ट्रंप का दावा: ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता तबाह, होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 सितंबर को दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है और ईरान के साथ चल रहा संघर्ष जल्द समाप्त होगा। एक टेलीविज़न इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है और ईरान के परमाणु ठिकानों पर अंतरिक्ष निगरानी जारी है।
परमाणु ठिकानों पर हमले का दावा
ट्रंप ने कहा कि ईरान, अमेरिकी हमलों से पहले परमाणु हथियार बनाने से केवल दो से चार सप्ताह दूर था। उनके अनुसार अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया और उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि उन स्थलों पर मौजूद सामग्री अब पहाड़ों के लाखों टन मलबे के नीचे दब चुकी है, जिससे उसे निकालना बेहद कठिन होगा। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अंतरिक्ष निगरानी और होर्मुज पर नियंत्रण
राष्ट्रपति ने बताया कि अमेरिका अपनी अंतरिक्ष निगरानी क्षमता के ज़रिए परमाणु स्थलों और 'पिकएक्स माउंटेन' नामक एक अन्य स्थान पर नज़र रख रहा है। उन्होंने कहा, "हमें पता है कि वहाँ कौन अंदर जा रहा है और कौन बाहर आ रहा है। अंतरिक्ष से आप किसी व्यक्ति के नाम वाले बैज तक पढ़ सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करता है और हर रात 30 से 40 नौकाओं को निष्क्रिय किया जा रहा है।
ईरान की नौसेना, वायुसेना और अर्थव्यवस्था पर असर
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को परास्त कर दिया है और हाल ही में उसके रडार सिस्टमों को भी निशाना बनाया है। आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था तेज़ी से कमज़ोर हो रही है और वहाँ महंगाई 300 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। गौरतलब है कि इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
यूरोप को चेतावनी
ब्रिटिश पत्रकार बेव टर्नर से बातचीत में ट्रंप ने यूरोपीय देशों को सचेत करते हुए कहा, "मैं आपके देश को भी इस खतरे से बचा रहा हूँ, क्योंकि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो उसके यूरोप के खिलाफ इस्तेमाल होने की संभावना अमेरिका से ज़्यादा होती।" उनका तर्क था कि भौगोलिक निकटता के कारण यूरोप को ईरानी परमाणु खतरे का सामना अमेरिका से पहले करना पड़ता।
युद्ध का औचित्य और आगे की राह
राष्ट्रपति ने संघर्ष का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें अमेरिकी मतदाताओं को इसका उद्देश्य समझाना ज़रूरी है। उन्होंने वेनेजुएला में अपने पूर्व निर्णय का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती विरोध के बावजूद सफलता मिलने पर जनता ने उस कदम को सही माना। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जो नुकसान पहुँचा है, उसका असर कई दशकों तक बना रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव का व्यापक असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर भी पड़ रहा है।