7 जुलाई 2026
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ट्विशा शर्मा केस: समर्थ सिंह के जबलपुर कोर्ट में सरेंडर पर पीड़ित परिवार बोला — 'पूरा सिस्टम उसके साथ'

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ट्विशा शर्मा केस: समर्थ सिंह के जबलपुर कोर्ट में सरेंडर पर पीड़ित परिवार बोला — 'पूरा सिस्टम उसके साथ'

सारांश

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी समर्थ सिंह के जबलपुर कोर्ट में सरेंडर के बाद पीड़ित परिवार ने सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि पूरा घटनाक्रम सुनियोजित है और सास के रिटायर्ड जज होने के कारण प्रभाव का खेल चल रहा है।

मुख्य बातें

समर्थ सिंह ने 22 मई 2026 को जबलपुर जिला अदालत में आत्मसमर्पण किया।
पीड़ित परिवार का आरोप — समर्थ सिंह के खिलाफ लुक आउट नोटिस और ₹30,000 का इनाम होने के बावजूद पुलिस व एसआईटी ने उसे नहीं पकड़ा।
ट्विशा की बहन का दावा — घटना के दो-तीन घंटे के भीतर करीब 40 फोन कॉल किए गए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति दी; दिल्ली से विशेषज्ञ टीम का इंतजार।
परिवार ने सीबीआई जांच और उत्तर प्रदेश सरकार की भागीदारी की माँग की।
महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव मधु शर्मा ने देशभर में आंदोलन की घोषणा की।

जबलपुर जिला अदालत में मुख्य आरोपी समर्थ सिंह के 22 मई 2026 को आत्मसमर्पण करने के बाद ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला और उलझ गया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पूरे घटनाक्रम के पीछे एक सुनियोजित रणनीति है और प्रशासन तंत्र आरोपी के पक्ष में काम कर रहा है।

कोर्ट परिसर में परिवार को रोका, आरोपी अंदर रहा

ट्विशा शर्मा के जीजा सौरभ शर्मा ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि समर्थ सिंह सुबह से ही जबलपुर में मौजूद था, फिर भी न पुलिस ने उसे देखा और न एसआईटी की नजर उस पर पड़ी। परिवार के सदस्यों को कोर्ट परिसर से बाहर कर दिया गया, जबकि आरोपी अंदर रहा।

सौरभ शर्मा ने कहा, 'खतरा हमें है। समर्थ सिंह के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी है, उस पर ₹30,000 का इनाम भी घोषित है, लेकिन इसके बावजूद उसे पकड़ा नहीं जा रहा। अगर उसने सरेंडर किया है, तो वह खुद अंदर है, लेकिन हम लोग अंदर नहीं जा पा रहे हैं।'

परिवार का आरोप: अग्रिम जमानत से सरेंडर तक — सब सोची-समझी चाल

सौरभ शर्मा ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई गई, फिर उसे वापस लिया गया और उसके बाद भोपाल से जबलपुर पहुंचकर सरेंडर किया गया। उनके अनुसार यह सब बिना किसी सुनियोजित रणनीति के नहीं हो सकता।

ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने कहा कि पिछले दस दिनों से परिवार लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है और अब प्रशासन को बिना देरी किए पूरी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सच जल्द सामने आ सके।

बहन का दावा: घटना के बाद दो-तीन घंटे में 40 फोन कॉल

ट्विशा की बहन ने दावा किया कि घटना के महज दो से तीन घंटे के भीतर करीब 40 फोन कॉल किए गए थे, जो सामने वाले पक्ष के प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि परिवार को मध्य प्रदेश सरकार पर भरोसा नहीं है और वे चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार भी इस जांच में शामिल हो, क्योंकि ट्विशा और उनका परिवार उत्तर प्रदेश से है।

सीबीआई जांच और दूसरा पोस्टमार्टम

ट्विशा के चाचा लोकेश शर्मा ने सीबीआई जांच को सही ठहराया और कहा कि बिना सीबीआई जांच के पीड़िता को न्याय मिलना मुश्किल था। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव का धन्यवाद किया और बताया कि जबलपुर हाईकोर्ट में भी इस मामले को लेकर सुनवाई प्रस्तावित है और परिवार की ओर से याचिका दाखिल की गई है।

इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दी थी। ट्विशा की बहन मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि दिल्ली से विशेषज्ञ टीम के आने का इंतजार किया जा रहा है और टीम के पहुंचने के बाद ही दूसरा पोस्टमार्टम होगा। रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मामले में राजनीतिक प्रवेश

यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। शहडोल में महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव मधु शर्मा ने इस मौत को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि देश में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहाँ पढ़ी-लिखी और सशक्त महिलाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई और बाद में उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।

मधु शर्मा ने आरोप लगाया कि ट्विशा ने अपनी माँ और परिवार को पहले ही बताया था कि उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस परिवार में ट्विशा की शादी हुई, वहाँ उनकी सास रिटायर्ड जज हैं, ऐसे में केस को दबाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। महिला कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन की घोषणा की है।

गौरतलब है कि यह मामला तब से चर्चा में है जब से ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत की खबर सामने आई। परिवार द्वारा लगातार न्याय की माँग और सीबीआई जांच की स्वीकृति के बाद अब सबकी नजरें दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और अदालती कार्यवाही पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पीड़ित परिवार की शिकायत यह है कि प्रक्रिया की गति और दिशा दोनों संदिग्ध हैं। सास का रिटायर्ड जज होना और घटना के तुरंत बाद दर्जनों फोन कॉल का दावा — ये तथ्य अगर जाँच में सत्यापित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि न्यायिक-प्रशासनिक नेटवर्क के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बन जाएगा। दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और सीबीआई जांच की दिशा ही तय करेगी कि इस मामले में जवाबदेही संभव है या नहीं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा केस में समर्थ सिंह ने सरेंडर क्यों किया?
समर्थ सिंह ने 22 मई 2026 को जबलपुर जिला अदालत में आत्मसमर्पण किया। इससे पहले उसने अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम क्यों कराया जा रहा है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति दी है क्योंकि परिवार को पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर संदेह है। दिल्ली से विशेषज्ञ टीम के पहुँचने के बाद यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी और रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम संस्कार होगा।
ट्विशा शर्मा के परिवार ने सीबीआई जांच की माँग क्यों की?
परिवार का कहना है कि आरोपी पक्ष का प्रभाव ऊँचे स्तर तक है — समर्थ सिंह की सास रिटायर्ड जज हैं। ट्विशा के चाचा लोकेश शर्मा ने कहा कि बिना सीबीआई जांच के न्याय मिलना मुश्किल था और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की गंभीरता को समझा है।
ट्विशा शर्मा का परिवार उत्तर प्रदेश सरकार को क्यों शामिल करना चाहता है?
ट्विशा शर्मा और उनका परिवार उत्तर प्रदेश से हैं। परिवार ने कहा कि उन्हें मध्य प्रदेश सरकार पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार भी इस जांच में भागीदार बने।
महिला कांग्रेस ने इस मामले में क्या रुख अपनाया है?
शहडोल में महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव मधु शर्मा ने आरोप लगाया कि ट्विशा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था और मामले को दबाने की कोशिश हो सकती है। महिला कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन की घोषणा की है।
राष्ट्र प्रेस
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