ट्विशा शर्मा केस: समर्थ सिंह के जबलपुर कोर्ट में सरेंडर पर पीड़ित परिवार बोला — 'पूरा सिस्टम उसके साथ'
सारांश
मुख्य बातें
जबलपुर जिला अदालत में मुख्य आरोपी समर्थ सिंह के 22 मई 2026 को आत्मसमर्पण करने के बाद ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला और उलझ गया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पूरे घटनाक्रम के पीछे एक सुनियोजित रणनीति है और प्रशासन तंत्र आरोपी के पक्ष में काम कर रहा है।
कोर्ट परिसर में परिवार को रोका, आरोपी अंदर रहा
ट्विशा शर्मा के जीजा सौरभ शर्मा ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि समर्थ सिंह सुबह से ही जबलपुर में मौजूद था, फिर भी न पुलिस ने उसे देखा और न एसआईटी की नजर उस पर पड़ी। परिवार के सदस्यों को कोर्ट परिसर से बाहर कर दिया गया, जबकि आरोपी अंदर रहा।
सौरभ शर्मा ने कहा, 'खतरा हमें है। समर्थ सिंह के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी है, उस पर ₹30,000 का इनाम भी घोषित है, लेकिन इसके बावजूद उसे पकड़ा नहीं जा रहा। अगर उसने सरेंडर किया है, तो वह खुद अंदर है, लेकिन हम लोग अंदर नहीं जा पा रहे हैं।'
परिवार का आरोप: अग्रिम जमानत से सरेंडर तक — सब सोची-समझी चाल
सौरभ शर्मा ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई गई, फिर उसे वापस लिया गया और उसके बाद भोपाल से जबलपुर पहुंचकर सरेंडर किया गया। उनके अनुसार यह सब बिना किसी सुनियोजित रणनीति के नहीं हो सकता।
ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने कहा कि पिछले दस दिनों से परिवार लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है और अब प्रशासन को बिना देरी किए पूरी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सच जल्द सामने आ सके।
बहन का दावा: घटना के बाद दो-तीन घंटे में 40 फोन कॉल
ट्विशा की बहन ने दावा किया कि घटना के महज दो से तीन घंटे के भीतर करीब 40 फोन कॉल किए गए थे, जो सामने वाले पक्ष के प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि परिवार को मध्य प्रदेश सरकार पर भरोसा नहीं है और वे चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार भी इस जांच में शामिल हो, क्योंकि ट्विशा और उनका परिवार उत्तर प्रदेश से है।
सीबीआई जांच और दूसरा पोस्टमार्टम
ट्विशा के चाचा लोकेश शर्मा ने सीबीआई जांच को सही ठहराया और कहा कि बिना सीबीआई जांच के पीड़िता को न्याय मिलना मुश्किल था। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव का धन्यवाद किया और बताया कि जबलपुर हाईकोर्ट में भी इस मामले को लेकर सुनवाई प्रस्तावित है और परिवार की ओर से याचिका दाखिल की गई है।
इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दी थी। ट्विशा की बहन मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि दिल्ली से विशेषज्ञ टीम के आने का इंतजार किया जा रहा है और टीम के पहुंचने के बाद ही दूसरा पोस्टमार्टम होगा। रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मामले में राजनीतिक प्रवेश
यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। शहडोल में महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव मधु शर्मा ने इस मौत को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि देश में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहाँ पढ़ी-लिखी और सशक्त महिलाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई और बाद में उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
मधु शर्मा ने आरोप लगाया कि ट्विशा ने अपनी माँ और परिवार को पहले ही बताया था कि उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस परिवार में ट्विशा की शादी हुई, वहाँ उनकी सास रिटायर्ड जज हैं, ऐसे में केस को दबाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। महिला कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन की घोषणा की है।
गौरतलब है कि यह मामला तब से चर्चा में है जब से ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत की खबर सामने आई। परिवार द्वारा लगातार न्याय की माँग और सीबीआई जांच की स्वीकृति के बाद अब सबकी नजरें दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और अदालती कार्यवाही पर टिकी हैं।