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टीसीएस का शेयर रिकॉर्ड हाई से 55% टूटा, मिडकैप आईटी स्टॉक्स 60-78% फिसले; एक्सेंचर की चेतावनी से सेक्टर में हड़कंप

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टीसीएस का शेयर रिकॉर्ड हाई से 55% टूटा, मिडकैप आईटी स्टॉक्स 60-78% फिसले; एक्सेंचर की चेतावनी से सेक्टर में हड़कंप

सारांश

एक्सेंचर की राजस्व कटौती ने भारतीय आईटी सेक्टर में पहले से जारी दर्द को और गहरा कर दिया — TCS रिकॉर्ड से 55% नीचे, हैप्पीएस्ट माइंड्स 78% तक फिसला। ₹26 लाख करोड़ के सेक्टर पर अमेरिकी मंदी की आशंका और भू-राजनीतिक दबाव की दोहरी मार पड़ रही है।

मुख्य बातें

TCS का शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹4,592 से लगभग 55 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
विप्रो में 52% , एलटीआई माइंडट्री में 50% और इन्फोसिस में 48% की गिरावट दर्ज।
मिडकैप में हैप्पीएस्ट माइंड्स 78% , न्यूजेन सॉफ्टवेयर 74% और सोनाटा सॉफ्टवेयर 66% फिसले।
एक्सेंचर द्वारा मौजूदा तिमाही के राजस्व अनुमान में कटौती के बाद सेक्टर में बिकवाली तेज हुई।
मॉर्गन स्टेनली ने चेतावनी दी कि अनिश्चितता वित्त वर्ष 2027 के गाइडेंस पर असर डाल सकती है।
भारतीय आईटी सेक्टर की कुल वैल्यूएशन लगभग ₹26 लाख करोड़ ; कुल राजस्व का 57% अमेरिकी बाज़ार से।

भारतीय आईटी सेक्टर में शुक्रवार, 19 जून 2026 को व्यापक बिकवाली का दौर देखा गया, जब ग्लोबल कंसल्टिंग दिग्गज एक्सेंचर ने मौजूदा तिमाही के लिए अपने राजस्व अनुमान में कटौती करते हुए सतर्क कारोबारी आउटलुक पेश किया। इस एक घटनाक्रम ने भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में पहले से जारी गिरावट को और गहरा कर दिया — टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹4,592 से लगभग 55 प्रतिशत नीचे आ चुका है, जबकि कई मिडकैप आईटी स्टॉक्स अपने शीर्ष स्तरों से 60 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गए हैं।

लार्जकैप आईटी कंपनियों की गिरावट का विवरण

रिपोर्टों के अनुसार, TCS के अलावा अन्य प्रमुख आईटी कंपनियाँ भी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों से भारी गिरावट झेल रही हैं। विप्रो में 52 प्रतिशत, एलटीआई माइंडट्री में 50 प्रतिशत और इन्फोसिस में 48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि ये कंपनियाँ भारत के आईटी निर्यात की रीढ़ हैं और इनके शेयरों में यह गिरावट निवेशकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत के आईटी सेक्टर की कुल वैल्यूएशन लगभग ₹26 लाख करोड़ आँकी जाती है और सेक्टर की कुल कमाई का करीब 57 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी बाज़ार से आता है।

मिडकैप आईटी स्टॉक्स में और भी गहरी चोट

छोटी-मझौली आईटी कंपनियों का प्रदर्शन लार्जकैप से भी कमज़ोर रहा है। हैप्पीएस्ट माइंड्स का शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से 78 प्रतिशत, न्यूजेन सॉफ्टवेयर का 74 प्रतिशत और सोनाटा सॉफ्टवेयर का 66 प्रतिशत तक फिसल चुका है।

इसके अलावा, बिड़लासॉफ्ट, टाटा एल्क्सी और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के शेयरों में भी 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर, मास्टेक और जेंसार टेक्नोलॉजीज के शेयर अपने रिकॉर्ड स्तर से आधे रह गए हैं।

