टीसीएस का शेयर रिकॉर्ड हाई से 55% टूटा, मिडकैप आईटी स्टॉक्स 60-78% फिसले; एक्सेंचर की चेतावनी से सेक्टर में हड़कंप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय आईटी सेक्टर में शुक्रवार, 19 जून 2026 को व्यापक बिकवाली का दौर देखा गया, जब ग्लोबल कंसल्टिंग दिग्गज एक्सेंचर ने मौजूदा तिमाही के लिए अपने राजस्व अनुमान में कटौती करते हुए सतर्क कारोबारी आउटलुक पेश किया। इस एक घटनाक्रम ने भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में पहले से जारी गिरावट को और गहरा कर दिया — टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹4,592 से लगभग 55 प्रतिशत नीचे आ चुका है, जबकि कई मिडकैप आईटी स्टॉक्स अपने शीर्ष स्तरों से 60 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गए हैं।
लार्जकैप आईटी कंपनियों की गिरावट का विवरण
रिपोर्टों के अनुसार, TCS के अलावा अन्य प्रमुख आईटी कंपनियाँ भी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों से भारी गिरावट झेल रही हैं। विप्रो में 52 प्रतिशत, एलटीआई माइंडट्री में 50 प्रतिशत और इन्फोसिस में 48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि ये कंपनियाँ भारत के आईटी निर्यात की रीढ़ हैं और इनके शेयरों में यह गिरावट निवेशकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत के आईटी सेक्टर की कुल वैल्यूएशन लगभग ₹26 लाख करोड़ आँकी जाती है और सेक्टर की कुल कमाई का करीब 57 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी बाज़ार से आता है।
मिडकैप आईटी स्टॉक्स में और भी गहरी चोट
छोटी-मझौली आईटी कंपनियों का प्रदर्शन लार्जकैप से भी कमज़ोर रहा है। हैप्पीएस्ट माइंड्स का शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से 78 प्रतिशत, न्यूजेन सॉफ्टवेयर का 74 प्रतिशत और सोनाटा सॉफ्टवेयर का 66 प्रतिशत तक फिसल चुका है।
इसके अलावा, बिड़लासॉफ्ट, टाटा एल्क्सी और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के शेयरों में भी 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर, मास्टेक और जेंसार टेक्नोलॉजीज के शेयर अपने रिकॉर्ड स्तर से आधे रह गए हैं।
एक्सेंचर की चेतावनी और वैश्विक कारण
एक्सेंचर ने मौजूदा तिमाही के राजस्व अनुमान में कटौती की, जिससे उम्मीद से बेहतर मुनाफे के बावजूद निवेशकों में निराशा फैल गई। विश्लेषकों के अनुसार, भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों की चौथी तिमाही की कमाई और वित्त वर्ष 2027 का आउटलुक काफी हद तक अपेक्षाओं से कम रहा।
निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि अनिश्चितता का असर आने वाली तिमाहियों में भी दिख सकता है और इससे भारतीय आईटी कंपनियों के वित्त वर्ष 2027 के गाइडेंस पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, एचएसबीसी ने विश्लेषण में पाया कि कमज़ोरी की मुख्य वजह भू-राजनीतिक उथल-पुथल है, न कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उत्पादकता बढ़ने को लेकर चिंताएँ।
ब्रोकरेज फर्मों की चेतावनियाँ और आगे की राह
कई ब्रोकरेज फर्मों ने चेतावनी दी है कि माँग को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक दबाव का असर विकास दर पर जारी रह सकता है। मई में आई एक रिपोर्ट में भी कहा गया था कि अमेरिका में ब्याज दरों का ऊँचा बने रहना आईटी शेयरों के लिए चुनौती है, क्योंकि इससे मंदी का खतरा बढ़ता है — जो प्रमुख विदेशी बाज़ारों में क्लाइंट्स को तकनीकी खर्च घटाने और गैर-ज़रूरी प्रोजेक्ट्स में देरी करने पर मजबूर कर सकता है।
एचएसबीसी ने यह भी कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों के लिए निकट भविष्य में कोई उल्लेखनीय ग्रोथ ट्रिगर नज़र नहीं आ रहा, हालाँकि सेक्टर का वैल्यूएशन अब निचले स्तरों के करीब पहुँच रहा है — जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक संभावित अवसर हो सकता है।