मिशन शक्तिसैट: PM मोदी बोले — 108 देशों की 12,000 बेटियाँ चाँद की कक्षा तक पहुँचाएंगी सैटेलाइट
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को प्रसारित मन की बात के 137वें एपिसोड में मिशन शक्तिसैट का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की बेटियों की उड़ान अब धरती की सीमाओं को पार कर अंतरिक्ष तक पहुँच रही है। यह वैश्विक अंतरिक्ष पहल 108 देशों की 12,000 छात्राओं को सैटेलाइट प्रौद्योगिकी और STEM शिक्षा से जोड़ रही है।
मिशन शक्तिसैट क्या है
मिशन शक्तिसैट एक वैश्विक अंतरिक्ष कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य दुनिया भर की बालिकाओं को सैटेलाइट निर्माण से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियाँ सिखाना है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज हमारी बेटियों की शक्ति की उड़ान धरती से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुँच रही है। भारत ऐसे सपने देखने वाली दुनिया की हज़ारों बेटियों को एक साथ जोड़ रहा है और इस प्रयास का नाम है मिशन शक्तिसैट।' इस मिशन का अंतिम लक्ष्य पूरी तरह छात्राओं की भागीदारी से तैयार एक सैटेलाइट को चाँद की कक्षा में स्थापित करना है।
ग्रेटर नोएडा में दूसरे चरण की शुरुआत
23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में मिशन शक्तिसैट के दूसरे चरण का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों और भारत के दूरदराज क्षेत्रों से आई करीब 100 छात्राएँ एक मंच पर एकत्रित हुईं। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि मिशन की पहुँच शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण और दुर्गम इलाकों की प्रतिभाओं तक भी फैली है।
वैश्विक महत्त्व और भारत की भूमिका
यह पहल न केवल भारतीय छात्राओं, बल्कि 108 देशों की बालिकाओं को एक साझा इनोवेशन मंच प्रदान करती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर STEM क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है। भारत इस पहल के ज़रिये अंतरिक्ष कूटनीति और शैक्षिक नेतृत्व दोनों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री की अपेक्षाएँ
मोदी ने विश्वास जताया कि इस मिशन से जुड़ी छात्राएँ आने वाले वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएंगी। उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि इनमें से अनेक छात्राएँ आने वाले समय में साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएंगी।' मिशन शक्तिसैट की सफलता भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में समावेशी और लैंगिक-संतुलित भविष्य की नींव रखने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है।