12 अगस्त 2026
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छत्तीसगढ़ हिरासत मौत: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया, परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा

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छत्तीसगढ़ हिरासत मौत: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया, परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ पुलिस हिरासत में श्रवण सूर्यवंशी की मौत की CBI जांच का आदेश दिया है। मौत जनवरी 2024 में हुई, एफआईआर ढाई साल बाद दर्ज हुई। परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा मिलेगा; अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हिरासत मौत की जांच CBI को सौंपी।
34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की मृत्यु 22 जनवरी 2024 को हुई; न्यायिक जांच में सिर की चोट मौत का कारण पाई गई।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में ढाई साल की देरी की — 30 जुलाई 2026 को प्राथमिकी दर्ज हुई।
छत्तीसगढ़ सरकार को परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का आदेश; अंतिम राशि बाद में तय होगी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने CBI को 13 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट देने को कहा।

सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस हिरासत के दौरान 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। न्यायालय ने राज्य पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ी आपत्ति जताते हुए यह ऐतिहासिक आदेश पारित किया और मृतक के परिजनों को तत्काल ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश छत्तीसगढ़ सरकार को दिया।

मुख्य घटनाक्रम

18 जनवरी 2024 को बिलासपुर जिले की सीपत थाना पुलिस ने श्रवण सूर्यवंशी को कथित तौर पर कच्ची शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर सेंट्रल जेल भेजा गया। 21 जनवरी 2024 को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सीआईएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ 22 जनवरी 2024 को उनकी मृत्यु हो गई।

गौरतलब है कि मौत के बाद हुई न्यायिक जांच में मजिस्ट्रेट ने पाया कि श्रवण की मृत्यु सिर में लगी चोट के कारण हुई थी — जो हिरासत के दौरान हुई। इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में ढाई साल से अधिक की देरी की और 30 जुलाई 2026 को जाकर प्राथमिकी दर्ज की।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने CBI को निर्देश दिया कि वह न केवल मौत की परिस्थितियों की जांच करे, बल्कि उन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल करे जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं की। न्यायालय ने CBI से 13 अक्टूबर 2026 की अगली सुनवाई से पहले प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

परिवार की लड़ाई और हाईकोर्ट का फैसला

श्रवण की पत्नी और बेटियों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और ₹50 लाख मुआवजे की माँग की थी। अक्टूबर 2024 में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मात्र ₹1 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया और पुलिसकर्मियों की लापरवाही को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था। परिवार ने इस राशि को अपर्याप्त मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया।

मुआवजे पर स्थिति

सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार को अंतरिम राहत के रूप में ₹25 लाख तत्काल देने का निर्देश दिया है। अंतिम मुआवजे की राशि CBI जांच रिपोर्ट और आगामी सुनवाई के बाद तय की जाएगी।

आगे क्या होगा

यह मामला भारत में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों की जवाबदेही की व्यापक बहस से जुड़ा है। CBI को अब यह स्थापित करना होगा कि चोटें हिरासत के दौरान लगीं या पहले से थीं, और किन अधिकारियों ने जांच में देरी की। 13 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में CBI की प्रारंभिक रिपोर्ट मामले की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दोषसिद्धि दर नगण्य रहती है। ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा एक कदम है, पर असली जवाबदेही तब होगी जब वर्दीधारी अधिकारियों पर मुकदमा चले — जो अब तक बेहद दुर्लभ रहा है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ हिरासत मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अगस्त 2026 को 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच CBI को सौंपी और छत्तीसगढ़ सरकार को परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया। CBI को 13 अक्टूबर 2026 की सुनवाई से पहले प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
श्रवण सूर्यवंशी की मौत कैसे हुई थी?
18 जनवरी 2024 को बिलासपुर की सीपत थाना पुलिस ने श्रवण को कथित तौर पर कच्ची शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 22 जनवरी 2024 को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। बाद में मजिस्ट्रेट जांच में सिर की चोट को मौत का कारण बताया गया।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों की?
मौत जनवरी 2024 में हुई, लेकिन पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को एफआईआर दर्ज की — यानी ढाई साल से अधिक की देरी। सर्वोच्च न्यायालय ने इसी निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए और उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच का आदेश दिया जिन्होंने न्यायिक रिपोर्ट के बाद भी कदम नहीं उठाए।
परिवार को कितना मुआवजा मिलेगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश दिया है। अंतिम मुआवजे की राशि CBI जांच और आगामी सुनवाइयों के बाद तय की जाएगी। इससे पहले छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2024 में मात्र ₹1 लाख मुआवजे का आदेश दिया था।
इस मामले में CBI क्या जांच करेगी?
CBI को मौत की परिस्थितियों के साथ-साथ उन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करनी है जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई नहीं की। जांच का दायरा हिरासत में हुई चोट की प्रकृति और जिम्मेदारी तय करने तक फैला है।
राष्ट्र प्रेस
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