31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उत्तर प्रदेश का गो संरक्षण मॉडल: 200 उत्पाद, 10 देशों में निर्यात, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उत्तर प्रदेश का गो संरक्षण मॉडल: 200 उत्पाद, 10 देशों में निर्यात, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

सारांश

उत्तर प्रदेश ने गो संरक्षण को आस्था से आगे ले जाकर ग्रामीण उद्यमिता का मॉडल बना दिया है — 200 पंचगव्य उत्पाद, 10 देशों में निर्यात और 15 राज्यों के प्रतिनिधि यूपी से सीख रहे हैं। 50% सब्सिडी और 'हेता' जैसे स्टार्टअप इस बदलाव की असली कहानी हैं।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश में देसी गाय आधारित लगभग 200 प्रकार के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
इन उत्पादों की पहुँच अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, जापान, यूएई समेत 10 से अधिक देशों तक बन चुकी है।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार उन्नत देसी नस्लों पर 50% तक सब्सिडी दी जा रही है।
गुजरात, हरियाणा, केरल सहित 15 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधिमंडल यूपी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से उद्यमी बने असीम रावत की पहल 'हेता' गो-आधारित उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचा रही है।
साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर नस्लों के संरक्षण पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने गो संरक्षण को महज धार्मिक आस्था तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण रोज़गार, उद्यमिता और निर्यात से जोड़ने की नीति अपनाई है, जिसने राज्य को इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना दिया है। लखनऊ से संचालित इस मॉडल के तहत देसी गाय आधारित लगभग 200 प्रकार के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद अब अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूएई समेत कई देशों के बाज़ारों तक पहुँच चुके हैं। यह मॉडल अब 15 से अधिक राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में यूपी के गो-उत्पादों की पहुँच

प्रदेश में देसी गायों से तैयार पंचगव्य घृत, ब्राह्मी घृत, गोमूत्र अर्क, घनवटी, च्यवनप्राश, गो घृत, शतधौता घृत और आयुर्वेदिक काजल जैसे उत्पादों की माँग वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर, मलेशिया, यूएई, सऊदी अरब और थाईलैंड तक इन उत्पादों की पहुँच बन चुकी है। आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय जीवनशैली के प्रति बढ़ते वैश्विक आकर्षण ने इन उत्पादों के लिए नए बाज़ार तैयार किए हैं।

उद्यमिता की नई कहानी: असीम रावत और 'हेता'

सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में करियर शुरू करने वाले असीम रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से गो संरक्षण और गो-आधारित उत्पादों के क्षेत्र में कदम रखा। उनकी पहल 'हेता' आज देश और विदेश के बाज़ारों तक पहुँच चुकी है। रावत का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से विकसित और विपणन किए गए गो-आधारित उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मज़बूती दे सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देसी गाय को कभी आर्थिक दृष्टि से बोझ माना जाता था। आज वही गाय उत्तर प्रदेश में करोड़ों रुपये की गो-आधारित अर्थव्यवस्था की धुरी बन रही है — यह बदलाव नीतिगत हस्तक्षेप और बाज़ार की माँग, दोनों का परिणाम है।

सरकारी नीति और सब्सिडी

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार राज्य सरकार उन्नत देसी नस्लों के पालन को बढ़ावा देने के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी प्रमुख भारतीय नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। गोबर, गोमूत्र, घी और पंचगव्य आधारित उत्पादों को व्यवस्थित उद्योग का स्वरूप देकर स्वयं सहायता समूहों, गोशालाओं और छोटे उद्यमियों को भी इस आर्थिक श्रृंखला से जोड़ा जा रहा है।

अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा

गौरतलब है कि गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित 15 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधिमंडल यूपी में गो संरक्षण, नस्ल सुधार और गो-आधारित व्यावसायिक मॉडल का प्रशिक्षण लेने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल तब और प्रासंगिक हो जाता है जब ग्रामीण आय के पारंपरिक स्रोत दबाव में हों।

आगे की राह

सरकार की विभिन्न योजनाओं ने डेयरी और गो-आधारित उद्योग को नई गति दी है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है। यदि यह मॉडल अपनी वर्तमान गति बनाए रखता है, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश गो-आधारित उत्पादों के निर्यात में राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका में आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इन उत्पादों की निर्यात वृद्धि कितनी टिकाऊ है और इसका लाभ वास्तव में किसान और पशुपालक तक पहुँच रहा है या केवल संगठित उद्यमियों तक सीमित है। 50% सब्सिडी की घोषणा स्वागतयोग्य है, परंतु स्वयं सहायता समूहों की आय में वास्तविक वृद्धि के सत्यापन-योग्य आँकड़े अभी सार्वजनिक नहीं हैं। वैश्विक आयुर्वेद बाज़ार की माँग एक अवसर है, लेकिन गुणवत्ता मानकीकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन के बिना यह विस्तार दीर्घकालिक नहीं होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश का गो संरक्षण मॉडल क्या है?
यह एक नीतिगत ढाँचा है जिसमें देसी गाय को ग्रामीण रोज़गार और उद्यमिता से जोड़ा गया है। इसके तहत पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन, नस्ल सुधार और निर्यात को एकसाथ बढ़ावा दिया जा रहा है।
यूपी के गो-आधारित उत्पाद किन देशों में निर्यात हो रहे हैं?
अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर, मलेशिया, यूएई, सऊदी अरब और थाईलैंड समेत कई देशों में इन उत्पादों की पहुँच बन चुकी है। आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति वैश्विक रुझान ने इस माँग को बढ़ाया है।
सरकार गो पालन पर कितनी सब्सिडी दे रही है?
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार राज्य सरकार उन्नत देसी नस्लों के पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर नस्लों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
'हेता' पहल क्या है और इसे किसने शुरू किया?
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से उद्यमी बने असीम रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से 'हेता' की शुरुआत की। यह पहल वैज्ञानिक तरीके से विकसित गो-आधारित उत्पादों को देश और विदेश के बाज़ारों तक पहुँचाती है।
क्या अन्य राज्य भी यूपी के इस मॉडल को अपना रहे हैं?
गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित 15 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधिमंडल यूपी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। गो संरक्षण, नस्ल सुधार और व्यावसायिक मॉडल को समझने के लिए दौरे लगातार जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले