11 अगस्त 2026
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पीएम ई-ड्राइव योजना मार्च 2028 तक बढ़ी: इलेक्ट्रिक दोपहिया पर ₹5,000 तक की सब्सिडी, ₹11,900 करोड़ का बजट

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पीएम ई-ड्राइव योजना मार्च 2028 तक बढ़ी: इलेक्ट्रिक दोपहिया पर ₹5,000 तक की सब्सिडी, ₹11,900 करोड़ का बजट

सारांश

केंद्र सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया है, लेकिन इलेक्ट्रिक दोपहिया पर सब्सिडी पहले की तुलना में आधी कर दी गई है — ₹10,000 से घटाकर ₹5,000। ₹11,900 करोड़ के फंड-सीमित बजट में जो पहले आएगा, वही लाभ उठाएगा।

मुख्य बातें

पीएम ई-ड्राइव योजना की अवधि दो वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक की गई।
इलेक्ट्रिक दोपहिया पर प्रोत्साहन ₹2,500 प्रति kWh , अधिकतम ₹5,000 प्रति वाहन — पहले यह सीमा ₹10,000 थी।
पात्र वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कुल बजट ₹11,900 करोड़ ; अधिकतम 45.79 लाख वाहनों को सहायता का लक्ष्य।
सब्सिडी दावे जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2027 ; बजट समाप्त होने पर योजना पहले भी बंद हो सकती है।

केंद्र सरकार ने 11 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (पीएम ई-ड्राइव) योजना की अवधि दो वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दी है, जिससे इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन (ईवी-2डब्ल्यू) खरीदारों को ₹5,000 तक की सब्सिडी मिलती रहेगी। भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित योजना के लिए ₹11,900 करोड़ का कुल बजट निर्धारित किया गया है, जिसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना और घरेलू ईवी विनिर्माण को सुदृढ़ करना है।

योजना की नई शर्तें और प्रोत्साहन संरचना

1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खरीद पर यह प्रोत्साहन लागू होगा। सरकार ने प्रोत्साहन दर ₹2,500 प्रति किलोवाट-घंटा (kWh) तय की है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन होगी। इसके साथ ही, सब्सिडी की राशि वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी — यानी अधिकतम निर्धारित प्रोत्साहन और वाहन मूल्य के 15% में से जो कम होगा, वही लाभार्थी को मिलेगा।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र इलेक्ट्रिक दोपहिया की एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। मंत्रालय ने अधिकतम 45.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सहायता देने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए ₹2,767 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पुरानी योजना से तुलना: सब्सिडी में कमी

गौरतलब है कि नई व्यवस्था में मिलने वाला प्रोत्साहन पहले की तुलना में कम है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इलेक्ट्रिक दोपहिया पर ₹5,000 प्रति kWh की दर से प्रोत्साहन दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा ₹10,000 प्रति वाहन थी। यानी नई योजना में प्रति kWh प्रोत्साहन आधा और अधिकतम सीमा भी आधी कर दी गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ईवी की उत्पादन लागत में आने वाली कमी को देखते हुए प्रति kWh प्रोत्साहन राशि की समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है।

फंड-सीमित योजना: बजट खत्म होते ही बंद

पीएम ई-ड्राइव एक फंड-सीमित योजना के रूप में संचालित होगी। इसका अर्थ है कि कुल भुगतान ₹11,900 करोड़ के निर्धारित बजट तक ही सीमित रहेगा। यदि किसी विशेष घटक के लिए आवंटित राशि समय से पहले समाप्त हो जाती है, तो उस घटक को बंद किया जा सकता है और उसके बाद के नए दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यह प्रावधान खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सब्सिडी की उपलब्धता अंतिम तिथि से पहले भी समाप्त हो सकती है।

समयसीमा और दावे की अंतिम तिथि

योजना के तहत सभी श्रेणियों के लिए 31 मार्च 2028 अंतिम तारीख निर्धारित है। हालांकि, सब्सिडी दावे जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2027 रखी गई है। यह अंतर महत्वपूर्ण है — वाहन खरीद और दावा प्रस्तुति की समयसीमा अलग-अलग है, जिससे खरीदारों को समय रहते आवेदन करना होगा।

व्यापक लक्ष्य और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत ईवी अपनाने की दर बढ़ाने और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता दे रहा है। योजना का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को ईवी निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है। मंत्रालय के अनुसार, चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि रेंज-एंग्ज़ाइटी जैसी उपभोक्ता चिंताओं को दूर किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से घटाकर ₹5,000 करना सरकार की उस सोच को दर्शाता है कि ईवी बाज़ार अब परिपक्व हो रहा है और उसे कम सरकारी सहारे की ज़रूरत है — लेकिन यह तर्क उन निम्न-मध्यवर्गीय खरीदारों के लिए कमज़ोर पड़ता है जिनके लिए ₹5,000 की बचत भी निर्णायक होती है। फंड-सीमित ढाँचा व्यावहारिक रूप से 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति बनाता है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण उन्हें नुकसान पहुँचा सकती है। ₹1.5 लाख की मूल्य सीमा बाज़ार में उपलब्ध अधिकांश बजट ईवी को कवर करती है, लेकिन प्रीमियम सेगमेंट को बाहर रखती है — यह एक सोचा-समझा कदम है। असली परीक्षा यह होगी कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार सब्सिडी की रफ्तार से हो पाता है या नहीं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है और इसे क्यों बढ़ाया गया?
पीएम ई-ड्राइव भारत सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन योजना है, जिसे अब 31 मार्च 2028 तक दो वर्ष के लिए बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना, चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना और घरेलू ईवी विनिर्माण को मज़बूत करना है।
इलेक्ट्रिक दोपहिया पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच खरीदे गए पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया पर ₹2,500 प्रति kWh की दर से प्रोत्साहन मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन है। साथ ही, यह राशि वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15% से अधिक नहीं होगी।
पीएम ई-ड्राइव योजना का लाभ किन वाहनों को मिलेगा?
जिन इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख या उससे कम है, वे इस योजना के लिए पात्र हैं। मंत्रालय ने अधिकतम 45.79 लाख वाहनों को सहायता देने का लक्ष्य रखा है।
क्या सब्सिडी पहले की तुलना में कम हो गई है?
हाँ, वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रिक दोपहिया पर ₹5,000 प्रति kWh और अधिकतम ₹10,000 प्रति वाहन की सब्सिडी मिलती थी। नई योजना में यह दर ₹2,500 प्रति kWh और अधिकतम ₹5,000 प्रति वाहन कर दी गई है। मंत्रालय ने कहा है कि ईवी लागत में कमी के अनुसार इसकी समीक्षा होती रहेगी।
सब्सिडी के लिए दावा कब तक करना होगा?
सब्सिडी दावे जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2027 है, जबकि वाहन खरीद की अंतिम तिथि 31 मार्च 2028 है। चूँकि यह फंड-सीमित योजना है, बजट समाप्त होने पर योजना निर्धारित तिथि से पहले भी बंद हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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