यूपी का गो-इकोनॉमी मॉडल: यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10+ देशों में पहुँचे 'मेड इन यूपी' गो उत्पाद, ₹10 करोड़ का सालाना कारोबार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'गो संरक्षण से समृद्धि' पहल अब केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रही — देशी गायों पर आधारित यह मॉडल यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में अपनी पहचान बना चुका है और ₹10 करोड़ के सालाना कारोबार तक पहुँच गया है। 24 मई 2026 को लखनऊ से आई इस रिपोर्ट के अनुसार, 'मेड इन यूपी' गो उत्पादों की माँग अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेज़ी से बढ़ रही है।
हेता मॉडल: एथिकल डेयरी से ग्लोबल ब्रांड तक
'हेता' संस्था के ज़रिए 1,000 से अधिक देशी गायों पर आधारित एक एथिकल डेयरी सिस्टम खड़ा किया गया है। इस मॉडल की नींव रखी गाज़ियाबाद के सिकंदरपुर निवासी असीम रावत ने, जो 14 वर्षों तक अमेरिका और अन्य देशों की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर गो संरक्षण का मार्ग चुना। आज उनके साथ 100 लोगों की विशेष टीम इस मिशन को संचालित कर रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं, जिससे इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली।
150 उत्पाद, वैश्विक बाज़ार में दस्तक
हेता का मॉडल देशी गायों के समग्र उपयोग पर टिका है। यहाँ दूध से लेकर पंचगव्य, आयुर्वेदिक उत्पाद, ऑर्गेनिक फूड और वेलनेस प्रोडक्ट्स तक करीब 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज़, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर केयर और गोमूत्र अर्क प्रमुख हैं।
ये उत्पाद भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुँच रहे हैं। इस मॉडल की एक विशेष बात यह है कि वृद्ध गोवंश को बोझ नहीं, बल्कि संरक्षण का अभिन्न हिस्सा माना जाता है — उन्हें छोड़ा नहीं जाता।
सरकार की नीतिगत पहल: सब्सिडी और डेयरी मास्टर प्लान
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, योगी सरकार इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत समर्थन दे रही है। 'ऑपरेशन-4' के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
डेयरी मास्टर प्लान के अंतर्गत 2 से 25 गायों तक पशुपालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिल रहा है। इस योजना में 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सब्सिडी का स्पष्ट फार्मूला लागू है। राज्य में लागू चार बड़ी योजनाएँ मिलकर डेयरी क्षेत्र को नई गति दे रही हैं।
देशी नस्लों का संरक्षण और आत्मनिर्भरता
सरकार का विशेष फोकस साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विस्तार पर है। इन नस्लों को बाज़ार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। गौरतलब है कि यह मॉडल ऐसे समय में उभरा है जब ग्रामीण रोज़गार और कृषि आय को लेकर देशभर में गंभीर चिंताएँ बनी हुई हैं।
आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
इस पहल का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है — किसान देशी गायों के सहारे करोड़ों की आय अर्जित कर रहे हैं और गाँवों में नया आर्थिक उछाल देखने को मिल रहा है। योगी सरकार का यह 'गो-इकोनॉमी' मॉडल अब उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में इस मॉडल के और अधिक विस्तार की उम्मीद है।