मिशन शक्तिसैट: पंजाब की छात्रा टिया बनीं भारत की प्रतिनिधि, ISRO-इन-स्पेस समर्थित लूनर सैटेलाइट मिशन में चयन
सारांश
मुख्य बातें
अमृतसर के स्कूल ऑफ एमिनेंस फॉर गर्ल्स, मॉल रोड की 12वीं कक्षा की मेडिकल छात्रा टिया को मिशन शक्तिसैट के लिए भारत की राष्ट्रीय प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है। यह एक वैश्विक लूनर सैटेलाइट मिशन है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (इन-स्पेस) का समर्थन प्राप्त है और यह 108 देशों को जोड़ता है। 26 जून 2026 को पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर टिया को बधाई दी।
मिशन शक्तिसैट क्या है
मिशन शक्तिसैट एक वैश्विक अंतरिक्ष और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) शिक्षा अभियान है, जिसे एयरोस्पेस संगठन स्पेस किड्स इंडिया ने शुरू किया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर की 12,000 छात्राओं को उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष विज्ञान में प्रशिक्षित कर सशक्त बनाना है। मिशन में 14 से 18 वर्ष की आयु वर्ग की छात्राएं भाग ले रही हैं।
टिया का चयन और राष्ट्रीय कार्यशाला
मिशन के तहत 108 देशों में से प्रत्येक देश की एक-एक छात्रा — यानी कुल 108 छात्राएं — भारत आएंगी और पेलोड व स्पेसक्राफ्ट प्रोटोटाइप निर्माण की व्यावहारिक ट्रेनिंग लेंगी। टिया अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली आठ दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेंगी, जहाँ उन्हें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।
शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि पंजाब के सरकारी स्कूल अब वैश्विक स्तर के युवा वैज्ञानिक तैयार कर रहे हैं। उन्होंने टिया की इस उपलब्धि के लिए उनके मेंटर, केमिस्ट्री के लेक्चरर कमल कुमार और स्कूल की प्रिंसिपल मनदीप कौर को भी उनके सराहनीय योगदान के लिए बधाई दी।
आम जनता और शिक्षा जगत पर असर
यह चयन इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्कूलों की छात्राएं भी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हैं। स्कूल ऑफ एमिनेंस जैसी पहलें, जो पंजाब सरकार द्वारा संचालित हैं, इस तरह की उपलब्धियों की नींव तैयार कर रही हैं। यह उपलब्धि उन लाखों छात्राओं के लिए प्रेरणा बन सकती है जो विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं।
आगे की राह
टिया की यह यात्रा अगस्त 2026 में दिल्ली कार्यशाला से शुरू होगी, जहाँ वे 107 अन्य देशों की छात्राओं के साथ मिलकर लूनर सैटेलाइट मिशन के लिए काम करेंगी। मिशन शक्तिसैट की सफलता न केवल भारत की अंतरिक्ष शिक्षा क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगी, बल्कि STEM में लैंगिक समानता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।