निफ्टी आईटी 6% से ज्यादा टूटा: एक्सेंचर के कमज़ोर अनुमान से इन्फोसिस, TCS समेत सभी आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
निफ्टी आईटी इंडेक्स शुक्रवार, 19 जून को शुरुआती कारोबार में 1,831 अंक यानी 6.43 प्रतिशत की तीखी गिरावट के साथ दिन के निचले स्तर 26,634.50 पर पहुँच गया — और यह उस दिन का सबसे बुरा प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा। यह बिकवाली वैश्विक परामर्श एवं प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी एक्सेंचर द्वारा वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती और मांग के कमज़ोर रहने के संकेतों के बाद शुरू हुई।
बाज़ार में क्या हुआ
खबर लिखे जाने तक निफ्टी आईटी 5 प्रतिशत से अधिक यानी करीब 1,500 अंक की गिरावट के साथ 26,956.90 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। व्यापक बाज़ार भी इस दबाव से अछूता नहीं रहा — सेंसेक्स 700 अंक से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी करीब 200 अंक टूटकर 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया।
गौरतलब है कि पिछले एक वर्ष में निफ्टी आईटी इंडेक्स 38,600 के स्तर से लगभग 30 प्रतिशत नीचे आ चुका है — और शुक्रवार की गिरावट ने उस घाव को और गहरा कर दिया।
कौन-से शेयर सबसे ज्यादा टूटे
बिकवाली की अगुवाई इन्फोसिस ने की, जिसके शेयर 7.4 प्रतिशत तक गिर गए। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 5.9 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 4.5 प्रतिशत और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर लगभग 5 प्रतिशत टूटे, एलटीआईमाइंडट्री में 4 प्रतिशत से अधिक और कोफोर्ज में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट आई। विप्रो भी 3 प्रतिशत से अधिक फिसल गया। बीएसई मिडकैप सूचकांक में केपीआईटी टेक्नोलॉजीज, टाटा एल्क्सी, हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज भी सर्वाधिक नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे।
एक्सेंचर के अनुमान ने क्यों मचाई हलचल
एक्सेंचर ने तीसरी तिमाही में 18.7 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, लेकिन ग्राहक खर्च में जारी अनिश्चितता और पश्चिम एशिया की घटनाओं से जुड़े राजस्व दबाव के कारण पूरे वर्ष के लिए अपना विकास अनुमान घटा दिया। इसके अलावा, कंपनी की नई बुकिंग्स भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रहीं। इसके चलते एक्सेंचर के शेयर रातोंरात लगभग 18 प्रतिशत गिर गए। इन्फोसिस के अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीद (एडीआर) करीब 10 प्रतिशत और विप्रो के एडीआर 3 प्रतिशत से अधिक टूट गए।
यह ऐसे समय में आया है जब इसी सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के उस संकेत के बाद भी आईटी सेक्टर दबाव में था, जिसमें कहा गया था कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनी रह सकती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सेंचर के कमज़ोर अनुमान ने भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर में बिकवाली को बढ़ावा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि 'आईटी शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी आ सकती है क्योंकि अब इनके मूल्यांकन आकर्षक होते जा रहे हैं।' हालाँकि उनका यह भी मानना है कि यदि आय अनुमान लगातार घटते रहे तो इन शेयरों पर दबाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि हालिया तीखी गिरावट के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों का मूल्यांकन एक्सेंचर की तुलना में अभी भी अधिक है — एक्सेंचर फिलहाल अगले एक वर्ष की अनुमानित आय के लगभग नौ गुना मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है। मौजूदा अनिश्चितताओं को देखते हुए विश्लेषकों ने इस क्षेत्र को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा है।
आगे क्या होगा
वैश्विक तकनीकी खर्च में सुधार की रफ्तार को लेकर निवेशकों की चिंताएँ फिर से सतह पर आ गई हैं। भारतीय आईटी कंपनियों की तिमाही आय और प्रबंधन की टिप्पणियाँ अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं — यदि आय अनुमान में और कटौती हुई तो सेक्टर पर दबाव और बढ़ सकता है।