दिशा सालियान मौत मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया, पिता का बयान दर्ज होगा
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया। अदालत ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और मामले की नए सिरे से जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। साथ ही दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान भी दर्ज करने को कहा गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उस समय वह मात्र 28 वर्ष की थीं और बॉलीवुड में सेलिब्रिटी मैनेजर के रूप में कार्यरत थीं। वह कुछ समय तक दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रही थीं। गौरतलब है कि दिशा की मौत के महज छह दिन बाद, 14 जून 2020 को, सुशांत सिंह राजपूत भी मुंबई स्थित अपने आवास में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं की समयसीमा में निकटता के कारण दिशा की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
पुलिस जांच और परिवार की आपत्तियाँ
प्रारंभ में मुंबई पुलिस ने दिशा की मौत को एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) के रूप में दर्ज किया था। बाद की जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या घोषित किया और कहा कि जांच के दौरान किसी आपराधिक षड्यंत्र अथवा यौन उत्पीड़न के साक्ष्य नहीं मिले। मामले की जाँच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) भी गठित की गई थी। हालाँकि, दिशा के पिता सतीश सालियान इस जांच से कभी संतुष्ट नहीं रहे। उनका आरोप है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने के लिए मामले को दबाने का प्रयास किया गया और जांच में अनेक महत्वपूर्ण सवालों के उत्तर नहीं खोजे गए।
हाईकोर्ट का आदेश और सीबीआई की भूमिका
सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले में एफआईआर दर्ज करने और जांच सीबीआई को सौंपने की माँग की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया। मामले के अधिवक्ता नीलेश ओझा ने बताया, 'कोर्ट के आदेश के मुताबिक अब सीबीआई इस मामले में एफआईआर दर्ज करेगी और जांच आगे बढ़ाएगी। इसके लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। दिशा के पिता का बयान भी दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा पहले की जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी सीबीआई को सौंपे जाएंगे, ताकि एजेंसी मामले की शुरुआत से जांच कर सके।'
ओझा ने यह भी स्पष्ट किया, 'कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जिसके भी खिलाफ साक्ष्य मिलें, उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, बिना साक्ष्य के किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है, तो हमें आपत्ति करने और प्रोटेस्ट पिटीशन दायर करने का अधिकार होगा।'
पिता की प्रतिक्रिया
छह साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली इस राहत पर दिशा के पिता सतीश सालियान ने कहा, 'इस फैसले का मुझे 6 साल से इंतजार था। मैं अपनी बेटी को खो चुका हूँ। मुझे विश्वास है सीबीआई गहराई से इस मामले की जांच करेगी। सीबीआई जांच के आदेश मिलने पर मैंने कोर्ट के न्यायाधीश को इसका आभार भी व्यक्त किया।'
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े मामले अभी भी सार्वजनिक चेतना में बने हुए हैं। सीबीआई के हस्तक्षेप से अब इस करीब छह साल पुराने मामले की जांच नए सिरे से होगी और पुराने सभी रिकॉर्ड एजेंसी के समक्ष रखे जाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज होते ही जांच की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।