श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: दिल्ली के हनुमान मंदिर और अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में भव्य उत्सव
सारांश
मुख्य बातें
देशभर में शुक्रवार, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर से लेकर पंजाब के अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर तक, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव में भाग लेने उमड़ पड़ी है। यह पर्व धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
कनॉट प्लेस हनुमान मंदिर में भव्य आयोजन
नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में जन्माष्टमी की विशेष तैयारियाँ की गई हैं। मंदिर के पुजारी अभिषेक ने बताया कि यहाँ रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण की विशेष आरती का आयोजन किया जाएगा। आरती के पश्चात सभी उपस्थित भक्तों में मखाने की खीर का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
पुजारी अभिषेक ने कहा कि मंदिर में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। उन्होंने समस्त भक्तों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएँ दीं।
अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में उत्सव का माहौल
अमृतसर के प्रसिद्ध दुर्गियाना मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहाँ संगठन की पुरानी परंपरा के अनुसार प्रत्येक त्योहार को बड़े धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा, 'जन्माष्टमी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा है। भक्त दूर-दूर से भगवान का आशीर्वाद लेने आते हैं।'
मंदिर के एक अन्य पुजारी ने बताया कि आधी रात को लड्डू गोपाल का पंचामृत स्नान का विशेष अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी भक्त भाग ले सकेंगे। उन्होंने कहा, 'आज के दिन ही द्वापर युग में रात के 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था, तब से लेकर हर वर्ष यह पर्व मनाया जाता है।'
देशभर में उत्सव का माहौल
जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुँचकर भगवान के दर्शन कर रहे हैं और जन्मोत्सव की खुशियाँ मना रहे हैं। यह पर्व भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
आगे का कार्यक्रम
दोनों मंदिरों में रात 12 बजे के बाद विशेष आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम निर्धारित है। भक्तों से अपील की गई है कि वे व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और शांतिपूर्वक दर्शन का लाभ उठाएँ।