प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: 'जन सुराज का लक्ष्य विधायक-सांसद बनना नहीं, बिहार में बदलाव लाना है'
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 6 जुलाई 2026 को पटना में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का उद्देश्य कभी भी विधायक या सांसद का पद हासिल करना नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीतिक संस्कृति में आमूल बदलाव लाना है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतरने की घोषणा के एक दिन बाद उन्होंने यह बात कही।
मिशन और विज़न
किशोर ने कहा कि 'जन सुराज' की स्थापना ही राज्य के राजनीतिक माहौल को बदलने के इरादे से हुई थी। उनके अनुसार, पार्टी का असली काम मतदाताओं को जाति, धर्म, पार्टी-निष्ठा और नेताओं के प्रति अंधी भक्ति से ऊपर उठाकर सोचने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत तौर पर और 'जन सुराज' के विजन के तहत हमारा मकसद कभी विधायक या सांसद बनना नहीं रहा है। राजनीति में आने का हमारा एकमात्र मकसद बिहार में बदलाव लाना है। यह बदलाव तभी आएगा जब लोग जाति, धर्म, पार्टी के प्रति निष्ठा और नेताओं के प्रति अंधी भक्ति से ऊपर उठकर सही उम्मीदवारों को चुनेंगे।"
चुनावी प्रदर्शन पर स्वीकारोक्ति
किशोर ने माना कि पिछले तीन वर्षों से पूरे बिहार में प्रचार करने के बावजूद पार्टी को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा, "मैं पिछले तीन साल से कोशिश कर रहा हूं, लेकिन लोगों ने अभी हमें काफी संख्या में वोट नहीं दिया है। नतीजतन, हमें बड़ी हार का सामना करना पड़ा।"
गौरतलब है कि नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में जन सुराज पार्टी को बड़ी हार झेलनी पड़ी थी। इसके बावजूद किशोर ने कहा कि न उन्होंने और न पार्टी ने एक दिन के लिए भी बिहार छोड़ा।
हार से निराश नहीं, संकल्प दोहराया
किशोर ने चुनावी पराजय को अपने मिशन की समाप्ति मानने से इनकार किया। उनके शब्दों में, "हार तभी होगी जब मैं हार मान लूंगा। मैंने कोशिश करना नहीं छोड़ा है। चुनाव में हार के बाद भी न तो 'जन सुराज' और न ही मैंने एक दिन के लिए भी बिहार छोड़ा। हम लोगों के बीच काम करते रहे हैं।"
बांकीपुर उपचुनाव और भाजपा पर निशाना
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के पूर्व विधायक और अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से रिक्त हुई है। नवीन 2006 से इस सीट पर काबिज थे और अप्रैल 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दिया। उपचुनाव 30 जुलाई 2026 को होगा।
किशोर ने सवाल उठाया कि भाजपा ने नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी दी, लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं था कि उन्हें विधायकी छोड़नी पड़े। उन्होंने इस उपचुनाव को "भाजपा के नेतृत्व और नीतियों को जनता की मंजूरी परखने का मौका" बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी को लोगों ने सीधे मुख्यमंत्री के रूप में नहीं चुना था — यह जिम्मेदारी पार्टी ने उन्हें सौंपी थी। इस उपचुनाव में जनता के पास यह बताने का अवसर होगा कि वे भाजपा के नेतृत्व का समर्थन करते हैं या नहीं।
जनता से अपील
किशोर ने बांकीपुर के चार लाख मतदाताओं से 'बदलाव के लिए वोट' करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीत और हार पूरी तरह मतदाताओं के हाथ में है — पार्टी की भूमिका केवल एक ईमानदार विकल्प प्रस्तुत करना है।