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तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से AI और उभरती तकनीक का पाठ्यक्रम, 60 लाख छात्रों को फायदा

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तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से AI और उभरती तकनीक का पाठ्यक्रम, 60 लाख छात्रों को फायदा

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से AI, कोडिंग और उभरती तकनीक का पाठ्यक्रम लागू करने की योजना बनाई है। 5,000 स्कूलों में सफल पायलट के बाद अब यह कार्यक्रम 60 लाख से अधिक छात्रों तक पहुँचाने की तैयारी है — जो राज्य की डिजिटल शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक उभरती प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम लागू होगा।
पाठ्यक्रम पहले से 5,000 सरकारी स्कूलों में पायलट आधार पर चल रहा है; सफलता के बाद विस्तार की योजना।
SCERT ने कक्षा 6 से 8 के लिए द्विभाषी पाठ्यपुस्तकें तैयार कर ली हैं; कक्षा 9-10 की पुस्तकें अगले शैक्षणिक वर्ष में आएंगी।
पाठ्यक्रम में जेनरेटिव AI , प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, LLM और GeoGebra जैसे टूल्स शामिल हैं।
कक्षा 11-12 के लिए उभरती तकनीक को वैकल्पिक विषय के रूप में पेश करने पर विचार जारी।
स्टेट बोर्ड के 60 लाख से अधिक छात्रों को इस पहल से लाभ मिलने की उम्मीद।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजी' (उभरती प्रौद्योगिकी) पाठ्यक्रम लागू करने की योजना बनाई है, जिससे स्टेट बोर्ड के तहत पढ़ने वाले 60 लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। 22 जुलाई को चेन्नई की अन्ना सेंटेनरी लाइब्रेरी में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य घटनाक्रम

स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन की अध्यक्षता में 'हाई-लेवल करिकुलम एक्सपर्ट कमिटी' और 'करिकुलम डेवलपमेंट कमिटी' की पहली बैठक मंगलवार को संपन्न हुई। बैठक में यह तय किया गया कि पारंपरिक कंप्यूटर शिक्षा से आगे बढ़कर छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटेशनल थिंकिंग, कोडिंग और डिजिटल टूल्स की व्यावहारिक शिक्षा दी जाएगी।

गौरतलब है कि यह पाठ्यक्रम पहले से ही 'तमिलनाडु स्कूल्स प्रोग्राम फॉर AI, रोबोटिक्स एंड नॉलेज ऑफ ऑनलाइन टूल्स' के तहत लगभग 5,000 सरकारी स्कूलों में पायलट आधार पर चलाया जा रहा है। सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद अब इसे सभी सरकारी स्कूलों में विस्तारित करने की तैयारी है।

पाठ्यक्रम की संरचना

प्रस्तावित पाठ्यक्रम को कक्षावार क्रमिक रूप से तैयार किया गया है। कक्षा 6 के छात्र डिजिटल अवेयरनेस से शुरुआत करेंगे, कक्षा 7 में उभरती तकनीकों का बुनियादी परिचय दिया जाएगा, जबकि कक्षा 8 में छात्र प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। कक्षा 9 और 10 का पाठ्यक्रम वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक के उपयोग पर केंद्रित होगा।

उच्च कक्षाओं के छात्रों को जेनरेटिव AI, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) और AI-आधारित टेक्स्ट, इमेज व म्यूजिक जनरेशन जैसी अवधारणाओं से परिचित कराया जाएगा। इसके अलावा GeoGebra, Google Earth, PhET Simulation, Stellarium और LibreOffice जैसे शैक्षिक टूल्स पर भी प्रैक्टिकल अनुभव दिया जाएगा।

पाठ्यपुस्तकें और शिक्षक प्रशिक्षण

स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) ने तमिलनाडु स्पार्क प्रोग्राम के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 के लिए द्विभाषी पाठ्यपुस्तकें पहले ही तैयार कर ली हैं। अगले शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 9 और 10 के लिए, और उसके बाद के चरण में कक्षा 11 और 12 के लिए पाठ्यपुस्तकें लाने की योजना है।

सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के गणित और विज्ञान शिक्षकों को SCERT द्वारा इस विषय को पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सरकार की प्रतिक्रिया

स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. चंद्र मोहन ने बताया कि सरकार कक्षा 11 और 12 के लिए उभरती तकनीक के पाठ्यक्रम को एक वैकल्पिक विषय के रूप में पेश करने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग अभी इस कोर्स को लागू करने की कार्यप्रणाली पर काम कर रहा है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत भर में AI-साक्षरता को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है। तमिलनाडु का यह कदम राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले वंचित और ग्रामीण तबके के छात्रों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य छात्रों को भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार करना है।

यदि यह योजना समयसीमा के अनुसार लागू होती है, तो तमिलनाडु देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने AI शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में संस्थागत रूप से शामिल किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती पाठ्यक्रम की घोषणा नहीं, बल्कि उसका क्रियान्वयन है — विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी स्कूलों में जहाँ बुनियादी डिजिटल अवसंरचना और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी अभी भी बड़ी बाधा है। गणित और विज्ञान शिक्षकों को AI पढ़ाने के लिए तैयार करना एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जिसके लिए केवल SCERT प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं होगा। देश के अन्य राज्यों में इसी तरह के प्रयोगों का अनुभव बताता है कि बिना सतत शिक्षक सहयोग और मूल्यांकन ढाँचे के, ऐसे पाठ्यक्रम कागज़ों तक सीमित रह जाते हैं। 60 लाख छात्रों तक वास्तविक डिजिटल कौशल पहुँचाने के लिए सरकार को अवसंरचना और शिक्षक क्षमता में समानांतर निवेश करना होगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में AI पाठ्यक्रम क्या है?
तमिलनाडु सरकार कक्षा 6 से 8 तक के सभी सरकारी स्कूलों में 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजी' पाठ्यक्रम लागू करने की योजना बना रही है, जिसमें AI, कोडिंग, कंप्यूटेशनल थिंकिंग और डिजिटल टूल्स की प्रैक्टिकल शिक्षा शामिल है। यह पाठ्यक्रम पारंपरिक कंप्यूटर शिक्षा से आगे जाकर प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण पद्धति पर केंद्रित है।
यह पाठ्यक्रम कब से लागू होगा?
फिलहाल यह पाठ्यक्रम लगभग 5,000 सरकारी स्कूलों में पायलट आधार पर चल रहा है। कक्षा 6 से 8 के लिए SCERT द्वारा द्विभाषी पाठ्यपुस्तकें तैयार हो चुकी हैं, और कक्षा 9-10 की पुस्तकें अगले शैक्षणिक वर्ष में आने की उम्मीद है।
इस पाठ्यक्रम से कितने छात्रों को फायदा होगा?
अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु के स्टेट बोर्ड सिलेबस के तहत पढ़ने वाले 60 लाख से अधिक छात्रों को इस पहल का लाभ मिलने की उम्मीद है। इसमें सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त दोनों प्रकार के स्कूल शामिल होंगे।
पाठ्यक्रम में कौन-कौन से विषय पढ़ाए जाएंगे?
पाठ्यक्रम में जेनरेटिव AI, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, लार्ज लैंग्वेज मॉडल, AI-आधारित कंटेंट जनरेशन, कोडिंग और कंप्यूटेशनल थिंकिंग शामिल हैं। छात्रों को GeoGebra, Google Earth, PhET Simulation, Stellarium और LibreOffice जैसे शैक्षिक टूल्स पर प्रैक्टिकल अनुभव भी दिया जाएगा।
शिक्षकों को इस विषय के लिए कैसे तैयार किया जाएगा?
सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के गणित और विज्ञान शिक्षकों को SCERT द्वारा इस विषय को पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, कक्षा 11 और 12 के लिए उभरती तकनीक को वैकल्पिक विषय के रूप में पेश करने पर भी विचार किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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