नेपाल बाढ़: 469 मौतें, 977 लापता; नुवाकोट में 30-35 किमी क्षेत्र तबाह, नई बाढ़ की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के नुवाकोट और आसपास के जिलों में 28 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। प्रभावित इलाकों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, और राहत-बचाव कार्य जारी रहने के बावजूद स्थिति अत्यंत गंभीर है।
तबाही का विस्तार
नुवाकोट में राहत कार्य में जुटे एक स्वयंसेवक ने बताया कि वे काठमांडू से प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों का आकलन करने पहुँचे थे। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि यह आपदा कैसे आई। सब कुछ एक ही झटके में बह गया। लोगों को बाढ़ की कोई चेतावनी नहीं मिली थी। किसी ने इतनी बड़ी तबाही की कल्पना भी नहीं की थी। यहाँ की मुख्य सड़क समेत 30 से 35 किलोमीटर का इलाका पूरी तरह बह गया है।'
स्वयंसेवक के अनुसार, फिलहाल भोजन, पीने का पानी और रात में ठहरने की व्यवस्था सबसे बड़ी ज़रूरत है। कई मृतकों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है।
सांसद की ज़मीनी रिपोर्ट
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सांसद धनेंद्र कार्की ने बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र सिंधुली से अकेले 50 से 60 लोग लापता हैं। उन्होंने कहा, 'हम अभी तक उनका कोई पता नहीं लगा पाए हैं। अब फिर से जानकारी मिली है कि एक बाँध टूट गया है।' कार्की ने बताया कि नेपाल सरकार राहत और बचाव के लिए 20 से 22 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की संख्या और उनमें से आपदा में मारे गए लोगों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।
भारत की सहायता और कृतज्ञता
सांसद कार्की ने संकट के समय सहायता भेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल की बहुत मदद की है। इस कठिन समय में नेपाल का साथ देने के लिए मैं भारत सरकार के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।'
नेपाल के पूर्व वित्त मंत्री बरषमान पुन ने भी भारत की सहायता की सराहना की। उन्होंने कहा, 'एक सच्चे पड़ोसी की तरह प्रधानमंत्री मोदी का त्वरित समर्थन संदेश और भारत सरकार की राहत सहायता बेहद सराहनीय है। नेपाल की जनता और सभी राजनीतिक दलों की ओर से मैं भारत का धन्यवाद करता हूँ।'
मानवीय संकट की गहराई
बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता में जुटी संस्था कोरस इंटरनेशनल की मुख्य मानवीय अधिकारी तमारा डेमुरिया ने कहा कि तबाही का स्तर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया, 'मैं नदी के किनारे-किनारे उत्तर दिशा तक नुकसान का जायजा लेने गई थी। जो दृश्य मैंने देखे, वे बेहद भयावह थे। कई घर पूरी तरह बह गए हैं, सोलर पैनल पानी में समा गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका खत्म हो गई है।'
नई बाढ़ का खतरा, बचाव अभियान रुका
नेपाल ने एक नई बाढ़ की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत सीमा के पास ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट के ऊपर स्थित एक अवरोधक झील का किनारा टूट गया है, जिससे फिर से बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।
नेपाल पुलिस के अधिकारी पी. चौधरी ने बताया, 'हमें सूचना मिली है कि चीन सीमा की ओर से आने वाले पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ रहा है। इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सामान्य अलर्ट जारी किया गया है और बचाव अभियान को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।'
गौरतलब है कि नेपाल हर मानसून सीजन में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आता है, लेकिन इस बार का संकट पिछले कई वर्षों में सबसे गंभीर माना जा रहा है। लापता लोगों की तलाश और नई बाढ़ की आशंका के बीच आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है।