क्या 2026 की शुरुआत से बाजार 4 फीसदी नीचे है और एफपीआई ने 36,500 करोड़ रुपए निकाले?

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क्या 2026 की शुरुआत से बाजार 4 फीसदी नीचे है और एफपीआई ने 36,500 करोड़ रुपए निकाले?

सारांश

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक नई लहर देखी गई है। विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली और वैश्विक चिंताओं ने बाजार को प्रभावित किया है। जानिये इस गिरावट के पीछे की वजहें और आने वाले समय में क्या हो सकता है।

Key Takeaways

  • भारतीय शेयर बाजार में 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
  • विदेशी निवेशकों ने 36,500 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं।
  • सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई है।
  • बाजार में स्थायी सुधार तब होगा जब वैश्विक हालात बेहतर होंगे।
  • केंद्रीय बजट 2026 का निवेशकों पर असर पड़ेगा।

मुंबई, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई। इसकी मुख्य वजह मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताएं रही।

इस सप्ताह सभी सेक्टरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। इनमें रियल्टी सेक्टर ने सबसे अधिक गिरावट दर्ज की, जिसमें 11.33 प्रतिशत की कमी आई। इसके अलावा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम, और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर में भी 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।

हफ्ते के दौरान निफ्टी में 2.51 प्रतिशत की गिरावट आई और यह अंतिम कारोबारी दिन 0.95 प्रतिशत फिसलकर 25,048 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स भी अंतिम दिन 769 अंक यानी 0.94 प्रतिशत गिरकर 81,537 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 2.43 प्रतिशत नीचे रहा।

स्मॉल और मिडकैप शेयरों पर दबाव अधिक देखा गया, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 में 4.58 प्रतिशत, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 5.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बैंक निफ्टी भी कमजोर रहा और यह एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल 58,800 के नीचे गिर गया, जिससे बाजार में नकारात्मक संकेत मिले।

विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्ते की शुरुआत में कुछ आईटी और बैंकिंग कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों से बाजार को थोड़ी राहत मिली, लेकिन बाद में कई कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों की धारणा को फिर से कमजोर कर दिया।

दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका की तरफ से ग्रीनलैंड और टैरिफ को लेकर सख्त बयानों ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा और बिकवाली में तेजी आई।

साथ ही, वैश्विक बॉंड यील्ड में वृद्धि और अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ मामलों की समीक्षा को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को और सीमित कर दिया।

1 जनवरी 2026 से अब तक, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 36,500 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं।

इस बीच, भारतीय रुपया भी कमजोर होकर लगभग 92 रुपए प्रति डॉलर के पास पहुंच गया, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ी है।

निवेशक अब केंद्रीय बजट 2026 और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों पर ध्यान दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले कुछ समय के लिए बाजार में तेजी की एक छोटी लहर देखने को मिल सकती है, क्योंकि कई विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजिशन पहले से बनी हुई है।

हालांकि, बाजार में स्थायी सुधार तभी आएगा जब वैश्विक हालात बेहतर होंगे, कंपनियों के नतीजे अच्छे आएंगे और बजट से निवेशकों को विश्वास मिलेगा।

Point of View

मेरी राय है कि वर्तमान स्थिति में बाजार में गिरावट चिंता का विषय है। यह निवेशकों के लिए सही समय है कि वे अपने निवेश की समीक्षा करें और आने वाले केंद्रीय बजट तथा वैश्विक आर्थिक संकेतों पर ध्यान दें।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में कितनी गिरावट आई?
इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कितने करोड़ के शेयर बेचे?
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 36,500 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक चिंताएं हैं।
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