यूपी में 'एक जनपद एक व्यंजन' योजना मंजूर: ₹150 करोड़ बजट, 25% अनुदान और वैश्विक पहचान का लक्ष्य

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यूपी में 'एक जनपद एक व्यंजन' योजना मंजूर: ₹150 करोड़ बजट, 25% अनुदान और वैश्विक पहचान का लक्ष्य

सारांश

ओडीओपी की सफलता के बाद योगी सरकार का अगला दांव — 'एक जनपद एक व्यंजन'। ₹150 करोड़ के बजट और 25% अनुदान के साथ यह योजना यूपी के पारंपरिक स्वादों को वैश्विक मंच पर ले जाने की महत्वाकांक्षी कोशिश है, जो कारीगरों से लेकर हलवाइयों तक सबको जोड़ेगी।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 4 मई 2026 को ' एक जनपद एक व्यंजन ' (ओडीओपी-फूड) योजना को मंजूरी दी।
वित्त वर्ष 2026-27 में योजना के लिए ₹150 करोड़ का बजट निर्धारित; उद्यमियों को 25% तक अनुदान, अधिकतम ₹20 लाख ।
कारीगरों, हलवाइयों और खाद्य उद्यमियों को तकनीकी प्रशिक्षण और मेलों-प्रदर्शनियों के ज़रिए बाज़ार उपलब्ध कराया जाएगा।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय समितियाँ गठित होंगी, जिनमें विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान शामिल।
अमरोहा, बहेड़ी, संत कबीर नगर और नगीना में कताई मिलों की भूमि पर टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 4 मई 2026 को 'एक जनपद एक व्यंजन' (ओडीओपी-फूड) योजना को औपचारिक मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के 75 जनपदों के पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में नई पहचान दिलाना है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान ने सोमवार को बताया कि यह पहल पहले से सफल 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना की अगली कड़ी है और इससे रोज़गार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

योजना में क्या है खास

मंत्री राकेश सचान के अनुसार, इस योजना के तहत प्रत्येक जनपद के विशिष्ट और पारंपरिक व्यंजनों की पहचान कर उन्हें संरक्षित, मानकीकृत और विकसित किया जाएगा। उत्पादों की गुणवत्ता सुधार, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि वे वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बन सकें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की खाद्य अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की माँग लगातार बढ़ रही है।

वित्तीय प्रावधान और अनुदान

सरकार ने योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹150 करोड़ निर्धारित किए हैं। खाद्य उद्यमियों को उनकी परियोजना लागत पर 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹20 लाख प्रति उद्यमी होगी। यह वित्तीय सहायता उन कारीगरों, हलवाइयों और खाद्य उद्यमियों को लक्षित करती है जो अब तक संस्थागत समर्थन से वंचित रहे हैं।

प्रशिक्षण और बाज़ार तक पहुँच

योजना के अंतर्गत कारीगरों, हलवाइयों, खाद्य उद्यमियों और श्रमिकों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। मेले, फेस्टिवल और प्रदर्शनियों के माध्यम से उन्हें बाज़ार उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्री ने बताया कि खाद्य विक्रेताओं और हलवाइयों का एक राज्यस्तरीय सम्मेलन जल्द ही लखनऊ में आयोजित किया जाएगा, जहाँ पैकेजिंग, गुणवत्ता और आधुनिक विपणन पर तकनीकी सत्र होंगे।

जनपद स्तरीय समितियाँ और क्रियान्वयन

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तर पर समितियाँ गठित की जाएंगी। इनमें विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों तथा खाद्य एवं पर्यटन विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये समितियाँ स्थानीय सुझावों के आधार पर व्यंजनों का चयन और विकास सुनिश्चित करेंगी।

टेक्सटाइल पार्क और 'ब्रांड यूपी' की दिशा में कदम

इसी मंत्रिपरिषद बैठक में अमरोहा, बहेड़ी (बरेली), संत कबीर नगर और नगीना (बिजनौर) में स्थापित कताई मिलों की भूमि टेक्सटाइल विभाग को हस्तांतरित करने का भी निर्णय लिया गया। इन स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जाएंगे, जिससे निवेश और रोज़गार को नई गति मिलने की उम्मीद है। राकेश सचान ने कहा कि 'ब्रांड यूपी' को मज़बूत करने के लिए सरकार के ये दोनों कदम प्रदेश की पारंपरिक विरासत और औद्योगिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी स्तर पर रोज़गार सृजन के आँकड़े हमेशा विवादित रहे। ₹150 करोड़ का बजट 75 जनपदों में बाँटने पर प्रति जनपद औसतन ₹2 करोड़ से भी कम बनता है — जो वैश्विक ब्रांडिंग के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए पर्याप्त है या नहीं, यह सवाल उठना स्वाभाविक है। असली परीक्षा यह होगी कि जनपद स्तरीय समितियाँ राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर वास्तव में स्थानीय कारीगरों की आवाज़ सुन पाती हैं या नहीं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक जनपद एक व्यंजन' योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक नई पहल है जिसके तहत प्रदेश के प्रत्येक जनपद के विशिष्ट पारंपरिक व्यंजन की पहचान कर उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रमोट किया जाएगा। यह योजना सफल ओडीओपी (एक जनपद एक उत्पाद) योजना की अगली कड़ी है।
इस योजना के लिए कितना बजट रखा गया है?
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 'एक जनपद एक व्यंजन' योजना के लिए ₹150 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, खाद्य उद्यमियों को परियोजना लागत पर 25% तक अनुदान दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹20 लाख प्रति उद्यमी है।
इस योजना से किसे फायदा होगा?
इस योजना का सीधा लाभ कारीगरों, हलवाइयों, खाद्य उद्यमियों और खाद्य क्षेत्र के श्रमिकों को मिलेगा। उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, बाज़ार तक पहुँच और वित्तीय अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना का क्रियान्वयन कैसे होगा?
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय समितियाँ गठित की जाएंगी जिनमें विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और खाद्य एवं पर्यटन विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये समितियाँ स्थानीय सुझावों के आधार पर व्यंजनों का चयन और विकास सुनिश्चित करेंगी।
टेक्सटाइल पार्क की घोषणा इस योजना से कैसे जुड़ी है?
उसी मंत्रिपरिषद बैठक में अमरोहा, बहेड़ी (बरेली), संत कबीर नगर और नगीना (बिजनौर) में कताई मिलों की भूमि टेक्सटाइल विभाग को हस्तांतरित कर वहाँ टेक्सटाइल पार्क विकसित करने का निर्णय लिया गया। यह 'ब्रांड यूपी' को मज़बूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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