9 जुलाई 2026
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यूपी का गो-इकोनॉमी मॉडल: यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10+ देशों में पहुँचे 'मेड इन यूपी' गो उत्पाद, ₹10 करोड़ का सालाना कारोबार

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यूपी का गो-इकोनॉमी मॉडल: यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10+ देशों में पहुँचे 'मेड इन यूपी' गो उत्पाद, ₹10 करोड़ का सालाना कारोबार

सारांश

उत्तर प्रदेश का गो-इकोनॉमी मॉडल महज़ गोसेवा नहीं, एक वैश्विक व्यापार रणनीति बन चुका है। 'हेता' के ज़रिए 150 उत्पाद, 10+ देशों में निर्यात और ₹10 करोड़ का सालाना कारोबार — यह साबित करता है कि परंपरागत पशुपालन को आधुनिक ब्रांडिंग से जोड़ा जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'गो संरक्षण से समृद्धि' मॉडल ने ₹10 करोड़ के सालाना कारोबार का आँकड़ा पार किया।
'हेता' संस्था के ज़रिए 1,000+ देशी गायों पर आधारित एथिकल डेयरी सिस्टम, 150 प्रकार के उत्पाद तैयार।
यूके, यूएसए, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, सिंगापुर, दुबई समेत 10 से अधिक देशों में निर्यात।
'ऑपरेशन-4' के तहत स्वदेशी गाय पालन पर 50% सब्सिडी; डेयरी मास्टर प्लान में 15% स्वयं निवेश, 35% बैंक ऋण का फार्मूला।
साहीवाल, गिर, गंगातीरी, सिंधी नस्लों के संरक्षण पर विशेष सरकारी फोकस।
पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर असीम रावत ने 14 वर्ष के कॉर्पोरेट करियर के बाद इस मिशन की नींव रखी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'गो संरक्षण से समृद्धि' पहल अब केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रही — देशी गायों पर आधारित यह मॉडल यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में अपनी पहचान बना चुका है और ₹10 करोड़ के सालाना कारोबार तक पहुँच गया है। 24 मई 2026 को लखनऊ से आई इस रिपोर्ट के अनुसार, 'मेड इन यूपी' गो उत्पादों की माँग अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेज़ी से बढ़ रही है।

हेता मॉडल: एथिकल डेयरी से ग्लोबल ब्रांड तक

'हेता' संस्था के ज़रिए 1,000 से अधिक देशी गायों पर आधारित एक एथिकल डेयरी सिस्टम खड़ा किया गया है। इस मॉडल की नींव रखी गाज़ियाबाद के सिकंदरपुर निवासी असीम रावत ने, जो 14 वर्षों तक अमेरिका और अन्य देशों की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर गो संरक्षण का मार्ग चुना। आज उनके साथ 100 लोगों की विशेष टीम इस मिशन को संचालित कर रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं, जिससे इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली।

150 उत्पाद, वैश्विक बाज़ार में दस्तक

हेता का मॉडल देशी गायों के समग्र उपयोग पर टिका है। यहाँ दूध से लेकर पंचगव्य, आयुर्वेदिक उत्पाद, ऑर्गेनिक फूड और वेलनेस प्रोडक्ट्स तक करीब 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज़, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर केयर और गोमूत्र अर्क प्रमुख हैं।

ये उत्पाद भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुँच रहे हैं। इस मॉडल की एक विशेष बात यह है कि वृद्ध गोवंश को बोझ नहीं, बल्कि संरक्षण का अभिन्न हिस्सा माना जाता है — उन्हें छोड़ा नहीं जाता।

सरकार की नीतिगत पहल: सब्सिडी और डेयरी मास्टर प्लान

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, योगी सरकार इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत समर्थन दे रही है। 'ऑपरेशन-4' के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

डेयरी मास्टर प्लान के अंतर्गत 2 से 25 गायों तक पशुपालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिल रहा है। इस योजना में 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सब्सिडी का स्पष्ट फार्मूला लागू है। राज्य में लागू चार बड़ी योजनाएँ मिलकर डेयरी क्षेत्र को नई गति दे रही हैं।

देशी नस्लों का संरक्षण और आत्मनिर्भरता

सरकार का विशेष फोकस साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विस्तार पर है। इन नस्लों को बाज़ार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। गौरतलब है कि यह मॉडल ऐसे समय में उभरा है जब ग्रामीण रोज़गार और कृषि आय को लेकर देशभर में गंभीर चिंताएँ बनी हुई हैं।

आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

इस पहल का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है — किसान देशी गायों के सहारे करोड़ों की आय अर्जित कर रहे हैं और गाँवों में नया आर्थिक उछाल देखने को मिल रहा है। योगी सरकार का यह 'गो-इकोनॉमी' मॉडल अब उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में इस मॉडल के और अधिक विस्तार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹10 करोड़ का सालाना कारोबार राज्य की विशाल कृषि अर्थव्यवस्था के पैमाने पर अभी शुरुआती पड़ाव है। असली सवाल यह है कि 'हेता' जैसे एकल उद्यम की सफलता को लाखों छोटे पशुपालकों तक कैसे पहुँचाया जाएगा — क्योंकि सब्सिडी योजनाओं की पहुँच और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई भारत में पुरानी समस्या रही है। वृद्ध गोवंश को संरक्षण का हिस्सा मानना नैतिक रूप से सराहनीय है, पर इसकी आर्थिक स्थिरता का स्वतंत्र मूल्यांकन अभी सामने नहीं आया है। यदि यह मॉडल वाकई स्केलेबल है, तो सरकार को पारदर्शी डेटा के साथ इसे साबित करना होगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी का गो-इकोनॉमी मॉडल क्या है?
यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'गो संरक्षण से समृद्धि' पहल है, जिसमें देशी गायों से तैयार 150 से अधिक उत्पादों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बेचा जाता है। 'हेता' संस्था के ज़रिए यह मॉडल यूके, यूएसए और ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में निर्यात कर ₹10 करोड़ का सालाना कारोबार कर रहा है।
हेता संस्था की स्थापना किसने और कैसे की?
हेता की स्थापना गाज़ियाबाद के सिकंदरपुर निवासी असीम रावत ने की, जो 14 वर्षों तक अमेरिका समेत विभिन्न देशों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर गो संरक्षण का मार्ग चुना और आज 100 लोगों की टीम के साथ यह मिशन चला रहे हैं।
योगी सरकार देशी गाय पालन पर क्या सब्सिडी दे रही है?
'ऑपरेशन-4' के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान में 2 से 25 गायों तक पशुपालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिलता है, जिसमें 15% स्वयं निवेश, 35% बैंक ऋण और 50% सब्सिडी का फार्मूला लागू है।
हेता के उत्पाद किन देशों में निर्यात होते हैं?
हेता के उत्पाद भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुँच रहे हैं। इनमें A2 दूध, बिलौना घी, आयुर्वेदिक उत्पाद और वेलनेस प्रोडक्ट्स प्रमुख हैं।
इस मॉडल से ग्रामीण किसानों को क्या फायदा हो रहा है?
देशी गायों पर आधारित इस मॉडल से किसान करोड़ों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया उछाल देखने को मिल रहा है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों को बाज़ार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएँ खुल रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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