30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक: राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बी. नागेंद्र का मंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार किया, ₹89 करोड़ घोटाले में थे आरोपी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक: राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बी. नागेंद्र का मंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार किया, ₹89 करोड़ घोटाले में थे आरोपी

सारांश

₹89 करोड़ के कथित वाल्मीकि निगम घोटाले में दूसरी बार घिरे मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया। जून 2024 के बाद यह उनकी दूसरी मंत्री पद से विदाई है।

मुख्य बातें

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 29 अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत बी.
नागेंद्र का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पत्र के माध्यम से इस्तीफा स्वीकार करने की सिफारिश राज्यपाल को भेजी।
मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित ₹89 करोड़ की अनियमितताओं से जुड़ा है।
मई 2024 में एक निगम अधिकारी की आत्महत्या के बाद यह मामला सामने आया था।
नागेंद्र पहले जून 2024 में भी इसी मामले में इस्तीफा दे चुके थे; 3 अगस्त को उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल किया गया था।
BJP लगातार उनके इस्तीफे की माँग कर रही थी।

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र का मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। 29 अगस्त को जारी आधिकारिक अधिसूचना रविवार, 30 अगस्त को मीडिया के समक्ष सार्वजनिक की गई। यह कार्रवाई कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित ₹89 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले के बीच हुई है।

इस्तीफे की प्रक्रिया

आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर बी. नागेंद्र के इस्तीफे को स्वीकार करने की सिफारिश की। इसके बाद राज्यपाल गहलोत ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद मई 2024 में उस समय सार्वजनिक हुआ जब निगम के एक अधिकारी ने आत्महत्या कर ली और एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें निगम के बैंक खातों से कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से बड़ी रकम अन्य खातों में स्थानांतरित किए जाने का आरोप लगाया गया था। जाँच में सामने आया कि निगम के खातों से कथित तौर पर ₹89 करोड़ की राशि अनियमित रूप से ट्रांसफर की गई थी।

गौरतलब है कि इसी मामले में बी. नागेंद्र को पहले जून 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कैबिनेट में आदिवासी कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वे एक प्रमुख अनुसूचित जनजाति नेता माने जाते हैं।

दूसरी बार वापसी और फिर विदाई

कर्नाटक में सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद 3 अगस्त को बी. नागेंद्र को नई कैबिनेट में योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालाँकि, उनकी यह वापसी अल्पकालिक साबित हुई, क्योंकि भ्रष्टाचार के आरोप फिर से चर्चा में आ गए।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार बी. नागेंद्र के इस्तीफे की माँग करती रही थी। विपक्ष का तर्क था कि भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल करना कांग्रेस सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाता है। आलोचकों का कहना है कि यह मामला अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आवंटित विकास निधि के कुप्रबंधन की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

आगे क्या होगा

बी. नागेंद्र के मंत्री पद से हटने के बाद योजना एवं सांख्यिकी विभाग का प्रभार किसे सौंपा जाएगा, इस पर मुख्यमंत्री शिवकुमार जल्द निर्णय लेने की संभावना है। इस मामले में जाँच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और आगे कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उन्हें अगस्त में दोबारा कैबिनेट में क्यों शामिल किया गया। यह निर्णय मुख्यमंत्री शिवकुमार की नई सरकार की शुरुआत में ही उनकी साख पर सवाल खड़े करता है। ₹89 करोड़ के कथित घोटाले में एक अधिकारी की जान गई — यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के विकास कोष की सुरक्षा की विफलता है। जब तक जाँच एजेंसियाँ स्वतंत्र रूप से दोषियों को जवाबदेह नहीं ठहरातीं, तब तक केवल इस्तीफा स्वीकार करना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बी. नागेंद्र का इस्तीफा क्यों स्वीकार किया गया?
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित ₹89 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बी. नागेंद्र को मंत्री पद छोड़ना पड़ा। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सिफारिश पर संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत इस्तीफा स्वीकार किया।
वाल्मीकि निगम घोटाला क्या है?
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के बैंक खातों से कथित तौर पर ₹89 करोड़ की राशि अनधिकृत रूप से अन्य खातों में स्थानांतरित की गई। मई 2024 में निगम के एक अधिकारी की आत्महत्या के बाद छोड़े गए नोट से यह मामला सामने आया था।
क्या बी. नागेंद्र पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं?
हाँ, बी. नागेंद्र इसी मामले में जून 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कैबिनेट में आदिवासी कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके थे। 3 अगस्त को डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी के साथ दोबारा कैबिनेट में लिया गया था।
इस्तीफे की प्रक्रिया कैसे हुई?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर बी. नागेंद्र के इस्तीफे को स्वीकार करने की सिफारिश की। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 29 अगस्त को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर किया।
BJP ने इस मामले में क्या रुख अपनाया?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद से लगातार बी. नागेंद्र के इस्तीफे की माँग करती रही थी। विपक्ष ने दोबारा कैबिनेट में शामिल किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 23 घंटे पहले
  2. 23 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. कल
  7. कल
  8. 2 सप्ताह पहले