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आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने पर कर्मचारियों का निलंबन असंवैधानिक: वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल

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आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने पर कर्मचारियों का निलंबन असंवैधानिक: वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल

सारांश

कर्नाटक में आरएसएस पथ संचलन में शामिल होने पर दो सरकारी कर्मचारियों के निलंबन को वीएचपी ने असंवैधानिक करार दिया। प्रवक्ता विनोद बंसल ने अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया और निलंबन वापस लेकर माफी माँगने की माँग की।

मुख्य बातें

वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने कर्नाटक में आरएसएस पथ संचलन में भाग लेने पर 2 सरकारी कर्मचारियों के निलंबन को असंवैधानिक बताया।
निलंबन आदेश 20 अगस्त को जारी हुआ — उसी दिन संसद में गृह मंत्री ने कहा कि आरएसएस के विरुद्ध कोई मामला विचाराधीन नहीं।
बंसल ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी भी अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता के अधिकारी हैं।
वीएचपी ने कांग्रेस से निलंबन वापस लेने और माफी माँगने की माँग की।
नई दिल्ली के जिम ट्रेनर हत्याकांड में बंसल ने पूरी साजिश की व्यापक जाँच की माँग की।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने 28 अगस्त को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला, जहाँ कथित तौर पर दो सरकारी कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पथ संचलन में भाग लेने के कारण निलंबित किया गया। वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस कार्रवाई को संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए तत्काल निलंबन वापस लेने और सरकार से माफी माँगने की माँग की।

निलंबन का मामला क्या है

बंसल के अनुसार, 20 अगस्त को कर्नाटक सरकार ने दो सरकारी कर्मचारियों को केवल इस आधार पर निलंबित कर दिया कि वे आरएसएस के पथ संचलन में शामिल हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई कर्मचारी रविवार या अवकाश के दिन, अपने सरकारी कर्तव्यों को बाधित किए बिना, किसी संगठन के कार्यक्रम में जाता है, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं बनता।

वीएचपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि महज शिकायत मिलने से, बिना उचित जाँच के, किसी कर्मचारी को दंडित करना प्रशासनिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला

बंसल ने संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने का अधिकार प्राप्त है। उनका तर्क था कि सरकारी कर्मचारी भी इन मौलिक स्वतंत्रताओं से वंचित नहीं किए जा सकते। आरएसएस के 'अपंजीकृत संगठन' होने के आधार पर कर्मचारियों की भागीदारी पर आपत्ति जताए जाने को उन्होंने अनुचित बताया।

कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप

वीएचपी प्रवक्ता ने एक विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया — 20 अगस्त को जिस दिन कर्नाटक में निलंबन आदेश जारी हुआ, उसी दिन संसद में केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से यह बयान दिया गया कि आरएसएस के विरुद्ध कोई मामला विचाराधीन नहीं है और उसकी शाखाओं में कोई अवैध गतिविधि नहीं होती। बंसल ने पूछा कि जब सरकार का यही आधिकारिक रुख है, तो आरएसएस कार्यक्रम में जाने वाले कर्मचारियों को दंडित करने का क्या आधार है।

उन्होंने कर्नाटक के गृह मंत्री के रवैये को राष्ट्रवादी संगठनों के प्रति पक्षपातपूर्ण बताया और कांग्रेस से निलंबन वापस लेकर माफी माँगने की माँग की।

दिल्ली हत्याकांड पर भी उठाई आवाज़

बंसल ने नई दिल्ली में एक जिम ट्रेनर पर युवती की हत्या के आरोप वाले मामले को 'अत्यंत दर्दनाक' बताया। उनके अनुसार, युवती द्वारा विवाह प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद यह कृत्य किया गया, और आरोपी ने जिम के माध्यम से पीड़िता से संपर्क बनाया था। उन्होंने माँग की कि पुलिस केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरी साजिश और उसमें किसी अन्य व्यक्ति या समूह की संभावित भूमिका की भी व्यापक जाँच करे।

आगे क्या होगा

वीएचपी की माँग के बाद यह देखना होगा कि कर्नाटक सरकार निलंबित कर्मचारियों के मामले में क्या रुख अपनाती है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और संघ परिवार के संगठनों के बीच राजनीतिक तनाव पहले से बना हुआ है। दिल्ली हत्याकांड में जाँच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर भी नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो राज्य स्तर पर उसी आधार पर कर्मचारियों को दंडित करना कानूनी रूप से कमज़ोर तर्क है। अनुच्छेद 19 की व्याख्या को लेकर न्यायालयों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा में होने मात्र से नागरिक के मौलिक अधिकार समाप्त नहीं होते। असली सवाल यह है कि क्या यह निलंबन नियम-आधारित प्रशासन था या राजनीतिक संकेत — और यह अंतर अदालत में टिकना मुश्किल होगा।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने पर कर्मचारियों को क्यों निलंबित किया गया?
कर्नाटक सरकार ने 20 अगस्त को दो सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस के पथ संचलन में भाग लेने के कारण निलंबित किया। सरकार का तर्क है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई अनिवार्य थी, हालाँकि वीएचपी इसे असंवैधानिक बता रही है।
वीएचपी ने इस निलंबन को असंवैधानिक क्यों कहा?
वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने का अधिकार है। उनका तर्क है कि छुट्टी के दिन, सरकारी काम प्रभावित किए बिना, किसी संगठन के कार्यक्रम में जाना दंडनीय नहीं हो सकता।
कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप किस आधार पर लगाया गया?
बंसल ने बताया कि 20 अगस्त को — जिस दिन निलंबन आदेश जारी हुआ — उसी दिन संसद में गृह मंत्री ने कहा कि आरएसएस के विरुद्ध कोई मामला विचाराधीन नहीं और उसकी शाखाओं में कोई अवैध गतिविधि नहीं होती। वीएचपी ने इसे कांग्रेस का विरोधाभासी रवैया बताया।
वीएचपी ने दिल्ली हत्याकांड में क्या माँग की?
वीएचपी प्रवक्ता ने नई दिल्ली के जिम ट्रेनर पर युवती की हत्या के मामले में पुलिस से व्यापक जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि केवल आरोपी की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है और पूरी साजिश तथा किसी अन्य व्यक्ति या समूह की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए।
इस विवाद में आगे क्या हो सकता है?
वीएचपी ने कर्नाटक सरकार से निलंबन वापस लेने और माफी माँगने की माँग की है। यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती, तो यह मामला न्यायालय तक जा सकता है, जहाँ अनुच्छेद 19 के तहत कर्मचारियों के अधिकारों पर फैसला होगा।
राष्ट्र प्रेस
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