ट्विशा शर्मा दूसरा पोस्टमार्टम: एम्स-दिल्ली की टीम भोपाल पहुंची, पति समर्थ 29 मई तक पुलिस हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के चार वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम शनिवार रात भोपाल पहुंची। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर रविवार, 25 मई को एम्स भोपाल में दूसरा पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसी बीच, मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह को भोपाल की एक अदालत ने 29 मई तक सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
उच्च न्यायालय का आदेश और दूसरा पोस्टमार्टम
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ट्विशा के पिता की उस याचिका को स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने एम्स-दिल्ली के स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से नए सिरे से पोस्टमार्टम कराने की माँग की थी। पहला पोस्टमार्टम 13 मई को एम्स भोपाल में किया गया था, जिसकी रिपोर्ट पर ट्विशा के माता-पिता और भाई ने आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं।
सूत्रों के अनुसार, एम्स-दिल्ली की मेडिकल टीम पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर परिजनों की आपत्तियों के संबंध में उनसे विस्तृत चर्चा करेगी। फोरेंसिक जाँच के तहत डॉक्टरों के भोपाल स्थित ट्विशा के ससुराल जाने की भी संभावना बताई जा रही है।
समर्थ सिंह की हिरासत और कानूनी स्थिति
पेशे से वकील और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के पुत्र समर्थ सिंह को भोपाल पुलिस की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुदिता गुप्ता के समक्ष पेश किया। अदालत ने उन्हें 29 मई तक सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेजते हुए उनका पासपोर्ट भी जब्त करने का निर्देश दिया, जो उनके वकील ने तत्काल अदालत में प्रस्तुत किया।
समर्थ 15 मई से फरार थे — उसी दिन से जब कटारा हिल्स पुलिस ने उनके और उनकी माँ के खिलाफ दहेज हत्या और उत्पीड़न का मामला दर्ज किया था। भोपाल पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी में सहायक सूचना के लिए इनाम की घोषणा की थी और लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया था। अंततः शुक्रवार को जबलपुर जिला न्यायालय परिसर में आत्मसमर्पण के प्रयास के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
परिजनों की आपत्तियाँ और पहली रिपोर्ट पर विवाद
ट्विशा के परिजनों ने 13 मई को तैयार की गई पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। उनकी माँग थी कि एम्स-दिल्ली जैसे स्वतंत्र संस्थान का मेडिकल बोर्ड मामले की पुनः जाँच करे, ताकि मृत्यु के सही कारणों का पता लगाया जा सके। उच्च न्यायालय ने इस याचिका को उचित ठहराते हुए दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब दहेज से जुड़ी मौतों के मामलों में न्यायिक निगरानी और स्वतंत्र फोरेंसिक जाँच की माँग पूरे देश में बढ़ रही है। गौरतलब है कि समर्थ की माँ गिरिबाला सिंह को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि समर्थ की अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालत ने खारिज कर दी थी। दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इस मामले की आगे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
आगे क्या होगा
एम्स-दिल्ली की टीम द्वारा दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। एसआईटी समर्थ से पूछताछ के आधार पर मामले की जाँच आगे बढ़ाएगी। 29 मई को अदालत में अगली सुनवाई होने की उम्मीद है, जो इस पूरे मामले में एक और अहम पड़ाव होगा।