9 जुलाई 2026
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केतन अग्रवाल हत्याकांड: पिता विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखा भावुक पत्र, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की माँग

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केतन अग्रवाल हत्याकांड: पिता विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखा भावुक पत्र, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की माँग

सारांश

पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड में पिता विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भावुक पत्र लिखा है। 20 दिनों में बेटे और पिता दोनों को खोने वाले इस टूटे परिवार की एकमात्र माँग है — फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और समयबद्ध न्याय।

मुख्य बातें

केतन अग्रवाल हत्याकांड में पिता विशाल अग्रवाल ने 9 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा।
परिवार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का आग्रह किया।
केतन की हत्या के मात्र 20 दिनों के भीतर उनके दादा का भी निधन हो गया — सदमे को परिवार ने कारण बताया।
परिवार ने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष रियायत की नहीं, बल्कि समयबद्ध न्याय की माँग कर रहा है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड में पीड़ित पिता विशाल अग्रवाल ने 9 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक भावुक पत्र लिखकर शीघ्र न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने ईमेल के माध्यम से अनुरोध किया है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए और दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

पिता की पीड़ा: एक नहीं, दो अपूरणीय क्षतियाँ

विशाल अग्रवाल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वह यह अपील किसी व्यवसायी या प्रभावशाली व्यक्ति की हैसियत से नहीं, बल्कि एक टूटे हुए पिता की हैसियत से कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि केतन की नृशंस हत्या के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है और हर दिन एक ही प्रश्न उन्हें घेरता है — उनके बेटे को न्याय कब मिलेगा?

पत्र में उन्होंने एक और हृदयविदारक त्रासदी का उल्लेख किया। उनके अनुसार, केतन की मृत्यु के मात्र 20 दिनों के भीतर उनके पिता — अर्थात् केतन के दादा — का भी निधन हो गया। पोते की असमय मौत का सदमा वह सहन नहीं कर सके। इस प्रकार विशाल अग्रवाल ने महज 20 दिनों में अपने बेटे और पिता, दोनों को खो दिया।

माँग: रियायत नहीं, समयबद्ध न्याय

राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में विशाल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उनका परिवार किसी विशेष रियायत या विशेषाधिकार की माँग नहीं कर रहा। उनकी एकमात्र माँग यह है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो, ताकि न्याय में अनावश्यक विलंब न हो और दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके।

उन्होंने कहा कि न्याय में होने वाली देरी पीड़ित परिवार की पीड़ा को और गहरा कर देती है। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समाज में यह संदेश जाना आवश्यक है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और अपराधियों को समयबद्ध तरीके से दंडित किया जाता है।

राष्ट्रपति से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील

पत्र के अंत में विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से इस मामले पर व्यक्तिगत ध्यान देने और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने की भावुक अपील की। उन्होंने लिखा कि उनका परिवार अपना सब कुछ खो चुका है और अब केवल न्याय ही उनकी अंतिम उम्मीद है।

उन्होंने अनुरोध किया कि उनके बेटे के मामले को 'सिर्फ एक और फाइल' बनकर न रहने दिया जाए, बल्कि इसे संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ देखा जाए। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की गति और पीड़ित परिवारों के प्रति संस्थागत संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

आगे क्या

अभी तक राष्ट्रपति भवन की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उच्चतम संवैधानिक पद से हस्तक्षेप के बाद मामले की सुनवाई में तेज़ी आएगी और न्याय की राह खुलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी गंभीर मामलों में वर्षों तक सुनवाई खिंचती रहती है। असली सवाल यह है कि क्या संवैधानिक पद पर अपील करना न्यायिक त्वरण का एकमात्र रास्ता बन गया है — और यह व्यवस्था की विफलता की ओर इशारा करता है, न कि सफलता की।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतन अग्रवाल हत्याकांड क्या है?
केतन अग्रवाल की नृशंस हत्या पुणे में हुई थी, जिसके बाद उनके परिवार ने न्याय के लिए संघर्ष शुरू किया। मामले में दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और पीड़ित परिवार शीघ्र सुनवाई की माँग कर रहा है।
विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति को पत्र क्यों लिखा?
विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र इसलिए लिखा क्योंकि वह चाहते हैं कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और न्याय में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने राष्ट्रपति से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई से क्या फर्क पड़ेगा?
फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों की तुलना में तेज़ी से होती है, जिससे पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय मिल सकता है। विशाल अग्रवाल का तर्क है कि न्याय में देरी पीड़ित परिवार की पीड़ा को और गहरा करती है।
20 दिनों में दो मौतों का क्या संदर्भ है?
विशाल अग्रवाल के अनुसार, केतन की हत्या के मात्र 20 दिनों के भीतर उनके पिता — केतन के दादा — का भी निधन हो गया। परिवार का कहना है कि पोते की असमय मृत्यु का सदमा वह सहन नहीं कर सके।
क्या राष्ट्रपति भवन ने इस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अब तक राष्ट्रपति भवन की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उच्चतम संवैधानिक पद से हस्तक्षेप के बाद मामले की सुनवाई में तेज़ी आएगी।
राष्ट्र प्रेस
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