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पार्क बिल वापसी पर BJP का पलटवार: 'दिल्ली से रिमोट-कंट्रोल हो रहे हैं DK शिवकुमार'

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पार्क बिल वापसी पर BJP का पलटवार: 'दिल्ली से रिमोट-कंट्रोल हो रहे हैं DK शिवकुमार'

सारांश

पार्क की 5% भूमि को विकास कार्यों के लिए देने वाला बिल वापस होते ही BJP ने CM शिवकुमार पर निशाना साधा। आर. अशोक का आरोप — यह जनभावना की जीत नहीं, दिल्ली का दबाव था। 'रिमोट-कंट्रोल्ड CM' का तंज कर्नाटक की राजनीति में नई बहस छेड़ गया।

मुख्य बातें

अशोक ने 4 सितंबर को CM डी.के.
शिवकुमार को 'रिमोट-कंट्रोल्ड मुख्यमंत्री' और 'डमी सीएम' बताया।
विवाद का केंद्र — पार्क की 5% भूमि को अन्य विकास कार्यों के लिए उपयोग करने की अनुमति देने वाला विधेयक, जो BJP और नागरिकों के विरोध के बाद वापस लिया गया।
AICC महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के 'सरकार हर कन्नड़ की बात सुनती है' वाले बयान पर अशोक ने तंज कसा।
अशोक का आरोप — बेंगलुरु में सुरजेवाला की उपस्थिति और बिल वापसी यह साबित करती है कि फैसले दिल्ली से आते हैं।
BJP ने दावा किया कि पार्टी के विरोध और जनदबाव के कारण सरकार को बिल वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने शुक्रवार, 4 सितंबर को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वे एक 'रिमोट-कंट्रोल्ड' मुख्यमंत्री हैं जो दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान के इशारे पर काम करते हैं। यह प्रतिक्रिया उस विवादास्पद पार्क बिल को वापस लिए जाने के बाद आई, जिसमें पार्क की पाँच प्रतिशत भूमि को अन्य विकास कार्यों के लिए उपयोग करने की अनुमति देने का प्रावधान था।

विवाद की जड़: पार्क बिल और उसकी वापसी

कर्नाटक सरकार ने एक विधेयक पेश किया था जिसमें पार्क की 5 प्रतिशत भूमि को अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की अनुमति दी जानी थी। BJP और नागरिक समूहों के विरोध के बाद सरकार को यह बिल वापस लेना पड़ा। अशोक ने आरोप लगाया कि यह वापसी जनभावना के सम्मान में नहीं, बल्कि दिल्ली के दबाव में हुई।

अशोक का सुरजेवाला पर तंज

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दावा किया था कि कांग्रेस सरकार हर कन्नड़ भाषी की बात सुनती है। इसी बयान पर पलटवार करते हुए अशोक ने कहा, "सुरजेवाला जी, उस बात की पुष्टि करने के लिए धन्यवाद जो सात करोड़ कन्नड़ लोग पहले से ही जानते थे — कि डी.के. शिवकुमार एक रिमोट-कंट्रोल्ड मुख्यमंत्री हैं और कर्नाटक ने अब तक जितने भी मुख्यमंत्री देखे हैं, उनमें वे सबसे कमजोर हैं।"

BJP का आरोप: दिल्ली ने सख्ती दिखाई, CM ने घुटने टेके

अशोक ने आरोप लगाया कि बेंगलुरु में सुरजेवाला की उपस्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री के फैसले दिल्ली से निर्देशित होते हैं। उन्होंने कहा, "बिल वापस ले लिया गया। दिल्ली ने सख्ती दिखाई। सीएम शिवकुमार ने घुटने टेक दिए।" BJP नेता ने यह भी दावा किया कि शिवकुमार कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत दिल्ली के नेताओं के निर्देशों पर काम कर रहे हैं, न कि कर्नाटक के हित में स्वतंत्र निर्णय ले रहे हैं।

कांग्रेस के दावे पर सवाल

अशोक ने कहा कि सरकार का यह दावा कि वह 'हर कन्नड़ व्यक्ति की बात सुनती है', खोखला है क्योंकि शुरुआत में बेंगलुरु के हरित क्षेत्रों को लेकर जनता की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया था। उन्होंने कहा, "भाजपा ने इस प्रावधान का विरोध किया और जनता के विरोध ने सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर किया। इसे झूठ कहने से तथ्य नहीं बदलेंगे।" उन्होंने शिवकुमार को 'डमी सीएम' कहते हुए इस पूरे घटनाक्रम को 'रिमोट-कंट्रोल से किया गया सरेंडर' बताया।

आगे का राजनीतिक परिदृश्य

यह विवाद कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और BJP के बीच बढ़ते टकराव की एक नई कड़ी है। आलोचकों का कहना है कि बिल वापसी का यह प्रकरण राज्य में केंद्रीय नेतृत्व बनाम स्थानीय नेतृत्व की बहस को और तेज करेगा। कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे का राजनीतिक असर देखा जाना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या इसलिए कि केंद्रीय नेतृत्व ने राजनीतिक नुकसान भाँप लिया। सुरजेवाला का बेंगलुरु दौरा और उनका सफाई भरा बयान — दोनों मिलकर BJP को एक सुविधाजनक कथा देते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि पार्क भूमि का यह मुद्दा बेंगलुरु के नागरिकों के लिए हरित क्षेत्र संरक्षण की एक गहरी चिंता को दर्शाता है, जो महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से कहीं बड़ा है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक का पार्क बिल क्या था जिसे वापस लिया गया?
यह एक विधेयक था जिसमें कर्नाटक में पार्क की 5 प्रतिशत भूमि को अन्य विकास कार्यों के लिए उपयोग करने की अनुमति देने का प्रावधान था। BJP और नागरिक समूहों के विरोध के बाद कांग्रेस सरकार ने इसे वापस ले लिया।
BJP नेता आर. अशोक ने CM शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए?
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि CM डी.के. शिवकुमार एक 'रिमोट-कंट्रोल्ड' और 'डमी सीएम' हैं जो दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर काम करते हैं। उन्होंने बिल वापसी को दिल्ली के दबाव का परिणाम बताया, न कि स्वतंत्र निर्णय।
सुरजेवाला के किस बयान पर BJP ने आपत्ति जताई?
AICC महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि कांग्रेस सरकार हर कन्नड़ भाषी की बात सुनती है। BJP ने इसे खोखला दावा बताते हुए कहा कि सरकार ने पहले जनता की चिंताओं को नजरअंदाज किया, फिर दबाव में बिल वापस लिया।
क्या कर्नाटक सरकार ने बिल वापसी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी?
स्रोत में कांग्रेस सरकार की ओर से बिल वापसी पर कोई अलग आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। सुरजेवाला का एक्स पोस्ट ही सरकार का अप्रत्यक्ष बचाव माना जा रहा है।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद कर्नाटक में BJP और कांग्रेस के बीच टकराव को और गहरा कर सकता है। 'केंद्र बनाम राज्य नेतृत्व' की यह बहस आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है, खासकर बेंगलुरु के शहरी मतदाताओं के बीच जो हरित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील हैं।
राष्ट्र प्रेस
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