मिशन शक्तिसैट: सेशेल्स की प्रथम महिला मैडम वेरोनिक हर्मिनी ने ग्रेटर नोएडा में 108 देशों की बालिका वैज्ञानिकों से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
सेशेल्स की प्रथम महिला मैडम वेरोनिक हर्मिनी ने 28 अगस्त 2026 को ग्रेटर नोएडा स्थित मिशन शक्तिसैट का दौरा किया और 108 देशों से आई युवा बालिका वैज्ञानिकों को संबोधित किया। महिला नेतृत्व, वैश्विक कूटनीति और अंतरिक्ष विज्ञान के संगम पर आयोजित इस कार्यक्रम को दो प्रेरक महिलाओं के ऐतिहासिक मिलन के रूप में देखा जा रहा है।
दो 'माँ' का मिलन — एक वैश्विक संदेश
अपने देश में स्नेहपूर्वक 'सेशेल्स की माँ' कहलाने वाली मैडम हर्मिनी की मुलाकात मिशन शक्तिसैट की प्रेरक शक्ति 'स्पेस मॉम' से हुई। आयोजकों के अनुसार, इस मिलन ने यह संदेश दिया कि बेटियों के सपनों की कोई भौगोलिक या वैज्ञानिक सीमा नहीं होती — वे विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊंचाइयाँ हासिल कर सकती हैं।
मैडम हर्मिनी ने उपस्थित युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए महिलाओं और बेटियों को विज्ञान एवं तकनीक में आगे बढ़ने तथा बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उनके संबोधन में वैश्विक स्तर पर लड़कियों के लिए नए अवसर सृजित करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से झलकी।
मिशन शक्तिसैट: क्या है यह वैश्विक पहल
आयोजकों के अनुसार, मिशन शक्तिसैट दुनिया के सबसे बड़े ऑल-गर्ल्स चंद्र मिशनों में से एक है। इसका संचालन डॉ. केसन के नेतृत्व में किया जा रहा है और इसमें 108 से अधिक देशों की बालिका वैज्ञानिकों को एक साझा वैज्ञानिक मंच पर लाने का प्रयास है। मिशन का मुख्य उद्देश्य अगली पीढ़ी की महिलाओं को अंतरिक्ष विज्ञान के अग्रिम मोर्चे से जोड़ना और उन्हें वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने के अवसर उपलब्ध कराना है।
यह मिशन स्पेस किड्ज इंडिया से भी जुड़ा है — एक ऐसा संगठन जो युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ने पर केंद्रित है। आयोजकों के अनुसार, स्पेस किड्ज इंडिया के पास 27 उपग्रह मिशनों के निर्माण और प्रक्षेपण का अनुभव है और उसने विद्यार्थी-संचालित अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
कार्यक्रम में अन्य उल्लेखनीय उपस्थिति
इस आयोजन में सेविंग्स के फाउंडर मदन भारद्वाज भी उपस्थित रहे। उनकी ओर से सभी देशों से आई युवा बालिकाओं के लिए मुफ्त कैंसर स्क्रीनिंग वैन की भी व्यवस्था की गई थी, जो इस वैज्ञानिक आयोजन में स्वास्थ्य जागरूकता का एक अतिरिक्त आयाम जोड़ता है।
मैडम हर्मिनी की उपस्थिति को मिशन के वैश्विक संरक्षकों और गणमान्य व्यक्तियों के समूह में एक नई प्रभावशाली आवाज के रूप में देखा जा रहा है। यह यात्रा भारत-सेशेल्स के बीच शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आम जनता और युवा पीढ़ी पर असर
मिशन शक्तिसैट का दायरा केवल एक अंतरिक्ष मिशन तक सीमित नहीं है — यह दुनिया के अलग-अलग देशों की बेटियों को एक साझा वैज्ञानिक और मानवीय उद्देश्य से जोड़ने का प्रयास है। इसके माध्यम से लड़कियों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की व्यावहारिक शिक्षा, मार्गदर्शन और भविष्य के अवसरों से परिचित कराया जा रहा है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर STEM क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर गंभीर चर्चा हो रही है। मिशन शक्तिसैट को स्पेस किड्ज इंडिया की अब तक की सबसे व्यापक वैश्विक पहलों में से एक बताया जा रहा है।
आगे की राह
मैडम वेरोनिक हर्मिनी की यात्रा ने इस अभियान को महिला नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक मजबूत संदेश दिया है। आयोजकों के अनुसार, यदि बेटियों को सही अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो वे धरती से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी पहचान बना सकती हैं — और यही मिशन शक्तिसैट का मूल संकल्प है।