ट्रेंट का शेयर 11% से अधिक टूटा, जून तिमाही में आय वृद्धि उम्मीद से कम
सारांश
मुख्य बातें
टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयर मंगलवार, 7 जुलाई को 11.39 प्रतिशत की तीखी गिरावट के साथ ₹2,962 प्रति शेयर पर आ गए। यह गिरावट कंपनी के जून तिमाही (Q1 FY27) के उस बिजनेस अपडेट के बाद आई, जिसमें राजस्व वृद्धि बाज़ार की अपेक्षाओं से काफी नीचे रही। विश्लेषकों ने इसे निकट अवधि के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बताया है।
तिमाही आंकड़े और अपेक्षाओं का अंतर
ट्रेंट ने जून तिमाही में ₹5,666 करोड़ की स्टैंडअलोन आय दर्ज की, जो एक साल पहले की समान तिमाही में ₹4,781 करोड़ थी। इस प्रकार सालाना आधार पर आय वृद्धि करीब 19 प्रतिशत रही, जबकि विश्लेषकों को 22-23 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी। यह अंतर ही बाज़ार में बिकवाली का प्रमुख कारण बना।
स्टोर विस्तार की रफ्तार में कमी
तिमाही के अंत तक ट्रेंट के पास कुल 1,312 स्टोर थे, जिनमें 301 वेस्टसाइड आउटलेट, 982 जूडियो स्टोर और लाइफस्टाइल फॉर्मेट के 29 स्टोर शामिल हैं। कई ब्रोकरेज फर्मों ने नोट किया है कि आय वृद्धि में कमी के साथ-साथ नए स्टोर खुलने की गति भी धीमी पड़ी है, जो निवेशकों की चिंता को और बढ़ाती है।
विशेषज्ञों की राय
बाज़ार जानकारों का कहना है कि यह अपडेट उम्मीद से कमज़ोर रहा, लेकिन अधिकांश विश्लेषकों की राय है कि यह कोई संरचनात्मक समस्या नहीं है। उनके अनुसार, यह एक तिमाही की सुस्ती हो सकती है, और कंपनी के दीर्घकालिक विस्तार का ढाँचा अभी भी मज़बूत बना हुआ है। हालाँकि, निकट अवधि में दबाव बने रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शेयर का प्रदर्शन: दीर्घकालिक तस्वीर
गौरतलब है कि इस 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बावजूद ट्रेंट के शेयर ने बीते एक महीने में करीब 9 प्रतिशत का सकारात्मक रिटर्न दिया है। बीते एक साल में शेयर में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है, जबकि पिछले 5 वर्षों में शेयर ने 390 प्रतिशत का असाधारण रिटर्न दिया है — जो इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक मज़बूत कहानी बनाता है।
पिछली तिमाही का संदर्भ
तुलना के लिए, वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही (Q4 FY26) में कंपनी की आय ₹5,028 करोड़ और कुल खर्च ₹4,117 करोड़ रहा था। उस तिमाही में ऑपरेटिंग मुनाफा ₹911 करोड़ और शुद्ध मुनाफा (कर के बाद) ₹413 करोड़ था। ऑपरेटिंग मार्जिन 18 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 15 प्रतिशत से बेहतर था। आगे की तिमाहियों में मार्जिन की दिशा पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।