टीसीएस ने चौथी तिमाही में 12%25 की वृद्धि के साथ शानदार परिणाम घोषित किए, 31 रुपए का डिविडेंड
सारांश
Key Takeaways
- टीसीएस का नेट प्रॉफिट 12%25 बढ़ा।
- कंपनी ने 31 रुपए का डिविडेंड घोषित किया।
- ऑपरेशन्स से आय 9.6%25 बढ़कर 70,698 करोड़ रुपए हुई।
- चौथी तिमाही में कंपनी का खर्च 53,093 करोड़ रुपए रहा।
- एआई से आय 2.3 अरब डॉलर से अधिक।
मुंबई, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देश की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के परिणामों की घोषणा की। इस तिमाही में कंपनी ने बताया कि उसका कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 13,718 करोड़ रुपए हो गया है।
कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि पिछले वर्ष (वित्त वर्ष 2025) की इसी तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 12,224 करोड़ रुपए था।
इस तिमाही में कंपनी की ऑपरेशन्स से आय में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है, जो सालाना आधार पर 9.6 प्रतिशत बढ़कर 70,698 करोड़ रुपए हो गई। यह पिछले वर्ष इसी तिमाही में 64,479 करोड़ रुपए थी।
तिमाही दर तिमाही, कंपनी का प्रदर्शन और भी मजबूत दिखा। मुनाफा 28.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि रेवेन्यू में 5.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर कृतिवासन ने नतीजों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कंपनी ने लगातार तीसरी तिमाही में ग्रोथ दर्ज की है।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी की ग्रोथ प्रमुख बाजारों और विभिन्न उद्योग सेगमेंट्स में संतुलित है।
कृतिवासन ने कहा, "वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद ग्राहकों का टेक्नोलॉजी निवेश पर विश्वास बना हुआ है, जिससे भविष्य में कंपनी के लिए अवसर बढ़ेंगे।"
कंपनी ने अपने निवेशकों को 31 रुपए प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है, जिसे आगामी एजीएम में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद वितरित किया जाएगा।
टीसीएस ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष में कंपनी ने डिविडेंड के रूप में 39,571 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।
चौथी तिमाही में कंपनी का कुल खर्च 53,093 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 49,105 करोड़ रुपए था।
कंपनी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, प्रेसिडेंट और सीओओ आरती सुब्रमण्यम ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 एंटरप्राइज एआई अपनाने के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा है।
उन्होंने बताया कि चौथी तिमाही में कंपनी की सालाना एआई से होने वाली आय 2.3 अरब डॉलर से अधिक हो गई, जो एआई सॉल्यूशंस की बढ़ती मांग के कारण संभव हुआ।