पीएम मोदी ने 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' में महिला नेतृत्व की भूमिका पर जोर दिया
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं की भागीदारी से सिस्टम अधिक संवेदनशील बनता है।
- जनधन योजना ने महिलाओं को बैंकिंग से जोड़ा।
- महिलाएं स्टार्टअप्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- सरकार ने मातृत्व अवकाश को 26 हफ्ते किया है।
- 'वोकल फॉर लोकल' अभियान में महिलाएं ब्रांड एंबेसडर हैं।
नई दिल्ली। 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित करते हुए कहा कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित किया गया, तब सभी राजनीतिक दलों ने इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। उस समय यह भी मांग उठी थी कि इस कानून को 2029 तक लागू किया जाए।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता यह है कि सभी आवश्यक निर्णय संवाद, सहयोग और सहभागिता के माध्यम से लिए जाएं। उन्हें विश्वास है कि यह अधिनियम संसद की गरिमा को और बढ़ाएगा और सामूहिक प्रयास से इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को गर्व का विषय बताते हुए कहा कि भारत में राष्ट्रपति और वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं सफलतापूर्वक कार्यरत हैं, जिससे देश का गौरव बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी का उदाहरण देते हुए बताया कि आज 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय सरकारी संस्थाओं में कार्य कर रही हैं और 21 राज्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि लाखों महिलाओं की सक्रियता दुनिया के नेताओं को भी हैरान कर रही है। अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि जब निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो सिस्टम अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बनता है। जल जीवन मिशन इसका एक उदाहरण है, जहां महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
प्रधानमंत्री ने 2014 से पहले की स्थिति को याद करते हुए कहा कि उस समय करोड़ों महिलाएं बैंक से वंचित थीं। जनधन योजना के तहत 32 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी।
आज देश की बेटियां नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं। मुद्रा योजना के तहत दिए गए लोन में 60 प्रतिशत से अधिक लोन महिलाएं ले रही हैं। वर्तमान में 42 प्रतिशत से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है।
महिलाओं के करियर को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मातृत्व अवकाश को 26 हफ्ते कर दिया है, जो कई समृद्ध देशों में भी नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं। जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास निरंतर जारी है।
स्किल इंडिया मिशन की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले शुरू किए गए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का असर अब दिखने लगा है। 'ड्रोन दीदी' जैसी पहलों से महिलाएं कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लाने में जुटी हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन में आने के बाद उन्होंने बैंकों में 'गरीबों की अमीरी और अमीरों की गरीबी' दोनों देखी हैं।
आज देश की माताएं और बहनें 'वोकल फॉर लोकल' अभियान की ब्रांड एंबेसडर बन रही हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास न केवल उन्हें आगे बढ़ा रहा है, बल्कि पुरानी सामाजिक सोच को भी चुनौती दे रहा है।
आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पहले अधिकांश संपत्तियां पुरुषों के नाम पर होती थीं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों को महिलाओं के नाम पर रजिस्टर करने की पहल की गई है।