21 अगस्त 2026
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यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट: केशव मौर्य का संकल्प — यूपी बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब

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यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट: केशव मौर्य का संकल्प — यूपी बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब

सारांश

लखनऊ में यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा दांव खेला — यूपी की कृषि शक्ति और जापानी तकनीक को जोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब बनाने का संकल्प। महिला उद्यमियों को सोलर पर 90% सब्सिडी और जापान के राजदूत की साझेदारी की हामी — अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 21 अगस्त 2026 को लखनऊ में यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में यूपी को विश्व के सबसे बड़े फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।
महिलाओं के नेतृत्व वाली इकाइयों के लिए सोलर पावर पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कैपिटल सब्सिडी व मंडी शुल्क में छूट की घोषणा।
उत्तर प्रदेश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर; एक करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं।
भारत-जापान कूटनीतिक संबंधों के वर्ष 2027 में 75 वर्ष पूर्ण होंगे; राजदूत ओनो केइची ने सहयोग गहरा करने पर जोर दिया।
किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने यूपी में स्थानीय विनिर्माण और भारत को निर्यात केंद्र बनाने की संभावना जताई।
गोल्डी ग्रुप और अमूल (बनास डेयरी) के प्रतिनिधि भी सत्र में शामिल हुए।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 21 अगस्त 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश की कृषि संपदा और जापान की अत्याधुनिक तकनीक के संयोग से प्रदेश को देश ही नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़े फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बैठक में भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची, जापानी प्रतिनिधिमंडल और प्रमुख उद्यमी शामिल हुए।

मुख्य घोषणाएँ और संकल्प

उपमुख्यमंत्री मौर्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का संकल्प है कि विश्व की कोई भी डाइनिंग टेबल ऐसी न हो जहाँ उत्तर प्रदेश का कोई कृषि या खाद्य उत्पाद मौजूद न हो। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश के पास उपजाऊ भूमि, प्रचुर जल संसाधन, मेहनती किसान और देश का सबसे बड़ा युवा कार्यबल है — और यदि इसमें जापानी तकनीक का समावेश हो, तो यूपी के उत्पाद दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचेंगे।

मौर्य ने बताया कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद खाद्य प्रसंस्करण नीति लागू की गई, जिसे वर्ष 2023 में और अधिक व्यावहारिक बनाया गया। उत्तर प्रदेश आज देश का पहला ऐसा राज्य है जो खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए भारी कैपिटल सब्सिडी, मंडी शुल्क में छूट और व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर रहा है।

महिला उद्यमिता और ग्रामीण विकास

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि महिलाओं के नेतृत्व में स्थापित होने वाली इकाइयों के लिए सोलर पावर पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेश में एक करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर विभिन्न उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। हर ब्लॉक और तहसील स्तर पर आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करना सरकार का लक्ष्य है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। सरकार का जोर केवल उत्पादन तक नहीं, बल्कि फूड प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात पर है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी

मौर्य ने जापानी निवेशकों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार के पास पर्याप्त लैंड बैंक, 24 घंटे विद्युत आपूर्ति और देश का सर्वश्रेष्ठ एक्सप्रेस-वे व लॉजिस्टिक्स नेटवर्क उपलब्ध है। लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और निर्माणाधीन जेवर (नोएडा इंटरनेशनल) एयरपोर्ट के माध्यम से टोक्यो से आने वाला निवेशक सीधे उत्तर प्रदेश में उतरकर कारोबार संचालित कर सकता है।

उन्होंने 'काला नमक चावल' — जिसे 'बुद्ध राइस' के नाम से भी जाना जाता है — जैसी अनूठी कृषि विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की विशिष्ट उपज वैश्विक बाजारों में यूपी की अलग पहचान बना सकती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2027 में भारत-जापान कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होंगे, और सारनाथ की बौद्ध विरासत दोनों देशों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ती है।

जापानी पक्ष की प्रतिक्रिया

राजदूत ओनो केइची ने खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और मानव संसाधन विकास में जापान–उत्तर प्रदेश सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि शक्ति, औद्योगिक आधार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं और ऐसी व्यावहारिक साझेदारियाँ विकसित होनी चाहिए जो दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक मूल्य का निर्माण करें।

किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने भारत के प्रति जापान की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि जापानी कंपनियों को भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद और जरूरतों के अनुरूप अपने उत्पाद ढालने होंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में स्थानीय विनिर्माण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला और भारत को पड़ोसी व अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए संभावित निर्यात केंद्र बताया।

आम जनता और किसानों पर असर

सत्र में गोल्डी ग्रुप के निदेशक सुदीप गोयनका और अमूल (बनास डेयरी) के यूपी ऑपरेशंस प्रमुख दिनेश कुमार चौधरी समेत अन्य उद्यमियों ने भी भागीदारी की। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार वैश्विक निवेश आकर्षित करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है और प्रदेश के किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य केंद्र में है। यदि यह साझेदारी धरातल पर उतरती है, तो यूपी के कृषि निर्यात का परिदृश्य आने वाले वर्षों में बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'विश्व का सबसे बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब' जैसे बड़े दावों के साथ ठोस निवेश आँकड़े या समयसीमा अभी सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की खाद्य प्रसंस्करण नीति 2023 में संशोधित हुई, फिर भी राज्य का कृषि निर्यात राष्ट्रीय औसत से पीछे है। असली परीक्षा यह है कि जापानी कंपनियाँ वास्तव में कितना निवेश करती हैं और किसानों तक वैल्यू एडिशन का लाभ कब और कैसे पहुँचता है — क्योंकि इस तरह की निवेश बैठकें अक्सर घोषणाओं तक सिमट जाती हैं।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में क्या हुआ?
21 अगस्त 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश को विश्व के सबसे बड़े फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया। भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची और जापानी उद्यमियों ने खाद्य प्रसंस्करण व तकनीक में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण नीति में क्या सुविधाएँ दी जा रही हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भारी कैपिटल सब्सिडी, मंडी शुल्क में छूट और व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन दे रही है। महिलाओं के नेतृत्व वाली इकाइयों को सोलर पावर पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। यह नीति 2017 में लागू हुई और 2023 में इसे और व्यावहारिक बनाया गया।
जापान और उत्तर प्रदेश के बीच साझेदारी से किसानों को क्या फायदा होगा?
जापानी तकनीक और निवेश से फूड प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश की 65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
किक्कोमन इंडिया का यूपी में क्या रोल होगा?
किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने उत्तर प्रदेश में स्थानीय विनिर्माण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला और भारत को पड़ोसी व अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए निर्यात केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों को भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद के अनुरूप उत्पाद ढालने होंगे।
भारत-जापान संबंधों का यूपी निवेश से क्या संबंध है?
वर्ष 2027 में भारत-जापान कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होंगे, जो इस साझेदारी को और महत्वपूर्ण बनाता है। उपमुख्यमंत्री मौर्य ने सारनाथ की बौद्ध विरासत के माध्यम से दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को भी रेखांकित किया, जो निवेश संबंधों को एक व्यापक आधार देता है।
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