30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मिशन शक्तिसैट: PM मोदी बोले — 108 देशों की 12,000 बेटियाँ चाँद की कक्षा तक पहुँचाएंगी सैटेलाइट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मिशन शक्तिसैट: PM मोदी बोले — 108 देशों की 12,000 बेटियाँ चाँद की कक्षा तक पहुँचाएंगी सैटेलाइट

सारांश

मन की बात के 137वें एपिसोड में PM मोदी ने मिशन शक्तिसैट की तस्वीर पेश की — जहाँ 108 देशों की 12,000 बेटियाँ मिलकर एक सैटेलाइट चाँद की कक्षा में भेजने की तैयारी कर रही हैं। ग्रेटर नोएडा से उठी यह लहर अब वैश्विक अंतरिक्ष शिक्षा का नया पड़ाव बन रही है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 137वें एपिसोड में मिशन शक्तिसैट का विस्तार से उल्लेख किया।
मिशन से 108 देशों की 12,000 छात्राएँ सैटेलाइट प्रौद्योगिकी और STEM शिक्षा से जुड़ रही हैं।
23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत हुई।
मिशन का अंतिम लक्ष्य छात्राओं द्वारा निर्मित सैटेलाइट को चाँद की कक्षा में स्थापित करना है।
भारत के दूरदराज क्षेत्रों सहित विभिन्न देशों की करीब 100 छात्राएँ ग्रेटर नोएडा कार्यक्रम में शामिल हुईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को प्रसारित मन की बात के 137वें एपिसोड में मिशन शक्तिसैट का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की बेटियों की उड़ान अब धरती की सीमाओं को पार कर अंतरिक्ष तक पहुँच रही है। यह वैश्विक अंतरिक्ष पहल 108 देशों की 12,000 छात्राओं को सैटेलाइट प्रौद्योगिकी और STEM शिक्षा से जोड़ रही है।

मिशन शक्तिसैट क्या है

मिशन शक्तिसैट एक वैश्विक अंतरिक्ष कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य दुनिया भर की बालिकाओं को सैटेलाइट निर्माण से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियाँ सिखाना है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज हमारी बेटियों की शक्ति की उड़ान धरती से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुँच रही है। भारत ऐसे सपने देखने वाली दुनिया की हज़ारों बेटियों को एक साथ जोड़ रहा है और इस प्रयास का नाम है मिशन शक्तिसैट।' इस मिशन का अंतिम लक्ष्य पूरी तरह छात्राओं की भागीदारी से तैयार एक सैटेलाइट को चाँद की कक्षा में स्थापित करना है।

ग्रेटर नोएडा में दूसरे चरण की शुरुआत

23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में मिशन शक्तिसैट के दूसरे चरण का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों और भारत के दूरदराज क्षेत्रों से आई करीब 100 छात्राएँ एक मंच पर एकत्रित हुईं। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि मिशन की पहुँच शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण और दुर्गम इलाकों की प्रतिभाओं तक भी फैली है।

वैश्विक महत्त्व और भारत की भूमिका

यह पहल न केवल भारतीय छात्राओं, बल्कि 108 देशों की बालिकाओं को एक साझा इनोवेशन मंच प्रदान करती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर STEM क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है। भारत इस पहल के ज़रिये अंतरिक्ष कूटनीति और शैक्षिक नेतृत्व दोनों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री की अपेक्षाएँ

मोदी ने विश्वास जताया कि इस मिशन से जुड़ी छात्राएँ आने वाले वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएंगी। उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि इनमें से अनेक छात्राएँ आने वाले समय में साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएंगी।' मिशन शक्तिसैट की सफलता भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में समावेशी और लैंगिक-संतुलित भविष्य की नींव रखने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — 108 देशों की 12,000 छात्राओं के बीच समन्वय, तकनीकी प्रशिक्षण की गुणवत्ता और चाँद की कक्षा तक सैटेलाइट पहुँचाने की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र चंद्रयान-3 की सफलता के बाद वैश्विक विश्वसनीयता के नए शिखर पर है, और इस साख का उपयोग लैंगिक समावेश के लिए करना रणनीतिक रूप से सटीक कदम है। हालाँकि, 'मन की बात' में उल्लेख से परे इस मिशन के बजट, संस्थागत ढाँचे और ISRO की प्रत्यक्ष भूमिका पर अधिक पारदर्शिता ज़रूरी है, ताकि यह महत्वाकांक्षा केवल भाषणों तक न सिमटे।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिशन शक्तिसैट क्या है?
मिशन शक्तिसैट एक वैश्विक अंतरिक्ष शिक्षा पहल है जो 108 देशों की 12,000 छात्राओं को सैटेलाइट प्रौद्योगिकी और STEM क्षेत्र से जोड़ती है। इसका अंतिम लक्ष्य पूरी तरह छात्राओं की भागीदारी से तैयार एक सैटेलाइट को चाँद की कक्षा में स्थापित करना है।
मिशन शक्तिसैट के दूसरे चरण की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में मिशन के दूसरे चरण का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों और भारत के दूरदराज क्षेत्रों से करीब 100 छात्राएँ एकत्रित हुईं।
PM मोदी ने मन की बात में मिशन शक्तिसैट का जिक्र क्यों किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात के 137वें एपिसोड में इस मिशन को भारत की बेटियों की वैज्ञानिक सामर्थ्य के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इसे लड़कियों को अंतरिक्ष विज्ञान और इनोवेशन में आगे लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास बताया।
मिशन शक्तिसैट से कौन-से देशों की छात्राएँ जुड़ी हैं?
इस मिशन में 108 देशों की 12,000 छात्राएँ शामिल हैं। भारत के दूरदराज क्षेत्रों की छात्राएँ भी इस वैश्विक मंच का हिस्सा हैं, जो इसे एक समावेशी और बहुराष्ट्रीय पहल बनाता है।
मिशन शक्तिसैट का अंतिम लक्ष्य क्या है?
मिशन का अंतिम लक्ष्य छात्राओं द्वारा स्वयं निर्मित एक सैटेलाइट को चाँद की कक्षा में भेजना है। इसके ज़रिये लड़कियों को सैटेलाइट बनाने से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान की तकनीकी बारीकियाँ सिखाई जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 4 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले