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प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: 'जन सुराज का लक्ष्य विधायक-सांसद बनना नहीं, बिहार में बदलाव लाना है'

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प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: 'जन सुराज का लक्ष्य विधायक-सांसद बनना नहीं, बिहार में बदलाव लाना है'

सारांश

प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर सिर्फ एक सीट नहीं — यह तीन साल की मेहनत की अग्निपरीक्षा है। जन सुराज को नवंबर में बड़ी हार झेलनी पड़ी, फिर भी किशोर ने बिहार नहीं छोड़ा। अब वे 30 जुलाई के उपचुनाव को भाजपा के नेतृत्व पर 'जनमत संग्रह' बता रहे हैं।

मुख्य बातें

प्रशांत किशोर ने 6 जुलाई 2026 को कहा कि जन सुराज पार्टी का लक्ष्य कभी विधायक या सांसद बनना नहीं रहा।
किशोर ने माना कि तीन साल के प्रचार के बावजूद पार्टी को पर्याप्त जनसमर्थन नहीं मिला और बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई 2026 को होगा; किशोर ने चार लाख मतदाताओं से बदलाव के लिए वोट की अपील की।
सीट भाजपा के नितिन नवीन के इस्तीफे से रिक्त हुई, जो 2006 से इस सीट पर थे और अब राज्यसभा सदस्य हैं।
किशोर ने उपचुनाव को सम्राट चौधरी के नेतृत्व और भाजपा सरकार के कामकाज पर जनता की मंजूरी का मौका बताया।

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 6 जुलाई 2026 को पटना में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का उद्देश्य कभी भी विधायक या सांसद का पद हासिल करना नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीतिक संस्कृति में आमूल बदलाव लाना है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतरने की घोषणा के एक दिन बाद उन्होंने यह बात कही।

मिशन और विज़न

किशोर ने कहा कि 'जन सुराज' की स्थापना ही राज्य के राजनीतिक माहौल को बदलने के इरादे से हुई थी। उनके अनुसार, पार्टी का असली काम मतदाताओं को जाति, धर्म, पार्टी-निष्ठा और नेताओं के प्रति अंधी भक्ति से ऊपर उठाकर सोचने के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत तौर पर और 'जन सुराज' के विजन के तहत हमारा मकसद कभी विधायक या सांसद बनना नहीं रहा है। राजनीति में आने का हमारा एकमात्र मकसद बिहार में बदलाव लाना है। यह बदलाव तभी आएगा जब लोग जाति, धर्म, पार्टी के प्रति निष्ठा और नेताओं के प्रति अंधी भक्ति से ऊपर उठकर सही उम्मीदवारों को चुनेंगे।"

चुनावी प्रदर्शन पर स्वीकारोक्ति

किशोर ने माना कि पिछले तीन वर्षों से पूरे बिहार में प्रचार करने के बावजूद पार्टी को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा, "मैं पिछले तीन साल से कोशिश कर रहा हूं, लेकिन लोगों ने अभी हमें काफी संख्या में वोट नहीं दिया है। नतीजतन, हमें बड़ी हार का सामना करना पड़ा।"

गौरतलब है कि नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में जन सुराज पार्टी को बड़ी हार झेलनी पड़ी थी। इसके बावजूद किशोर ने कहा कि न उन्होंने और न पार्टी ने एक दिन के लिए भी बिहार छोड़ा।

हार से निराश नहीं, संकल्प दोहराया

किशोर ने चुनावी पराजय को अपने मिशन की समाप्ति मानने से इनकार किया। उनके शब्दों में, "हार तभी होगी जब मैं हार मान लूंगा। मैंने कोशिश करना नहीं छोड़ा है। चुनाव में हार के बाद भी न तो 'जन सुराज' और न ही मैंने एक दिन के लिए भी बिहार छोड़ा। हम लोगों के बीच काम करते रहे हैं।"

बांकीपुर उपचुनाव और भाजपा पर निशाना

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के पूर्व विधायक और अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से रिक्त हुई है। नवीन 2006 से इस सीट पर काबिज थे और अप्रैल 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दिया। उपचुनाव 30 जुलाई 2026 को होगा।

किशोर ने सवाल उठाया कि भाजपा ने नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी दी, लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं था कि उन्हें विधायकी छोड़नी पड़े। उन्होंने इस उपचुनाव को "भाजपा के नेतृत्व और नीतियों को जनता की मंजूरी परखने का मौका" बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी को लोगों ने सीधे मुख्यमंत्री के रूप में नहीं चुना था — यह जिम्मेदारी पार्टी ने उन्हें सौंपी थी। इस उपचुनाव में जनता के पास यह बताने का अवसर होगा कि वे भाजपा के नेतृत्व का समर्थन करते हैं या नहीं।

जनता से अपील

किशोर ने बांकीपुर के चार लाख मतदाताओं से 'बदलाव के लिए वोट' करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीत और हार पूरी तरह मतदाताओं के हाथ में है — पार्टी की भूमिका केवल एक ईमानदार विकल्प प्रस्तुत करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लगातार चुनावी विफलताओं को नैतिक दृढ़ता में बदलने की कोशिश करता है। असली सवाल यह है कि तीन साल और करोड़ों रुपये की पदयात्रा के बाद भी जन सुराज एक भी सीट क्यों नहीं जीत पाई — और क्या बांकीपुर में वही मतदाता, जो भाजपा को 2006 से जिताता आया है, इस बार कोई अलग संदेश देगा। किशोर का नितिन नवीन पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से चतुर है, लेकिन यह उनकी अपनी संगठनात्मक कमज़ोरियों से ध्यान हटाता है। बिहार की राजनीति में जाति-समीकरण की जड़ें इतनी गहरी हैं कि केवल 'बदलाव' के नारे से उन्हें उखाड़ना कठिन है — यह किशोर की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव क्यों लड़ रहे हैं?
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज पर 'जनमत संग्रह' बताया है। उनके अनुसार, यह चुनाव जनता को यह तय करने का अवसर देता है कि वे मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन करते हैं या बदलाव चाहते हैं।
बांकीपुर विधानसभा सीट कब और क्यों खाली हुई?
भाजपा नेता नितिन नवीन अप्रैल 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे बांकीपुर सीट रिक्त हुई। नवीन 2006 से इस सीट पर काबिज थे और अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
जन सुराज पार्टी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
प्रशांत किशोर के अनुसार, जन सुराज पार्टी का लक्ष्य विधायक या सांसद बनना नहीं, बल्कि बिहार में राजनीतिक बदलाव लाना है। पार्टी मतदाताओं को जाति, धर्म और नेताओं के प्रति अंधी भक्ति से ऊपर उठाकर सोचने के लिए प्रेरित करना चाहती है।
बांकीपुर उपचुनाव कब होगा?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई 2026 को होगा। इस सीट पर चार लाख मतदाता हैं और प्रशांत किशोर ने उनसे 'बदलाव के लिए वोट' करने की अपील की है।
जन सुराज पार्टी के पिछले चुनावी प्रदर्शन कैसे रहे हैं?
प्रशांत किशोर ने खुद स्वीकार किया कि तीन साल के प्रचार के बावजूद जन सुराज को पर्याप्त जनसमर्थन नहीं मिला और नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी को बड़ी हार झेलनी पड़ी। हालांकि, किशोर ने कहा कि इससे उनका मिशन नहीं रुकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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