यूपी के ODOP उत्पाद जर्मनी पहुँचेंगे, केशव प्रसाद मौर्य से जर्मन प्रतिनिधिमंडल की बैठक
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार, 2 सितंबर को लखनऊ स्थित अपने आवास पर एक उच्चस्तरीय जर्मन व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित वस्तुओं को जर्मनी के बाज़ार तक पहुँचाने पर सकारात्मक सहमति बनी। यह बैठक योगी सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के प्रयास तेज़ किए जा रहे हैं।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
जर्मन प्रतिनिधिमंडल में इनोवेशन हब राइनमेन के कार्यकारी अधिकारी स्टीफन विटेनकिंड, गीबा के चेयरमैन सेल्वाकुमार पेरियासामी और गीबा के सीईओ निर्मल रमन कन्नैया शामिल थे। उपमुख्यमंत्री मौर्य ने तीनों प्रतिनिधियों का पुष्पगुच्छ और तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा भेंट कर स्वागत किया। बैठक में इन्वेस्ट यूपी और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) कार्यक्रम के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मुख्य घटनाक्रम और चर्चा के बिंदु
बैठक में उत्तर प्रदेश में जर्मन कंपनियों द्वारा उद्योग एवं व्यवसाय स्थापित करने की संभावनाओं, द्विपक्षीय निवेश, आयात-निर्यात और व्यापारिक सहयोग पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने भारत-जर्मनी व्यापारिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने तथा उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। विटेनकिंड ने उपमुख्यमंत्री को जर्मनी का प्रतीक चिह्न भेंट किया और उन्हें जर्मनी आने का आमंत्रण भी दिया।
उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख
मौर्य ने कहा कि 'डबल इंजन सरकार' के प्रयासों से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेश के लिए एक भरोसेमंद केंद्र के रूप में तेज़ी से उभर रहा है। उन्होंने जर्मन कंपनियों को प्रदेश में निवेश और उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित करते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार निवेशकों को सुविधा, सुरक्षा, बेहतर कनेक्टिविटी और आवश्यक यातायात सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के उत्पादों को केवल घरेलू बाज़ार तक सीमित न रखकर उन्हें वैश्विक पहचान दिलाना है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण पर असर
उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी। उनके अनुसार, इससे महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक संबंध लगातार प्रगाढ़ हो रहे हैं।
आगे क्या होगा
जर्मन प्रतिनिधिमंडल का यह निमंत्रण और दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति को व्यापारिक एवं निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि ODOP कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पाद पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं; अब इन्हें यूरोपीय बाज़ार तक पहुँचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि यह बैठक किस हद तक ठोस व्यापारिक समझौतों में परिणत होती है।