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केंद्र सरकार का ईवी और महत्वपूर्ण खनिजों के माध्यम से तेल निर्भरता कम करने का प्रयास

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केंद्र सरकार का ईवी और महत्वपूर्ण खनिजों के माध्यम से तेल निर्भरता कम करने का प्रयास

सारांश

पश्चिम एशिया संकट और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच, केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों और खनिजों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। यह कदम तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। जानें कैसे ये पहल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार का ईवी और खनिजों के माध्यम से तेल निर्भरता को कम करने का प्रयास।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 10,900 करोड़ का प्रावधान।
आरईपीएम योजना का लक्ष्य 6,000 एमटीपीए निर्माण क्षमता।
इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते और भरोसेमंद बनेंगे।
घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सोमवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण खनिजों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि संकट की स्थिति शुरू होने के बाद से भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बनाए रखने और ईवी के घटकों की सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और उपयोग को बढ़ाने के लिए 10,900 करोड़ रुपए की पीएम ई-ड्राइव योजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है।

सरकार ने इस बात की जानकारी दी है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया सेगमेंट के लिए 31 जुलाई 2026 तक तीन महीने की अवधि के लिए विस्तार किया गया है, जबकि इलेक्ट्रिक तीनपहिया सेगमेंट, जिसमें ई-रिक्शा और ई-कार्ट शामिल हैं, को 31 मार्च 2028 तक दो साल के लिए बढ़ाया गया है।

पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत नीति समर्थन को इस तरह से सरल बनाया गया है कि प्रोत्साहन योजनाएं लगातार जारी रहें, जिससे ईवी अपनाने में तेजी आए और घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिले।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर 2025 को 7,280 करोड़ रुपए की लागत से 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम)' के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी थी।

इस योजना का उद्देश्य भारत में 6,000 एमटीपीए की एकीकृत आरईपीएम निर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके और 'आत्मनिर्भर भारत' और 'नेट जीरो 2070' जैसे लक्ष्यों को समर्थन मिले।

इसके साथ ही, प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि सरकार आरईपीएम योजना को तेजी से लागू करने के लिए कदम उठा रही है, जिससे ईवी घटकों का स्थानीय स्तर पर निर्माण बढ़ सके। इसके लिए उद्योग जगत, ओईएम और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है।

इस दिशा में 7 अप्रैल 2026 को 25 प्रमुख कंपनियों के साथ एक प्री-बिड बैठक आयोजित की गई थी, जबकि 20 मार्च 2026 को टेंडर (आरएफपी) जारी किया गया था। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ सीपीपी पोर्टल पर की जा रही है।

इन प्रयासों को फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम का भी समर्थन मिल रहा है, जिसका उद्देश्य ईवी निर्माण में घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ाना है।

सरकार का कहना है कि पीएम ई-ड्राइव, आरईपीएम और फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम के संयुक्त प्रभाव से ईवी इकोसिस्टम पूरी तरह मजबूत होगा।

जहां पीएम ई-ड्राइव योजना मांग बढ़ाने में सहायक होगी, वहीं आरईपीएम योजना सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों को दूर करेगी। जबकि फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम आयात पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगा।

इन पहलों से मैन्युफैक्चरर्स, एमएसएमई और कंपोनेंट सप्लायर्स को घरेलू उत्पादन, स्थिर सप्लाई चेन और निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

प्रेस विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि इन कदमों का लाभ नागरिकों के लिए यह होगा कि इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते, आसानी से उपलब्ध और अधिक भरोसेमंद बनेंगे। साथ ही, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होने से वैश्विक कीमतों के प्रभाव से भी कुछ राहत मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की यह पहल न केवल ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह घरेलू उद्योग को भी प्रोत्साहित करेगी। ईवी और महत्वपूर्ण खनिजों के उपयोग में वृद्धि से न केवल आयात में कमी आएगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह सभी नागरिकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है?
पीएम ई-ड्राइव योजना एक पहल है जिसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 10,900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
आरईपीएम योजना का उद्देश्य क्या है?
आरईपीएम योजना का उद्देश्य भारत में 6,000 एमटीपीए की निर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य सेक्टर्स के लिए सप्लाई चेन मजबूत हो सके।
केंद्र सरकार के ये कदम आम नागरिकों के लिए कैसे फायदेमंद हैं?
इन कदमों से इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते और ज्यादा भरोसेमंद बनेंगे, जिससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक कीमतों के प्रभाव से राहत मिलेगी।
क्या ये योजनाएं घरेलू उद्योग को प्रभावित करेंगी?
जी हां, इन पहलों से घरेलू मैन्युफैक्चरर्स, MSMEs और सप्लायर्स को बेहतर निवेश और उत्पादन के अवसर मिलेंगे।
सरकार ने कब और किस योजना को मंजूरी दी थी?
सरकार ने 26 नवंबर 2025 को 7,280 करोड़ रुपए की लागत से 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम)' के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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