छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को रामावतार जग्गी हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई
सारांश
Key Takeaways
- अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
- उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटा।
- कुल 31 आरोपी थे, जिनमें अमित जोगी भी शामिल थे।
- यह मामला राजनीतिक साजिश से संबंधित है।
- राज्य में आगामी चुनावों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।
रायपुर, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने चर्चित एनसीपी नेता रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 31 मई 2007 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य सह आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।
उच्च न्यायालय ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी मानते हुए उन्हें एक हजार रुपए का अर्थदंड और आजीवन कारावास की सजा दी। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया गया, तो छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास लागू होगा। वर्तमान में जमानत पर चल रहे अमित जोगी को अदालत ने निर्देश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करें।
इस मामले में सीबीआई ने अमित जोगी और अन्य आरोपियों के बीच एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि अमित जोगी को बरी किया गया था।
इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने बाद में मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया था। वर्षों की कानूनी कार्यवाही के बाद, उच्च न्यायालय ने अब अमित जोगी को दोषी पाया है।
उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को बरी करने के निर्णय को अवैध और गलत करार दिया। अदालत ने कहा कि जिस साक्ष्य के आधार पर अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया, उसी साक्ष्य को अमित जोगी के मामले में खारिज करने का कोई ठोस कारण नहीं दिया गया।
उच्च न्यायालय ने बताया कि पूरी साजिश के मास्टरमाइंड अमित जोगी थे, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र होने के कारण प्रभावशाली स्थिति में थे।
अदालत ने यह भी कहा कि इतनी बड़े स्तर की राजनीतिक साजिश और हमलावरों की व्यवस्था बिना किसी बड़े नेतृत्व और संरक्षण के संभव नहीं थी।
शिकायतकर्ता सतीश जग्गी की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका पर अदालत ने कहा कि अब सीबीआई की अपील स्वीकार किए जाने के बाद अमित जोगी दोषी ठहराए जा चुके हैं, इसलिए सजा-वृद्धि संबंधी दूसरी याचिका निष्फल हो गई है। अदालत ने रजिस्ट्ररी को निर्देश दिया कि यह निर्णय अमित जोगी को भेजा जाए और सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार भी बताया जाए।
उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने पाया कि मई 2003 में रायपुर स्थित ग्रीन पार्क होटल और तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास में अमित जोगी समेत अन्य आरोपियों ने एनसीपी को कमजोर करने और रामावतार जग्गी को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी।
राज्य में आगामी चुनावों में इसके महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। राम अवतार जग्गी के परिवार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से प्रतीक्षित न्याय बताया। दोषी के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के विकल्प खुले हैं।