'मिर्जापुर: द फिल्म' में गोलू बनीं श्वेता त्रिपाठी का खुलासा — किताबों का प्यार जोड़ता है दोनों को
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी एक बार फिर अपने सबसे चर्चित किरदार गोलू गुप्ता की भूमिका में 'मिर्जापुर: द फिल्म' में नज़र आने वाली हैं। 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली इस फिल्म की तैयारियों के बीच श्वेता ने खुलासा किया है कि गोलू और उनके अपने स्वभाव में सबसे गहरी समानता किताबों के प्रति अटूट लगाव है — और यही वजह थी कि इस किरदार के लिए उन्हें अलग से कोई रिसर्च नहीं करनी पड़ी।
किताबों का साझा जुनून
श्वेता ने बताया, 'हर कलाकार की इच्छा होती है कि उसे कभी ऐसा किरदार मिले, जिसमें उसके व्यक्तित्व का कोई हिस्सा पहले से मौजूद हो। मेरे लिए गोलू कुछ ऐसा ही किरदार रही है।' उन्होंने कहा कि वह किताबों की दुकान पर 'सिर्फ देखने' के इरादे से जाती हैं, लेकिन हर बार कम से कम तीन किताबें ख़रीदकर ही लौटती हैं।
अभिनेत्री के अनुसार, पढ़ने की इस आदत ने उनके सोचने और दुनिया को देखने का नज़रिया बदल दिया है। उन्होंने कहा, 'किताबों ने मुझे अलग-अलग तरह के लोगों को समझने में मदद की। एक कलाकार के लिए यह बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि किसी किरदार को निभाने से पहले यह समझना पड़ता है कि वह व्यक्ति किसी स्थिति में वैसा व्यवहार क्यों कर रहा है।'
किरदार को मिली स्वाभाविक गहराई
श्वेता ने स्पष्ट किया कि गोलू के किरदार में किताबों से लगाव को दर्शाने वाले दृश्यों के लिए उन्हें अलग से कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी — यह स्वाभाविक रूप से उनके भीतर से आया। उन्होंने कहा कि किताबें इंसान को अपनी ज़िंदगी से बाहर निकले बिना कई अलग-अलग लोगों और उनकी परिस्थितियों को समझने का मौका देती हैं। इसी समझ ने उनकी अभिनय क्षमता को और पैना किया है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि पढ़ने की वजह से उनमें दूसरों के प्रति सहानुभूति और जल्दबाज़ी में राय न बनाने की आदत विकसित हुई है — जो एक अभिनेत्री के लिए अमूल्य गुण है।
गोलू और श्वेता में समानता और अंतर
श्वेता ने बताया कि गोलू और उनके बीच सिर्फ किताबों का प्यार ही साझा नहीं है — दोनों में सवाल पूछने और हर बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार न करने की प्रवृत्ति भी एक जैसी है। दोनों नई चीज़ें सीखने को लेकर उत्सुक रहती हैं।
हालाँकि, उन्होंने एक बड़े अंतर की ओर भी इशारा किया। उनके शब्दों में, 'गोलू काफी शांत और कम बोलने वाली है, जबकि मैं खुद बातचीत करना और अपनी भावनाओं को खुलकर ज़ाहिर करना पसंद करती हूँ।' यह विरोधाभास ही श्वेता के अभिनय को और रोचक बनाता है — वह अपने से अलग स्वभाव को भी विश्वसनीय रूप से परदे पर उतारती हैं।
फिल्म का पूरा दल और निर्माण
'मिर्जापुर: द फिल्म' का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है। फिल्म को अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ ने एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ मिलकर प्रस्तुत किया है। रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर इसके निर्माता हैं, जबकि कासिम जगमगिया और विशाल रामचंदानी सह-निर्माता हैं।
फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फज़ल, दिव्येंदु, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगाँवकर और हर्षिता गौर जैसे परिचित चेहरे अपने चर्चित किरदारों में वापस लौट रहे हैं। इसके साथ ही जितेंद्र कुमार और रवि किशन नए किरदारों के रूप में कहानी में शामिल होंगे।
रिलीज़ और आगे की राह
'मिर्जापुर: द फिल्म' के 4 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने की उम्मीद है। वेब सीरीज़ से बड़े परदे तक का यह सफर दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा रहा है, और श्वेता त्रिपाठी की यह स्वीकारोक्ति कि गोलू उनके भीतर से ही जन्मी है — फिल्म के प्रति प्रशंसकों की अपेक्षाएँ और ऊँची कर देती है।