बेंगलुरु पार्क विवाद: तेजस्वी सूर्या ने CM शिवकुमार को लिखी चिट्ठी, दिए 4 अहम सुझाव
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के पार्कों की ज़मीन से जुड़ा पार्क्स (प्रिजर्वेशन) (अमेंडमेंट) एक्ट कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। जनता के व्यापक विरोध के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने संकेत दिया कि सरकार इस कानून पर पुनर्विचार करने को तैयार है और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसी के जवाब में बेंगलुरु दक्षिण से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद तेजस्वी सूर्या ने 1 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर चार ठोस सुझाव रखे।
विवाद की जड़ क्या है
विवादित संशोधन के तहत बेंगलुरु के पार्कों की 5 प्रतिशत ज़मीन को गैर-पार्क उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाने का प्रावधान किया गया था। नागरिक समूहों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने इसे शहर की हरित विरासत पर सीधा हमला बताते हुए कड़ा विरोध किया। यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु पहले से ही झीलों के सिकुड़ने और बाढ़ की बार-बार होने वाली घटनाओं से जूझ रहा है।
तेजस्वी सूर्या के चार सुझाव
सूर्या ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपना खुला पत्र साझा करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री ने पहले कभी उनके या विशेषज्ञों के सुझावों पर ध्यान नहीं दिया, फिर भी वे 'नई उम्मीद' के साथ यह पत्र लिख रहे हैं।
पहला सुझाव — बेंगलुरु की मोबिलिटी नीति का केंद्रीय लक्ष्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना और सार्वजनिक परिवहन को मज़बूत करना होना चाहिए। शहर में यातायात जाम एक गंभीर और पुरानी समस्या बन चुकी है।
दूसरा सुझाव — बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (BMLTA) के अधिकार और स्वायत्तता को बहाल किया जाए, ताकि परिवहन से जुड़े सभी निर्णय एकल एजेंसी के अंतर्गत हों और नीतिगत बिखराव समाप्त हो।
तीसरा सुझाव — हेब्बल में प्रस्तावित शॉर्ट टनल परियोजना को तत्काल रोका जाए और हेब्बल झील को संरक्षित किया जाए। पर्यावरण कार्यकर्ता लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करते आ रहे हैं।
चौथा और सबसे प्रमुख सुझाव — पार्क की 5 प्रतिशत ज़मीन के उपयोग से संबंधित संशोधन को पूरी तरह वापस लिया जाए और टनल रोड परियोजना को रद्द किया जाए।
सूर्या का सीधा संदेश
पत्र के अंत में सूर्या ने लिखा, 'मुझे उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस अवसर का उपयोग सही दिशा में कदम उठाने और बेंगलुरु के दीर्घकालीन हितों को अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से ऊपर रखने के लिए करेंगे।' यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पुनर्विचार का वादा तो किया है, लेकिन संशोधन वापसी की कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई है। नागरिक समूह और पर्यावरण संगठन सरकार के अगले कदम पर नज़र बनाए हुए हैं। बेंगलुरु में हरित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।