विप्रो में 'कॉरपोरेट जिहाद' के आरोप: वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने राष्ट्रीय जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
आईटी कंपनी विप्रो में कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और इनकार करने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने के आरोप सामने आने के बाद एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने 5 जून को इन आरोपों को अत्यंत गंभीर बताते हुए किसी राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मुख्य आरोप और मांग
बंसल के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी पर उसकी धार्मिक मान्यताओं को बदलने के लिए दबाव बनाया गया और मना करने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई, तो यह न केवल कार्यस्थल के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक अपराध भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा विस्तृत रूप से होनी चाहिए ताकि तथ्य सार्वजनिक हो सकें।
टीसीएस विवाद से जोड़ा संदर्भ
बंसल ने कहा कि इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) में भी इसी प्रकार के 'कॉरपोरेट जिहाद' के आरोप उठे थे और उस मामले की जांच के दौरान कथित तौर पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। उनके अनुसार, अब विप्रो से जुड़ी खबरों ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई षड्यंत्र, भेदभाव या अवैध गतिविधि प्रमाणित होती है, तो संबंधित सभी लोगों के विरुद्ध कानून के दायरे में कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
वीएचपी का उद्योग जगत को पत्र
बंसल ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री की ओर से उद्योग और व्यापार से जुड़े विभिन्न संगठनों को पत्र भेजा गया है। इस पत्र में कंपनियों और संस्थानों से आग्रह किया गया है कि वे अपने कार्यस्थलों पर धार्मिक दबाव, भेदभाव, उत्पीड़न या किसी भी अवैध गतिविधि को रोकने के लिए स्पष्ट नीतियाँ बनाएँ और उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता की अपील
बंसल ने ज़ोर देकर कहा कि कार्यस्थल ऐसे होने चाहिए जहाँ प्रत्येक कर्मचारी बिना किसी भय, दबाव या भेदभाव के काम कर सके। उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी धार्मिक पहचान, विचारधारा या निजी मान्यताओं के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के लिए शिकायत और समाधान की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
युवाओं और समाज से सतर्कता की अपील
बंसल ने समाज से, विशेषकर युवाओं से, किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी घटना की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। उनके शब्दों में, 'जिहादी, जिहादी होता है, यह हिन्दू समाज को समझना पड़ेगा और उनका सार्वजनिक रूप से बहिष्कार भी करना पड़ेगा। उनके साथ किसी भी तरह का व्यवहार आपके लिए खतरनाक हो सकता है, यह अनेक घटनाओं में स्पष्ट हो चुका है। यह लार्जर कॉन्सपिरेसी का हिस्सा है, चाहे वह पढ़े-लिखे हों, गरीब हों, पैसे वाले हों या उच्च योग्यता प्राप्त व्यक्ति हों। इन लोगों के मन-मस्तिष्क में कट्टरपंथी सोच हावी रहती है। ऐसी कट्टरपंथी सोच का सैनिटाइजेशन करना बहुत जरूरी है।' गौरतलब है कि वीएचपी के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब आईटी क्षेत्र में कार्यस्थल आचरण और विविधता नीतियों पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि विप्रो प्रबंधन और सरकारी एजेंसियाँ इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती हैं।