क्या सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी का ओडीओपी मॉडल राष्ट्रीय विकास का नया रोडमैप बन गया है?

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क्या सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी का ओडीओपी मॉडल राष्ट्रीय विकास का नया रोडमैप बन गया है?

सारांश

उत्तर प्रदेश का ओडीओपी मॉडल न केवल एक सरकारी योजना है, बल्कि यह जिला आधारित आर्थिक बदलाव का एक प्रभावी उदाहरण बन गया है। यह मॉडल स्थानीय उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद कर रहा है। क्या यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है?

Key Takeaways

  • ओडीओपी मॉडल ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहुंचाया।
  • इसने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।
  • ओडीओपी योजना के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • यह मॉडल विकास के लिए अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा बन रहा है।
  • ओडीओपी ने पलायन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया है।

लखनऊ, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश का ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) मॉडल आज देश के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन चुका है। वर्ष 2018 में शुरू की गई यह पहल अब केवल एक सरकारी योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह जिला आधारित आर्थिक परिवर्तन का एक प्रभावी उदाहरण बन गई है।

सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में इस खास योजना ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीतियों को स्थानीय आवश्यकताओं और पारंपरिक ताकतों के अनुरूप बनाया जाए तो उनके प्रभाव का असर धरातल पर स्पष्ट दिखाई देता है। ओडीओपी मॉडल की सफलता का असर प्रदेश के निर्यात आंकड़ों में भी स्पष्ट है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का निर्यात 88 हजार करोड़ रुपए था, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 58 हजार करोड़ थी। यह निर्यात वर्ष 2024 में बढ़कर 186 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 93 हजार करोड़ है। यह वृद्धि ओडीओपी को मिले समर्थन का स्पष्ट प्रमाण है।

अब उत्तर प्रदेश का ओडीओपी मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में देखा जा रहा है। जिला आधारित उत्पाद रणनीति ने निर्यात को जमीनी स्तर पर मजबूत किया है और छोटे उत्पादक भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सके हैं। ओडीओपी योजना की मूल अवधारणा हर जिले की एक विशिष्ट पहचान बनाना है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में स्थानीय पारंपरिक कला उद्योग या उत्पाद को चिह्नित कर उसे सरकारी संरक्षण में बाजार तक पहुंच और ब्रांडिंग का सहारा दिया गया है। मुरादाबाद के पीतल, बनारस की बुनकरी, फिरोजाबाद के कांच, कन्नौज के इत्र और भदोही के कालीन जैसे उत्पादों को इसी सोच के माध्यम से नई पहचान मिली है।

योगी सरकार के इस मॉडल ने असंतुलित क्षेत्रीय विकास की बड़ी समस्या का समाधान किया है, जिसे वर्षों से नजरअंदाज किया जा रहा था। पहले औद्योगिक विकास कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित था, लेकिन ओडीओपी के बाद छोटे जिले और कस्बे भी आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और पलायन पर भी प्रभावी नियंत्रण लगा। प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार ओडीओपी के चलते कारीगरों और छोटे उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ओडीओपी स्किल डेवलपमेंट और टूलकिट वितरण योजना के तहत बड़ी संख्या में कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक टूलकिट प्रशिक्षण और आसान वित्तीय सहायता ने पारंपरिक काम को आधुनिक बाजार से जोड़ा है। प्रदेश में अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट्स का वितरण किया जा चुका है। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और उनकी पहुंच केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुँच बना रहे हैं।

ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के माध्यम से अब तक 6,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में उद्यमिता को नई गति मिली है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2025 में ओडीओपी को विशेष मंच दिया गया। इस आयोजन में ओडीओपी पवेलियन में 466 स्टॉल लगाए गए, जिनसे करीब 20.77 करोड़ रुपए की बिजनेस लीड/डील सामने आईं। इसी तरह प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान 6,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में ओडीओपी प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें जीआई टैग वाले प्रदेश के 44 ओडीओपी उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

Point of View

बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक दृष्टांत है। इसे ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक है कि अन्य राज्य भी इस प्रकार की योजनाओं को लागू करें।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

ओडीओपी मॉडल क्या है?
ओडीओपी मॉडल का अर्थ है 'एक जनपद, एक उत्पाद', जिसका उद्देश्य हर जिले के विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देना है।
ओडीओपी योजना का लाभ किसे मिलता है?
यह योजना स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को लाभ पहुंचाती है, जिससे उनके उत्पाद वैश्विक बाजार में पहुंचते हैं।
क्या ओडीओपी मॉडल ने रोजगार में वृद्धि की है?
जी हां, ओडीओपी मॉडल ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं और पलायन पर नियंत्रण किया है।
ओडीओपी के तहत कितने टूलकिट वितरित किए गए हैं?
अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट्स का वितरण किया जा चुका है।
ओडीओपी का भविष्य क्या है?
ओडीओपी मॉडल का भविष्य उज्ज्वल है और इसे अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा माना जा रहा है।
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