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'वन्स अपॉन ए टाइम इन द मिडिल ईस्ट': युद्ध के बीच रसोई से शांति का संदेश देती चीनी फिल्म

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'वन्स अपॉन ए टाइम इन द मिडिल ईस्ट': युद्ध के बीच रसोई से शांति का संदेश देती चीनी फिल्म

सारांश

'वन्स अपॉन ए टाइम इन द मिडिल ईस्ट' सिर्फ युद्ध फिल्म नहीं — यह रसोई से शांति की तलाश है। बगदाद के एक चीनी रेस्टोरेंट की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म डोबान पर 8.6 रेटिंग और 2.5 अरब युआन कमाई के अनुमान के साथ चीनी सिनेमा का नया मील का पत्थर बन रही है।

मुख्य बातें

चीनी फिल्म 'वन्स अपॉन ए टाइम इन द मिडिल ईस्ट' निर्देशक वेन मुये ने बनाई है, जो 11 अगस्त 2026 को चीन में रिलीज़ हुई।
माओयान के अनुसार फिल्म की चीन में 2.5 अरब युआन से अधिक कमाई का अनुमान है; डोबान रेटिंग 8.6 ।
फिल्म की कहानी 2004 में बगदाद में चीनी रेस्टोरेंट चलाने वाले शुआई ज़ुएजुन के वास्तविक अनुभवों से प्रेरित है।
इराकी अभिनेता अहमद मोहम्मद जाबेर अलकलथूम का किरदार युद्ध की मनोवैज्ञानिक पीड़ा को सामने लाता है।
फिल्म में भोजन को सामान्य जीवन और शांति के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है; 'शू फू राइस स्टू' एक भावनात्मक प्रतीक बनता है।

चीनी फिल्म 'वन्स अपॉन ए टाइम इन द मिडिल ईस्ट' ने युद्ध की पारंपरिक कहानी को एक अलग नज़रिए से पेश किया है — बंदूकों और बमों की जगह, एक रेस्टोरेंट की रसोई को कहानी का केंद्र बनाकर। 11 अगस्त 2026 को चीन में रिलीज़ हुई इस फिल्म को दर्शकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और माओयान के अनुमान के अनुसार यह 2.5 अरब युआन से अधिक की कमाई कर सकती है।

फिल्म की कहानी

निर्देशक वेन मुये की यह फिल्म चीनी रसोइए शू फू की कहानी है, जो कर्ज़ चुकाने के लिए मध्य-पूर्व जाता है और वहाँ एक चीनी रेस्टोरेंट में काम शुरू करता है। रेस्टोरेंट मैनेजर मा जुनशेंग के साथ मिलकर वह एक ऐसी जगह बनाता है जहाँ अलग-अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। युद्ध छिड़ते ही यही रेस्टोरेंट संघर्ष, पलायन और मानवीय रिश्तों का अप्रत्याशित केंद्र बन जाता है।

खाना — शांति और अपनेपन का प्रतीक

फिल्म में भोजन महज़ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि सामान्य जीवन, सुरक्षा और शांति का प्रतीक है। युद्ध की विभीषिका के बीच शू फू अनाथ बच्चों के लिए चावल पकाता है — यह साधारण-सा भोजन उन बच्चों को अपनापन और सुरक्षा का एहसास देता है और बाद में 'शू फू राइस स्टू' के नाम से जाना जाता है। यह दृश्य फिल्म का सबसे भावनात्मक क्षण बन जाता है।

वास्तविक जीवन से प्रेरणा

फिल्म की कहानी का आधार इराक में चीनी रेस्टोरेंट चलाने वाले शुआई ज़ुएजुन के वास्तविक अनुभवों से जुड़ा है। 2004 में बगदाद में उन्होंने अपना रेस्टोरेंट शुरू किया था, जहाँ युद्ध के दौर में भी स्थानीय ग्राहकों के साथ मानवीय रिश्ते कायम रहे। उनके अनुभव यह बताते हैं कि युद्ध की यादों में केवल धमाकों की आवाज़ नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में साथ खड़े लोगों की गर्माहट भी दर्ज होती है।

इराकी कलाकार का अनुभव

फिल्म में इराकी अभिनेता और फूड ब्लॉगर अहमद मोहम्मद जाबेर अलकलथूम की भूमिका युद्ध की मनोवैज्ञानिक पीड़ा को बेहद संजीदगी से सामने लाती है। बचपन में युद्ध देख चुके जाबेर ने बताया कि चीन में पटाखों की आवाज़ सुनकर भी उन्होंने एक पल के लिए बम विस्फोट समझ लिया था — यह वाकया युद्ध के दीर्घकालिक मानसिक घावों की गहरी तस्वीर खींचता है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया और आगे की राह

पारंपरिक युद्ध फिल्मों से अलग, इस फिल्म का नायक कोई सुपरहीरो नहीं बल्कि एक आम इंसान है। शू फू धीरे-धीरे दूसरों की तकलीफों से जुड़ता है और मा जुनशेंग बच्चों की रक्षा करते हुए बलिदान देता है। डोबान पर फिल्म को 8.6 की प्रभावशाली रेटिंग मिली है। फिल्म का संदेश सीधा और गहरा है — युद्ध की सबसे बड़ी कीमत आम ज़िंदगी चुकाती है, और एक गर्म भोजन भी शांति की सबसे बड़ी तस्वीर बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का यह भी कहना है कि इराक युद्ध जैसे संवेदनशील विषय पर चीनी नज़रिए की अपनी सीमाएँ हो सकती हैं। 2.5 अरब युआन की संभावित कमाई यह साबित करती है कि दर्शक युद्ध की 'मानवीय कीमत' वाली कहानियों के लिए तैयार हैं — लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह फिल्म चीन की सीमाओं के बाहर भी उतनी ही प्रासंगिक साबित होती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वन्स अपॉन ए टाइम इन द मिडिल ईस्ट' फिल्म किस बारे में है?
यह चीनी फिल्म एक रसोइए शू फू की कहानी है जो मध्य-पूर्व में एक चीनी रेस्टोरेंट में काम करता है और युद्ध के बीच मानवीय रिश्तों और शांति की तलाश करता है। निर्देशक वेन मुये ने भोजन को युद्ध के बीच शांति और अपनेपन के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया है।
फिल्म की बॉक्स ऑफिस कमाई कितनी है?
माओयान के अनुमान के अनुसार फिल्म चीन में 2.5 अरब युआन से अधिक की कमाई कर सकती है। डोबान पर इसे 8.6 की रेटिंग मिली है, जो इसे दर्शकों में बेहद लोकप्रिय साबित करती है।
क्या फिल्म किसी वास्तविक घटना पर आधारित है?
हाँ, फिल्म की कहानी का एक हिस्सा शुआई ज़ुएजुन के वास्तविक अनुभवों से प्रेरित है, जिन्होंने 2004 में बगदाद में एक चीनी रेस्टोरेंट चलाया था। युद्ध के दौर में भी उनके स्थानीय ग्राहकों के साथ मानवीय रिश्ते बने रहे।
फिल्म में इराकी कलाकार की क्या भूमिका है?
इराकी अभिनेता और फूड ब्लॉगर अहमद मोहम्मद जाबेर अलकलथूम का किरदार युद्ध की मनोवैज्ञानिक पीड़ा को दर्शाता है। बचपन में युद्ध देख चुके जाबेर ने बताया कि चीन में पटाखों की आवाज़ सुनकर भी उन्होंने एक पल के लिए बम विस्फोट समझ लिया था।
यह फिल्म पारंपरिक युद्ध फिल्मों से कैसे अलग है?
इस फिल्म का नायक कोई सुपरहीरो या सैनिक नहीं, बल्कि एक आम रसोइया है। फिल्म युद्ध को बंदूकों और बमों के बजाय एक रेस्टोरेंट की रसोई के नज़रिए से दिखाती है, जहाँ भोजन शांति और मानवीय जुड़ाव का प्रतीक बनता है।
राष्ट्र प्रेस
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