पीएम स्वनिधि योजना से जुड़ीं 35 लाख महिलाएं, मन की बात में मोदी ने गिनाई सफलता की कहानियां
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को मन की बात के 137वें एपिसोड में पीएम स्वनिधि योजना की उपलब्धियों को रेखांकित किया और बताया कि देशभर में 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने छोटे व्यवसायों को नई ऊंचाई दे रही हैं। योजना की कुल लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है, जो इसे महिला आर्थिक सशक्तीकरण का एक उल्लेखनीय माध्यम बनाती है।
मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'हमारे शहरों और कस्बों की सड़कों पर प्रतिदिन सुबह से शाम तक लाखों महिलाएं अपने-अपने काम में जुटी रहती हैं। कोई सब्जी बेचती है तो कोई फल और कोई चाय का ठेला लगाती है। कोई फूल, दीये और पूजा की सामग्री बेचती है। बस थोड़ी सी पूंजी की कमी है, जो इनके कारोबार को आगे बढ़ने से रोक देती है।' उन्होंने आगे कहा कि पीएम स्वनिधि योजना ऐसी लाखों बहनों और माताओं को नई ताकत दे रही है, लेकिन महिला सशक्तीकरण के इस पहलू की उतनी चर्चा नहीं होती जितनी होनी चाहिए।
प्रेरक उदाहरण: बबिता शर्मा और निंगम्मा की कहानी
गाजियाबाद की बबिता शर्मा पहले फूल, दीये, अगरबत्ती और नारियल जैसी पूजा सामग्री का एक छोटा स्टाल लगाती थीं। पूंजी की कमी उनके कारोबार के विस्तार में बाधा थी। पीएम स्वनिधि योजना से आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने स्टाल पर सामान बढ़ाया, ग्राहक बढ़े और आमदनी में भी इज़ाफा हुआ। धीरे-धीरे सड़क किनारे का वह छोटा स्टाल एक पूर्ण दुकान में तब्दील हो गया।
इसी तरह बेंगलुरु की टीएस निंगम्मा और उनके पति ने मिलकर इडली, डोसा और सांभर का छोटा कारोबार शुरू किया था। योजना से मिली सहायता से उन्होंने अपनी कार्ट उन्नत की, थोक में सामान खरीदना शुरू किया और मेन्यू का विस्तार किया। आज निंगम्मा अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हैं।
पीएम स्वनिधि योजना: पृष्ठभूमि और संरचना
पीएम स्वनिधि योजना को कोविड-19 महामारी के दौरान रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। यह रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं के लिए देश की पहली समर्पित सूक्ष्म-ऋण योजना है। इसके तहत क्रमिक किश्तों में ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक के बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण दिए जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, योजना में ब्याज सब्सिडी, क्रेडिट गारंटी सहायता और पात्र विक्रेताओं के लिए ₹30,000 तक का यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी शामिल है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा उपायों के माध्यम से अनौपचारिक कार्यबल को मुख्यधारा से जोड़ती है।
महिला सशक्तीकरण पर व्यापक असर
प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, 'जब एक महिला का कारोबार बढ़ता है तो पूरे परिवार का भविष्य आगे बढ़ता है। बच्चों की शिक्षा बेहतर होती है और घर की जरूरतें पूरी होती हैं। इससे महिला के भीतर आत्मविश्वास मजबूत होता है।' गौरतलब है कि यह योजना उन महिलाओं तक पहुंच बना रही है जो अब तक औपचारिक बैंकिंग और ऋण प्रणाली से बाहर थीं। आने वाले समय में योजना का विस्तार और अधिक विक्रेताओं को डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने की दिशा में किया जाना अपेक्षित है।