाबाद की बबिता और बेंगलुरु की निंगम्मा जैसी कहानियां बताती हैं कि छोटी पूंजी बड़े बदलाव की नींव बन सकती है।

मुख्य बातें

पीएम मोदी ने 30 अगस्त 2026 को मन की बात के 137वें एपिसोड में पीएम स्वनिधि योजना की उपलब्धियां साझा कीं।
योजना की कुल लाभार्थियों में 46% महिलाएं हैं, यानी देशभर में 35 लाख महिला विक्रेता इससे जुड़ी हैं।
योजना के तहत ₹15,000 , ₹25,000 और ₹50,000 तक के बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण दिए जाते हैं।
पात्र विक्रेताओं को ₹30,000 तक का यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी मिलता है।
गाजियाबाद की बबिता शर्मा और बेंगलुरु की टीएस निंगम्मा को योजना से व्यवसाय विस्तार में सफलता मिली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को मन की बात के 137वें एपिसोड में पीएम स्वनिधि योजना की उपलब्धियों को रेखांकित किया और बताया कि देशभर में 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने छोटे व्यवसायों को नई ऊंचाई दे रही हैं। योजना की कुल लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है, जो इसे महिला आर्थिक सशक्तीकरण का एक उल्लेखनीय माध्यम बनाती है।

मोदी ने क्या कहा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'हमारे शहरों और कस्बों की सड़कों पर प्रतिदिन सुबह से शाम तक लाखों महिलाएं अपने-अपने काम में जुटी रहती हैं। कोई सब्जी बेचती है तो कोई फल और कोई चाय का ठेला लगाती है। कोई फूल, दीये और पूजा की सामग्री बेचती है। बस थोड़ी सी पूंजी की कमी है, जो इनके कारोबार को आगे बढ़ने से रोक देती है।' उन्होंने आगे कहा कि पीएम स्वनिधि योजना ऐसी लाखों बहनों और माताओं को नई ताकत दे रही है, लेकिन महिला सशक्तीकरण के इस पहलू की उतनी चर्चा नहीं होती जितनी होनी चाहिए।

प्रेरक उदाहरण: बबिता शर्मा और निंगम्मा की कहानी

गाजियाबाद की बबिता शर्मा पहले फूल, दीये, अगरबत्ती और नारियल जैसी पूजा सामग्री का एक छोटा स्टाल लगाती थीं। पूंजी की कमी उनके कारोबार के विस्तार में बाधा थी। पीएम स्वनिधि योजना से आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने स्टाल पर सामान बढ़ाया, ग्राहक बढ़े और आमदनी में भी इज़ाफा हुआ। धीरे-धीरे सड़क किनारे का वह छोटा स्टाल एक पूर्ण दुकान में तब्दील हो गया।

इसी तरह बेंगलुरु की टीएस निंगम्मा और उनके पति ने मिलकर इडली, डोसा और सांभर का छोटा कारोबार शुरू किया था। योजना से मिली सहायता से उन्होंने अपनी कार्ट उन्नत की, थोक में सामान खरीदना शुरू किया और मेन्यू का विस्तार किया। आज निंगम्मा अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हैं।

पीएम स्वनिधि योजना: पृष्ठभूमि और संरचना

पीएम स्वनिधि योजना को कोविड-19 महामारी के दौरान रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। यह रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं के लिए देश की पहली समर्पित सूक्ष्म-ऋण योजना है। इसके तहत क्रमिक किश्तों में ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक के बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण दिए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त, योजना में ब्याज सब्सिडी, क्रेडिट गारंटी सहायता और पात्र विक्रेताओं के लिए ₹30,000 तक का यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी शामिल है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा उपायों के माध्यम से अनौपचारिक कार्यबल को मुख्यधारा से जोड़ती है।

महिला सशक्तीकरण पर व्यापक असर

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, 'जब एक महिला का कारोबार बढ़ता है तो पूरे परिवार का भविष्य आगे बढ़ता है। बच्चों की शिक्षा बेहतर होती है और घर की जरूरतें पूरी होती हैं। इससे महिला के भीतर आत्मविश्वास मजबूत होता है।' गौरतलब है कि यह योजना उन महिलाओं तक पहुंच बना रही है जो अब तक औपचारिक बैंकिंग और ऋण प्रणाली से बाहर थीं। आने वाले समय में योजना का विस्तार और अधिक विक्रेताओं को डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने की दिशा में किया जाना अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन ऋणों की पुनर्भुगतान दर और दीर्घकालिक आय वृद्धि का स्वतंत्र सत्यापन कहां है। व्यक्तिगत सफलता की कहानियां प्रेरक हैं, पर नीतिगत मूल्यांकन के लिए समग्र डेटा जरूरी है। यह योजना कोविड-राहत के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन अब इसे स्थायी आजीविका मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है — इस बदलाव के लिए पारदर्शी परिणाम-आधारित रिपोर्टिंग अनिवार्य होनी चाहिए।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है और इसे कब शुरू किया गया?
पीएम स्वनिधि योजना केंद्र सरकार की एक सूक्ष्म-ऋण योजना है, जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया था। यह इस वर्ग के लिए देश की पहली समर्पित ऋण योजना है।
पीएम स्वनिधि योजना में कितना ऋण मिलता है?
योजना के तहत क्रमिक किश्तों में ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक के बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण दिए जाते हैं। इसके अलावा पात्र विक्रेताओं को ₹30,000 तक का यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड, ब्याज सब्सिडी और क्रेडिट गारंटी सहायता भी मिलती है।
पीएम स्वनिधि योजना में महिलाओं की कितनी भागीदारी है?
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार योजना की कुल लाभार्थियों में लगभग 46% महिलाएं हैं, यानी देशभर में 35 लाख महिला विक्रेता इस योजना से जुड़कर अपना कारोबार बढ़ा रही हैं।
मन की बात के 137वें एपिसोड में मोदी ने किन महिलाओं का उदाहरण दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने गाजियाबाद की बबिता शर्मा और बेंगलुरु की टीएस निंगम्मा का उदाहरण दिया। बबिता ने पूजा सामग्री का स्टाल दुकान में बदला, जबकि निंगम्मा ने इडली-डोसा के कारोबार को बढ़ाकर अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा देना संभव किया।
पीएम स्वनिधि योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
यह योजना शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं के लिए है, जो अनौपचारिक कार्यबल का हिस्सा हैं और औपचारिक ऋण तक जिनकी पहुंच सीमित है। सब्जी, फल, चाय, फूल, खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेता इसके दायरे में आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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