एक्सेंचर की चेतावनी और वैश्विक कारण

एक्सेंचर ने मौजूदा तिमाही के राजस्व अनुमान में कटौती की, जिससे उम्मीद से बेहतर मुनाफे के बावजूद निवेशकों में निराशा फैल गई। विश्लेषकों के अनुसार, भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों की चौथी तिमाही की कमाई और वित्त वर्ष 2027 का आउटलुक काफी हद तक अपेक्षाओं से कम रहा।

निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि अनिश्चितता का असर आने वाली तिमाहियों में भी दिख सकता है और इससे भारतीय आईटी कंपनियों के वित्त वर्ष 2027 के गाइडेंस पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, एचएसबीसी ने विश्लेषण में पाया कि कमज़ोरी की मुख्य वजह भू-राजनीतिक उथल-पुथल है, न कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उत्पादकता बढ़ने को लेकर चिंताएँ।

ब्रोकरेज फर्मों की चेतावनियाँ और आगे की राह

कई ब्रोकरेज फर्मों ने चेतावनी दी है कि माँग को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक दबाव का असर विकास दर पर जारी रह सकता है। मई में आई एक रिपोर्ट में भी कहा गया था कि अमेरिका में ब्याज दरों का ऊँचा बने रहना आईटी शेयरों के लिए चुनौती है, क्योंकि इससे मंदी का खतरा बढ़ता है — जो प्रमुख विदेशी बाज़ारों में क्लाइंट्स को तकनीकी खर्च घटाने और गैर-ज़रूरी प्रोजेक्ट्स में देरी करने पर मजबूर कर सकता है।

एचएसबीसी ने यह भी कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों के लिए निकट भविष्य में कोई उल्लेखनीय ग्रोथ ट्रिगर नज़र नहीं आ रहा, हालाँकि सेक्टर का वैल्यूएशन अब निचले स्तरों के करीब पहुँच रहा है — जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक संभावित अवसर हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल से है, कुछ राहत देता है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय IT कंपनियाँ अपनी भौगोलिक और क्षेत्रीय निर्भरता को विविध बना पाएँगी, या अगले वैश्विक झटके में फिर इसी तरह बिकवाली का शिकार होंगी।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TCS का शेयर रिकॉर्ड हाई से कितना गिरा है?
TCS का शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹4,592 से लगभग 55 प्रतिशत नीचे आ चुका है। यह गिरावट एक्सेंचर के सतर्क राजस्व आउटलुक और वैश्विक माँग में अनिश्चितता के कारण और तेज हुई है।
भारतीय आईटी शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
एक्सेंचर ने मौजूदा तिमाही के राजस्व अनुमान में कटौती करते हुए सतर्क कारोबारी आउटलुक दिया, जिसने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया। इसके अलावा, अमेरिका में ब्याज दरों का ऊँचा बने रहना, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और क्लाइंट्स द्वारा तकनीकी खर्च में कटौती भी प्रमुख कारण हैं।
किन मिडकैप आईटी स्टॉक्स में सबसे ज़्यादा गिरावट आई है?
हैप्पीएस्ट माइंड्स का शेयर रिकॉर्ड हाई से 78 प्रतिशत, न्यूजेन सॉफ्टवेयर का 74 प्रतिशत और सोनाटा सॉफ्टवेयर का 66 प्रतिशत फिसला है। बिड़लासॉफ्ट, टाटा एल्क्सी और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज में भी 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय आईटी सेक्टर के लिए आगे क्या संभावनाएँ हैं?
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, अनिश्चितता का असर आने वाली तिमाहियों में भी दिख सकता है और वित्त वर्ष 2027 के गाइडेंस पर दबाव बना रह सकता है। एचएसबीसी ने कहा है कि निकट भविष्य में कोई बड़ा ग्रोथ ट्रिगर नहीं दिख रहा, हालाँकि सेक्टर का वैल्यूएशन निचले स्तरों के करीब पहुँच रहा है।
भारतीय आईटी सेक्टर अमेरिकी बाज़ार पर कितना निर्भर है?
भारतीय आईटी सेक्टर अपनी कुल कमाई का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी बाज़ार से प्राप्त करता है। इसी कारण अमेरिका में मंदी की आशंका या क्लाइंट्स द्वारा खर्च में कटौती का सीधा और गहरा असर भारतीय IT कंपनियों पर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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