ट्विशा शर्मा केस: परिजनों का आरोप — समर्थ के परिवार को माफिया का संरक्षण, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
जबलपुर में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपी समर्थ और उसके परिजन माफिया प्रवृत्ति के लोगों के संरक्षण में हैं और किसी भी कीमत पर उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार ने 23 मई को मीडिया से बातचीत में सीबीआई जाँच में तेज़ी और मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करने की माँग की।
जीजा का बयान: कोर्ट परिसर में संदिग्ध हालात
ट्विशा के जीजा सौरभ शर्मा ने कहा कि जबलपुर में हुआ हंगामा अचानक नहीं था, बल्कि पिछले कई दिनों से बन रहे दबाव के माहौल का नतीजा था। उन्होंने बताया कि वे स्वयं कोर्ट परिसर में मौजूद थे और उन्होंने देखा कि किसी को भी समर्थ से मिलने की इजाज़त नहीं दी जा रही थी — कमरा बंद था और आरोपी वहाँ आराम से बैठा हुआ था।
सौरभ शर्मा ने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति पर इनाम घोषित हो, वह पुलिस को चकमा देकर सीधे कोर्ट तक कैसे पहुँच गया। उनके अनुसार, समर्थ को पहले थाने में सरेंडर करना चाहिए था और इस प्रक्रिया का उल्लंघन कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
चचेरे भाई का आरोप: देरी और दबाव का माहौल
ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने कहा कि पूरे मामले में कार्रवाई बेहद देरी से हुई है। उन्होंने बताया कि न्यायपालिका ने हाल ही में कुछ अहम फ़ैसले लिए हैं और दोबारा पोस्टमार्टम की मंजूरी भी मिल चुकी है। आशीष शर्मा ने उम्मीद जताई कि सीबीआई जल्द सक्रिय होगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट परिसर में पत्रकारों के साथ मारपीट की गई, जो स्पष्ट रूप से दबाव बनाने और मीडिया कवरेज को रोकने की कोशिश थी।
चाचा का बयान: शक्ति प्रदर्शन और वकील को धमकी
ट्विशा के चाचा ओकेश शर्मा ने कहा कि कोर्ट में जो हुआ वह महज़ हंगामा नहीं, बल्कि सुनियोजित शक्ति प्रदर्शन था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी के समर्थकों ने पीड़ित पक्ष के वकील को भी धमकी दी। ओकेश शर्मा के अनुसार, यह एक आपराधिक पृष्ठभूमि वाला परिवार है और उसका समर्थन करने वाले लोग माफिया प्रवृत्ति के हैं।
बहन की माँग: फास्ट-ट्रैक कोर्ट और त्वरित न्याय
ट्विशा की बहन स्वाति शर्मा ने माँग की कि सीबीआई जाँच जल्द-से-जल्द पूरी की जाए और मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सालों तक न्याय नहीं मिलता, इसलिए आरोपियों की शीघ्र गिरफ़्तारी और त्वरित सुनवाई ज़रूरी है।
यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की गति को लेकर व्यापक बहस चल रही है। पीड़ित परिवार की माँगों पर प्रशासन और न्यायपालिका की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगी।