असम और पुडुचेरी में मतदाताओं की अभूतपूर्व भागीदारी, जदयू नेता ने एनडीए की जीत का अनुमान लगाया
सारांश
Key Takeaways
- मतदाताओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर
- असम और पुडुचेरी में एनडीए की स्थिति मजबूत
- केरल में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता
- पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत की संभावना
- बिहार में नीतीश कुमार की सरकार पर भरोसा
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने शुक्रवार को जानकारी दी कि केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रुझान प्रमुख राज्यों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की मजबूत स्थिति को दर्शा रहे हैं।
जदयू प्रवक्ता ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, “मतदाताओं ने असामान्य संख्या में मतदान किया है। मौजूदा रुझानों के अनुसार, असम और पुडुचेरी में एनडीए सरकार बनाने की ओर अग्रसर दिख रहा है। केरल में, जहां परंपरागत रूप से एलडीएफ बनाम यूडीएफ की भिड़ंत होती रही है, वहीं भाजपा ने हर चुनाव में अपने वोट प्रतिशत में वृद्धि की है। ऐसे में, कोई बड़ा बदलाव भी संभव है।”
गौरतलब है कि गुरुवार को संपन्न हुए केरल, असम और पुडुचेरी के चुनावों में मतदाताओं ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया। असम में भागीदारी 85.91 प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि पुडुचेरी में यह 89.87 प्रतिशत रही। केरल में इस बार 78.27 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन राज्यों में वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
इसी बीच, जदयू प्रवक्ता ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का दावा किया, जहां मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लोकप्रियता लगातार घट रही है। चुनाव परिणामों को लेकर ममता बनर्जी भी अब इस निष्कर्ष पर पहुंच चुकी हैं कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार में वापसी नहीं होगी।”
राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि पूरे बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति, बंद पड़े कारखाने और रोजगार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठ रहे हैं। लोगों को लगता है कि यदि भाजपा की सरकार बनती है तो एनडीए की केंद्र सरकार का लाभ राज्य को मिलेगा। इसलिए मतदाताओं का रुझान तेजी से भाजपा की ओर बढ़ रहा है।
बिहार में कानून व्यवस्था पर तेजस्वी यादव द्वारा सवाल उठाने पर राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “उन्होंने विधानसभा चुनाव के समय भी सवाल उठाए थे, लेकिन मतदाताओं ने मजबूत तरीके से नीतीश कुमार के नेतृत्व और एनडीए की उपलब्धियों को स्वीकार किया। बिहार एक सुशासित राज्य है और लोग उसके मॉडल पर विश्वास करते हैं।”