बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर मुकाबले में नहीं — अशोक चौधरी का दावा, भाजपा का गढ़ बरकरार रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने 9 जुलाई 2026 को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की चुनावी दावेदारी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि किशोर का प्रभाव केवल वोट काटने तक सीमित रहेगा और वे किसी भी वास्तविक मुकाबले में नज़र नहीं आएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
चौधरी ने कहा कि प्रशांत किशोर चुनाव तो लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी ज़मीनी सक्रियता और जनाधार वैसा नहीं दिखता जो उन्हें चुनावी लाभ दिला सके। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के चुनावों में भी किशोर को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। उनके शब्दों में, 'मुझे तो लगता है कि वोट काटने के अलावा उनकी कोई बड़ी भूमिका नहीं है। वे कहीं भी मुकाबले में नजर नहीं आएंगे।'
बांकीपुर में भाजपा की पकड़
अशोक चौधरी ने रेखांकित किया कि बांकीपुर विधानसभा लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सुदृढ़ गढ़ रही है। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन वर्षों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और उनके पिता भी इस क्षेत्र की राजनीति से जुड़े रहे हैं। इस पारिवारिक विरासत के कारण बांकीपुर की जनता का BJP और नितिन नवीन के परिवार से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।
चौधरी ने विकास कार्यों का भी ज़िक्र किया — तारामंडल के सामने सड़क निर्माण, पुल के नीचे सौंदर्यीकरण सहित कई परियोजनाओं ने बांकीपुर का स्वरूप बदला है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिलने से नितिन नवीन की राजनीतिक स्वीकार्यता और मज़बूत हुई है।
राजद और जन सुराज पर चौधरी की राय
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के चुनावी समीकरण पर चौधरी ने कहा कि RJD का पारंपरिक वोट बैंक अपनी जगह है, लेकिन उससे चुनावी परिणाम पर कोई निर्णायक असर पड़ने की संभावना नहीं है। जन सुराज द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर लगाए गए आरोपों को उन्होंने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया। उनके अनुसार, जन सुराज अपनी राजनीतिक ज़मीन तलाशने के लिए ऐसे मुद्दे उठाता है, लेकिन बांकीपुर में उसका कोई प्रभावी मुकाबला दिखाई नहीं देता।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर एक चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बनने की यात्रा पर हैं और जन सुराज उनकी नई राजनीतिक पहल है। आलोचकों का कहना है कि किशोर की पार्टी अभी संगठनात्मक रूप से परिपक्व नहीं है और पारंपरिक गढ़ों में उसे सेंध लगाना आसान नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में गठबंधनों का गणित लगातार बदल रहा है।
आगे क्या
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे न केवल BJP की स्थानीय पकड़ की परीक्षा लेंगे, बल्कि जन सुराज की राजनीतिक विश्वसनीयता का भी पहला बड़ा इम्तिहान होंगे। चुनाव की तारीखों की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन सभी दलों ने अपनी तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं।