आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने पर कर्मचारियों का निलंबन असंवैधानिक: वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने 28 अगस्त को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला, जहाँ कथित तौर पर दो सरकारी कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पथ संचलन में भाग लेने के कारण निलंबित किया गया। वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस कार्रवाई को संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए तत्काल निलंबन वापस लेने और सरकार से माफी माँगने की माँग की।
निलंबन का मामला क्या है
बंसल के अनुसार, 20 अगस्त को कर्नाटक सरकार ने दो सरकारी कर्मचारियों को केवल इस आधार पर निलंबित कर दिया कि वे आरएसएस के पथ संचलन में शामिल हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई कर्मचारी रविवार या अवकाश के दिन, अपने सरकारी कर्तव्यों को बाधित किए बिना, किसी संगठन के कार्यक्रम में जाता है, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं बनता।
वीएचपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि महज शिकायत मिलने से, बिना उचित जाँच के, किसी कर्मचारी को दंडित करना प्रशासनिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला
बंसल ने संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने का अधिकार प्राप्त है। उनका तर्क था कि सरकारी कर्मचारी भी इन मौलिक स्वतंत्रताओं से वंचित नहीं किए जा सकते। आरएसएस के 'अपंजीकृत संगठन' होने के आधार पर कर्मचारियों की भागीदारी पर आपत्ति जताए जाने को उन्होंने अनुचित बताया।
कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप
वीएचपी प्रवक्ता ने एक विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया — 20 अगस्त को जिस दिन कर्नाटक में निलंबन आदेश जारी हुआ, उसी दिन संसद में केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से यह बयान दिया गया कि आरएसएस के विरुद्ध कोई मामला विचाराधीन नहीं है और उसकी शाखाओं में कोई अवैध गतिविधि नहीं होती। बंसल ने पूछा कि जब सरकार का यही आधिकारिक रुख है, तो आरएसएस कार्यक्रम में जाने वाले कर्मचारियों को दंडित करने का क्या आधार है।
उन्होंने कर्नाटक के गृह मंत्री के रवैये को राष्ट्रवादी संगठनों के प्रति पक्षपातपूर्ण बताया और कांग्रेस से निलंबन वापस लेकर माफी माँगने की माँग की।
दिल्ली हत्याकांड पर भी उठाई आवाज़
बंसल ने नई दिल्ली में एक जिम ट्रेनर पर युवती की हत्या के आरोप वाले मामले को 'अत्यंत दर्दनाक' बताया। उनके अनुसार, युवती द्वारा विवाह प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद यह कृत्य किया गया, और आरोपी ने जिम के माध्यम से पीड़िता से संपर्क बनाया था। उन्होंने माँग की कि पुलिस केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरी साजिश और उसमें किसी अन्य व्यक्ति या समूह की संभावित भूमिका की भी व्यापक जाँच करे।
आगे क्या होगा
वीएचपी की माँग के बाद यह देखना होगा कि कर्नाटक सरकार निलंबित कर्मचारियों के मामले में क्या रुख अपनाती है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और संघ परिवार के संगठनों के बीच राजनीतिक तनाव पहले से बना हुआ है। दिल्ली हत्याकांड में जाँच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर भी नज़र रहेगी।