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मिशन शक्तिसैट: पंजाब की छात्रा टिया बनीं भारत की प्रतिनिधि, ISRO-इन-स्पेस समर्थित लूनर सैटेलाइट मिशन में चयन

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मिशन शक्तिसैट: पंजाब की छात्रा टिया बनीं भारत की प्रतिनिधि, ISRO-इन-स्पेस समर्थित लूनर सैटेलाइट मिशन में चयन

सारांश

पंजाब के एक सरकारी स्कूल की 12वीं की छात्रा टिया को ISRO और इन-स्पेस समर्थित 'मिशन शक्तिसैट' में भारत की प्रतिनिधि चुना गया है — यह 108 देशों की 12,000 छात्राओं का लूनर सैटेलाइट मिशन है। सरकारी स्कूल से वैश्विक अंतरिक्ष मंच तक की यह यात्रा पंजाब की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

मुख्य बातें

अमृतसर के स्कूल ऑफ एमिनेंस फॉर गर्ल्स की 12वीं कक्षा की छात्रा टिया को मिशन शक्तिसैट में भारत की राष्ट्रीय प्रतिनिधि चुना गया।
मिशन को ISRO और इन-स्पेस का समर्थन प्राप्त है; 108 देशों की 12,000 छात्राएं इसमें भाग ले रही हैं।
टिया अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आठ दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल होंगी।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स पर पोस्ट कर टिया और उनके मेंटर कमल कुमार व प्रिंसिपल मनदीप कौर को बधाई दी।
मिशन का संचालन स्पेस किड्स इंडिया कर रहा है, जिसका उद्देश्य 14 से 18 वर्ष की छात्राओं को उपग्रह निर्माण में प्रशिक्षित करना है।

अमृतसर के स्कूल ऑफ एमिनेंस फॉर गर्ल्स, मॉल रोड की 12वीं कक्षा की मेडिकल छात्रा टिया को मिशन शक्तिसैट के लिए भारत की राष्ट्रीय प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है। यह एक वैश्विक लूनर सैटेलाइट मिशन है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (इन-स्पेस) का समर्थन प्राप्त है और यह 108 देशों को जोड़ता है। 26 जून 2026 को पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर टिया को बधाई दी।

मिशन शक्तिसैट क्या है

मिशन शक्तिसैट एक वैश्विक अंतरिक्ष और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) शिक्षा अभियान है, जिसे एयरोस्पेस संगठन स्पेस किड्स इंडिया ने शुरू किया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर की 12,000 छात्राओं को उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष विज्ञान में प्रशिक्षित कर सशक्त बनाना है। मिशन में 14 से 18 वर्ष की आयु वर्ग की छात्राएं भाग ले रही हैं।

टिया का चयन और राष्ट्रीय कार्यशाला

मिशन के तहत 108 देशों में से प्रत्येक देश की एक-एक छात्रा — यानी कुल 108 छात्राएं — भारत आएंगी और पेलोड व स्पेसक्राफ्ट प्रोटोटाइप निर्माण की व्यावहारिक ट्रेनिंग लेंगी। टिया अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली आठ दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेंगी, जहाँ उन्हें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।

शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि पंजाब के सरकारी स्कूल अब वैश्विक स्तर के युवा वैज्ञानिक तैयार कर रहे हैं। उन्होंने टिया की इस उपलब्धि के लिए उनके मेंटर, केमिस्ट्री के लेक्चरर कमल कुमार और स्कूल की प्रिंसिपल मनदीप कौर को भी उनके सराहनीय योगदान के लिए बधाई दी।

आम जनता और शिक्षा जगत पर असर

यह चयन इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्कूलों की छात्राएं भी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हैं। स्कूल ऑफ एमिनेंस जैसी पहलें, जो पंजाब सरकार द्वारा संचालित हैं, इस तरह की उपलब्धियों की नींव तैयार कर रही हैं। यह उपलब्धि उन लाखों छात्राओं के लिए प्रेरणा बन सकती है जो विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं।

आगे की राह

टिया की यह यात्रा अगस्त 2026 में दिल्ली कार्यशाला से शुरू होगी, जहाँ वे 107 अन्य देशों की छात्राओं के साथ मिलकर लूनर सैटेलाइट मिशन के लिए काम करेंगी। मिशन शक्तिसैट की सफलता न केवल भारत की अंतरिक्ष शिक्षा क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगी, बल्कि STEM में लैंगिक समानता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर निजी संस्थानों की सफलता की कहानियों के पीछे दब जाता है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि एक छात्रा का चयन और व्यापक STEM पहुँच के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है — पंजाब के हज़ारों सरकारी स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी एक वास्तविकता है। मिशन शक्तिसैट जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच तभी सार्थक होंगे जब इनसे मिली प्रेरणा को ज़मीनी स्तर पर संरचनात्मक बदलाव में बदला जाए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिशन शक्तिसैट क्या है और इसमें भारत की भूमिका क्या है?
मिशन शक्तिसैट एक वैश्विक लूनर सैटेलाइट और STEM शिक्षा अभियान है, जिसे स्पेस किड्स इंडिया ने शुरू किया है और ISRO व इन-स्पेस इसे समर्थन देते हैं। इसमें 108 देशों की 12,000 छात्राएं भाग ले रही हैं और भारत से टिया को राष्ट्रीय प्रतिनिधि चुना गया है।
पंजाब की टिया कौन हैं और उन्हें कैसे चुना गया?
टिया अमृतसर के स्कूल ऑफ एमिनेंस फॉर गर्ल्स, मॉल रोड में 12वीं कक्षा की मेडिकल छात्रा हैं। उन्हें मिशन शक्तिसैट के लिए 108 देशों में से भारत की एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है।
मिशन शक्तिसैट की राष्ट्रीय कार्यशाला कब और कहाँ होगी?
राष्ट्रीय कार्यशाला अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होगी और यह आठ दिनों तक चलेगी। इसमें टिया पेलोड और स्पेसक्राफ्ट प्रोटोटाइप निर्माण की व्यावहारिक ट्रेनिंग लेंगी।
इस मिशन में कितने देशों की छात्राएं भाग ले रही हैं?
मिशन शक्तिसैट में 108 देशों की लगभग 12,000 छात्राएं भाग ले रही हैं, जिनकी आयु 14 से 18 वर्ष के बीच है। प्रत्येक देश से एक-एक छात्रा को चुना गया है जो भारत आकर प्रशिक्षण लेंगी।
पंजाब के शिक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि पर क्या कहा?
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स पर पोस्ट कर टिया को बधाई दी और कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूल अब वैश्विक स्तर के युवा वैज्ञानिक तैयार कर रहे हैं। उन्होंने टिया के मेंटर कमल कुमार और प्रिंसिपल मनदीप कौर को भी उनके योगदान के लिए सराहा।
राष्ट्र प्रेस
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