11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी गोशालाएं बनेंगी ग्रामीण उद्योगों का केंद्र, 'एक जनपद-एक नवाचार' मॉडल से हर जिले को मिलेगी गो-आधारित पहचान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी गोशालाएं बनेंगी ग्रामीण उद्योगों का केंद्र, 'एक जनपद-एक नवाचार' मॉडल से हर जिले को मिलेगी गो-आधारित पहचान

सारांश

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गोशालाओं को महज़ गोवंश आश्रय से आगे ले जाने की तैयारी में है। 'एक जनपद-एक नवाचार' मॉडल के तहत हर जिले में बायोगैस, इको पेंट, वर्मी कम्पोस्ट जैसे गो-आधारित उद्योग स्थापित होंगे — गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को एक साथ साधने का बड़ा दांव।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेशभर की गोशालाओं का व्यापक मूल्यांकन पूरा किया।
'एक जनपद-एक नवाचार' मॉडल के तहत हर जिले में एक प्रमुख गो-आधारित उद्योग विकसित किया जाएगा।
बायोगैस उत्पादन , इको पेंट , जैविक खाद , वर्मी कम्पोस्ट और पंचगव्य उत्पाद प्राथमिकता में होंगे।
महिला स्वयं सहायता समूहों , ग्रामीण युवाओं और उद्यमियों को उत्पादन, प्रसंस्करण व विपणन से जोड़ा जाएगा।
आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार यह मॉडल गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगा।

उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को ग्रामीण रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेशभर की गोशालाओं का व्यापक मूल्यांकन पूरा कर लिया है और अब 'एक जनपद-एक नवाचार' मॉडल के तहत प्रत्येक जिले में एक प्रमुख गो-आधारित उद्योग स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह पहल गोशालाओं को निराश्रित गोवंश के आश्रय केंद्र से आगे बढ़ाकर उन्हें उत्पादन, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता के सक्रिय केंद्रों में बदलने का लक्ष्य रखती है।

क्या है 'एक जनपद-एक नवाचार' मॉडल

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने राज्यव्यापी निरीक्षण के दौरान प्रत्येक जिले में उपलब्ध भूमि, गोवंश, जल संसाधन, पंचगव्य इकाइयों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया है। इसी आकलन के आधार पर हर जिले के लिए अलग-अलग नवाचार मॉडल तैयार किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।

आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि जिन जिलों में संभावनाएं अधिक हैं, वहाँ बायोगैस उत्पादन, इको पेंट निर्माण, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर आधारित उत्पाद और पंचगव्य उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी पलायन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

रोजगार और स्वरोजगार पर जोर

गुप्ता ने बताया कि योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि यह मॉडल ग्रामीण युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिससे पलायन की समस्या को कम किया जा सके।

प्राकृतिक खेती और आर्थिक आत्मनिर्भरता

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अनुसार, इस मॉडल के सफल क्रियान्वयन से गोशालाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और प्राकृतिक खेती को नया प्रोत्साहन मिलेगा। जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यह पहल केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप भी बताई जा रही है।

हर जिले की होगी अलग गो-आधारित पहचान

योजना की एक विशेषता यह है कि प्रत्येक जिले में एक विशिष्ट गो-आधारित उत्पाद या उद्योग को पहचान दी जाएगी, जो उस जिले के स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का माध्यम बनेगा। इससे न केवल स्थानीय उत्पादों को ब्रांड पहचान मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया ढाँचा भी मिलेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पहल को गो संरक्षण, ग्रामीण विकास और उद्यमिता को एक साथ आगे बढ़ाने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में जिला-स्तरीय योजनाओं के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होगा कि यह मॉडल ग्रामीण उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने में कितना कारगर साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सफलता का दारोमदार क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर टिका है — जो उत्तर प्रदेश में कल्याणकारी योजनाओं की ऐतिहासिक कमज़ोरी रही है। गोशालाओं को उत्पादन केंद्र बनाने के पिछले प्रयास अक्सर बाजार संपर्क और प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए। असली परीक्षा यह है कि क्या जिला-स्तरीय नवाचार मॉडल केवल कागज़ी योजना बनकर रहेंगे या इनसे वास्तविक रोजगार और आय सृजन होगा। बिना पारदर्शी निगरानी तंत्र और बाजार से सीधे जुड़ाव के, यह पहल भी पूर्ववर्ती ग्रामीण उद्यमिता योजनाओं की तरह सुर्खियों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक जनपद-एक नवाचार' मॉडल क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की वह पहल है जिसके तहत प्रदेश के हर जिले में स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं के अनुसार एक प्रमुख गो-आधारित उद्योग विकसित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इसके लिए प्रदेशभर की गोशालाओं का मूल्यांकन पूरा कर लिया है और जिला-विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
गोशालाओं में कौन-कौन से उद्योग विकसित किए जाएंगे?
संभावनाओं के अनुसार जिलों में बायोगैस उत्पादन, इको पेंट निर्माण, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर आधारित उत्पाद और पंचगव्य उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक जिले का चयन वहाँ की भूमि, गोवंश संख्या, जल संसाधन और स्थानीय बाजार की उपलब्धता के आधार पर होगा।
इस पहल से ग्रामीण रोजगार पर क्या असर पड़ेगा?
योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाएगा। आयोग का दावा है कि इससे ग्रामीण युवाओं को अपने ही जिले में स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे और शहरी पलायन कम होगा।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने अब तक क्या किया है?
आयोग ने राज्यव्यापी निरीक्षण के तहत प्रदेशभर की गोशालाओं में उपलब्ध भूमि, गोवंश, जल संसाधन, पंचगव्य इकाइयों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया है। आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार इस मूल्यांकन के आधार पर ही जिला-विशेष नवाचार मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
इस पहल का प्राकृतिक खेती से क्या संबंध है?
गोशालाओं में जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन को बढ़ावा देने से किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। आयोग के अनुसार यह मॉडल प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले