8 अगस्त 2026
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केतन अग्रवाल मौत मामला: सिया गोयल और चेतन चौधरी को 7 दिन की पुलिस कस्टडी, परिवार ने बताया सुनियोजित हत्या

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केतन अग्रवाल मौत मामला: सिया गोयल और चेतन चौधरी को 7 दिन की पुलिस कस्टडी, परिवार ने बताया सुनियोजित हत्या

सारांश

पुणे में केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत का मामला अदालत पहुँचा — दोनों आरोपियों को 7 दिन की पुलिस हिरासत मिली। बचाव पक्ष इसे हादसा बता रहा है, जबकि परिवार का आरोप है कि यह पूर्वनियोजित हत्या थी। लोहागढ़ की यह घटना पुणे में बड़ी बहस का केंद्र बन गई है।

मुख्य बातें

पुणे कोर्ट ने 23 जून 2026 को आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा।
घटना लोहागढ़ भ्रमण के दौरान हुई, जहाँ केतन अग्रवाल की मौत हुई; सिया उनकी मंगेतर थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता राम सहाने ने इसे आकस्मिक मृत्यु बताया और दावा किया कि पुलिस ने शुरू में भी इसे दुर्घटना माना था।
केतन के चाचा दिनेश अग्रवाल ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया और सभी आरोपियों के लिए कड़ी सजा की माँग की।
पुलिस मामले की जाँच जारी है; अब तक 2 आरोपी गिरफ्तार।

पुणे की एक अदालत ने केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के सिलसिले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों — सिया गोयल और चेतन चौधरी — को 23 जून 2026 को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। यह मामला तब से विवादों में है जब से बचाव पक्ष और पीड़ित परिवार के दावे आमने-सामने आए हैं — एक पक्ष इसे दुर्घटना बता रहा है, जबकि परिवार का आरोप है कि यह पूर्वनियोजित हत्या थी।

अदालत में क्या हुआ

आरोपी चेतन चौधरी के अधिवक्ता राम सहाने ने कोर्ट की कार्यवाही के बाद मीडिया को बताया कि दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहाँ न्यायालय ने बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद 7 दिन की पुलिस कस्टडी का आदेश दिया।

सहाने ने कहा कि इस मामले में सिया गोयल मुख्य आरोपी है, जो शिकायतकर्ता के पुत्र केतन अग्रवाल से विवाह करने वाली थी। घटना के समय दोनों लोहागढ़ भ्रमण पर गए थे, जहाँ केतन की मौत हो गई।

बचाव पक्ष का रुख

अधिवक्ता सहाने के अनुसार, बचाव पक्ष का स्पष्ट मत है कि यह आकस्मिक मृत्यु का मामला है, न कि हत्या। उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक जाँच में पुलिस ने भी इसे दुर्घटना माना था, किंतु बाद में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। बचाव पक्ष ने अभियोजन के आरोपों को निराधार बताया है।

पीड़ित परिवार का आरोप

दूसरी ओर, केतन के चाचा दिनेश अग्रवाल ने इस घटना को सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केतन को जानबूझकर लोहागढ़ ले जाया गया और उसे मारने की योजना पहले से बनाई गई थी।

दिनेश अग्रवाल के अनुसार, घटना के तुरंत बाद परिवार को संदेह हुआ और जाँच में संदिग्ध परिस्थितियाँ सामने आईं। उन्होंने बताया कि केतन और सिया की सगाई हो चुकी थी और सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था। परिवार ने माँग की है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

जाँच की स्थिति

पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जाँच कर रही है। अब तक 2 आरोपियों के नाम सामने आए हैं। 7 दिन की हिरासत के दौरान पुलिस से आरोपियों से पूछताछ कर महत्त्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने की उम्मीद है। यह मामला पुणे में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में जाँच की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या दबाव? बचाव और अभियोजन के परस्पर विरोधी दावों के बीच, 7 दिन की हिरासत में पुलिस को ठोस फोरेंसिक आधार स्थापित करना होगा — अन्यथा यह मामला अदालत में कमज़ोर पड़ सकता है। पीड़ित परिवार की माँग न्यायसंगत है, लेकिन न्याय के लिए भावना नहीं, साक्ष्य चाहिए।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतन अग्रवाल मौत मामला क्या है?
यह पुणे का एक विवादास्पद मामला है जिसमें केतन अग्रवाल की लोहागढ़ भ्रमण के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। उनकी मंगेतर सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया गया है। परिवार इसे सुनियोजित हत्या बता रहा है जबकि बचाव पक्ष इसे दुर्घटना कह रहा है।
सिया गोयल और चेतन चौधरी को कितने दिन की कस्टडी मिली?
पुणे की अदालत ने 23 जून 2026 को दोनों आरोपियों को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। इस दौरान पुलिस उनसे पूछताछ कर मामले से जुड़े साक्ष्य एकत्र करेगी।
बचाव पक्ष का क्या कहना है?
आरोपी के अधिवक्ता राम सहाने के अनुसार यह आकस्मिक मृत्यु का मामला है, हत्या का नहीं। उनका दावा है कि पुलिस ने भी प्रारंभ में इसे दुर्घटना माना था और बाद में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
पीड़ित परिवार का क्या आरोप है?
केतन के चाचा दिनेश अग्रवाल का आरोप है कि केतन को जानबूझकर लोहागढ़ ले जाया गया और यह घटना पहले से रची गई साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने सभी दोषियों के लिए कड़ी सजा की माँग की है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
7 दिन की पुलिस हिरासत के दौरान जाँच एजेंसी आरोपियों से पूछताछ कर फोरेंसिक और अन्य साक्ष्य जुटाएगी। हिरासत की अवधि समाप्त होने पर मामला फिर अदालत के समक्ष आएगा, जहाँ अगली कार्यवाही तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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