स्वरा भास्कर के जौहर बयान पर अनिरुद्धाचार्य का पलटवार, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने मथुरा में अभिनेत्री स्वरा भास्कर के फिल्म 'पद्मावत' के जौहर सीन पर दिए गए बयान को लेकर जारी विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पद्मावती जैसी महिलाओं के बलिदान की गहराई को केवल चरित्रवान व्यक्ति ही समझ सकता है। यह विवाद 4 सितंबर को उस समय और गहरा गया जब अनिरुद्धाचार्य ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
जौहर सीन पर अनिरुद्धाचार्य की प्रतिक्रिया
अनिरुद्धाचार्य ने कहा, 'पद्मावती जैसी महिलाएं पवित्र नारी थीं। उन्हें सती कहा जाता है। उन्होंने अपने सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।' उनके अनुसार इन कहानियों का मूल संदेश यह है कि जीवन से भी अधिक मूल्यवान व्यक्ति का चरित्र होता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'चरित्रवान ही चरित्रवान का सम्मान करेगा — जो चरित्रवान नहीं, वह इन बातों को समझेगा भी कैसे?'
राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर निशाना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति का हवाला देते हुए महिलाओं की पुरुषों पर निर्भरता को लेकर की गई टिप्पणी पर अनिरुद्धाचार्य ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी कभी तीन तलाक के बारे में बोलें, कभी बुर्के के बारे में बोलें, कभी हलाला के बारे में बोलें। क्या हलाला नारी का सम्मान है? उन मुद्दों पर कुछ नहीं बोलते — केवल सनातन को टारगेट करते हैं।' उनका आरोप था कि राहुल गांधी सनातन धर्म का अपमान और अनादर करते रहते हैं।
मनुस्मृति की व्याख्या पर अनिरुद्धाचार्य का तर्क
अनिरुद्धाचार्य ने मनुस्मृति के श्लोक 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते' का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी ग्रंथ में नारी की पूजा का विधान है। उन्होंने कहा, 'अब आपको बुराई ही देखनी है तो आप बुराई ही देखेंगे। समाज ने तो माता सीता में भी बुराई ढूंढ ली।' उन्होंने कबीर के दोहे का संदर्भ देते हुए कहा कि पहले अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए।
सनातन धर्म में नारी सम्मान पर वक्तव्य
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसी परंपरा है जहाँ नारी को ईश्वर का दर्जा दिया गया है — दुर्गा, सीता, राधा जैसी देवियाँ इसके प्रमाण हैं। उन्होंने तुलनात्मक रूप से कहा कि अन्य धर्मों में नारी को ईश्वर की उपाधि नहीं दी गई। उन्होंने कहा, 'जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवी-देवताओं का वास होता है और सुख-समृद्धि आती है।' उनका यह वक्तव्य धार्मिक और सांस्कृतिक बहस को और व्यापक आयाम देता है।
आगे क्या
स्वरा भास्कर के मूल बयान और अनिरुद्धाचार्य की इस प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि जौहर जैसी ऐतिहासिक परंपराओं पर बहस को तथ्यात्मक और संवेदनशील ढंग से होना चाहिए। यह देखना बाकी है कि स्वरा भास्कर या कांग्रेस की ओर से इन बयानों का कोई औपचारिक जवाब आता है या नहीं।