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स्वरा भास्कर के 'पद्मावत' बयान पर सियासी घमासान: BJP, मौलाना साजिद रशीदी और कांग्रेस की अलग-अलग राय

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स्वरा भास्कर के 'पद्मावत' बयान पर सियासी घमासान: BJP, मौलाना साजिद रशीदी और कांग्रेस की अलग-अलग राय

सारांश

स्वरा भास्कर का 'पद्मावत' के जौहर दृश्य पर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़े विवाद में बदल गया। BJP विधायकों से लेकर मौलाना साजिद रशीदी और कांग्रेस सांसद तक — सभी ने अलग-अलग नजरिए से प्रतिक्रिया दी। यह बहस इतिहास, सिनेमाई जिम्मेदारी और नारी सम्मान के गहरे सवालों को एक बार फिर सामने ले आई है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 'पद्मावत' के जौहर दृश्य पर अपना नजरिया रखा, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
कुछ लोगों ने दावा किया कि स्वरा ने जौहर करने वाली महिलाओं को 'कायर' कहा; स्वरा ने वीडियो जारी कर इसका खंडन किया।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि फिल्म का संदेश यह देता है कि रेप सर्वाइवर 'बुजदिल' है — यह दुखद है।
BJP विधायक गोपाल शर्मा और नेता शाजिया इल्मी ने स्वरा की कड़ी आलोचना की।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर और पूर्व राज्यसभा सांसद मजीद मेमन ने स्वरा के बयान के संदर्भ को समझने की अपील की।
वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को उनके समय और आज के नजरिए से अलग-अलग देखना जरूरी है।

अभिनेत्री स्वरा भास्कर के फिल्म 'पद्मावत' में दिखाए गए जौहर दृश्य पर दिए गए बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। 31 अगस्त को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'वुमन लाइफ फ्रीडम टॉक' कार्यक्रम में दिए गए उनके बयान का एक अंश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद कुछ लोगों ने दावा किया कि स्वरा ने जौहर करने वाली महिलाओं और रानी पद्मावती को 'कायर' कहा। विवाद गहराने पर स्वरा ने स्वयं वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया।

स्वरा भास्कर ने क्या कहा था

कार्यक्रम में स्वरा से 2018 में 'पद्मावत' को लेकर लिखे गए उनके खुले खत के बारे में पूछा गया था। उन्होंने कहा, 'जब मैं फिल्म का वह दृश्य देख रही थी जिसमें सभी 800 महिलाएं जौहर करती हैं, तो मैंने सोचा कि अगर मैं रेप सर्वाइवर होती तो यह फिल्म मुझे क्या संदेश दे रही है? मैं कायर जैसा महसूस करती कि मैंने अपनी जान नहीं ली। क्या हम अपनी रेप सर्वाइवर्स को यह कहना चाहते हैं कि आपको जीने का अधिकार नहीं है?' उन्होंने यह भी जोड़ा कि बलात्कार एक सामाजिक महामारी की तरह फैल रहा है और ऐसे में फिल्मों के संदेश की जिम्मेदारी बनती है।

मौलाना साजिद रशीदी की प्रतिक्रिया

मौलाना साजिद रशीदी ने इस विवाद पर कहा कि 'पद्मावत' की कहानी को मलिक मोहम्मद जायसी ने कई सदियों बाद लिखा था, इसलिए इसे पूरी तरह ऐतिहासिक सत्य मानना स्वयं में एक बड़ा सवाल है। उन्होंने आगे कहा, 'अगर कोई दुष्कर्म या हत्या के डर से खुदकुशी करता है तो उस घटना को बहादुरी से जोड़ना उचित नहीं है। फिल्म के जरिए समाज में यह संदेश जाता है कि जो महिला दुष्कर्म के बाद भी जीवित है, वह बुजदिल है — यह बेहद दुखद है।' उन्होंने सेंसर बोर्ड से ऐसी कहानियों को प्रोत्साहित न करने की अपील भी की।

कानूनी और कांग्रेसी नजरिया

मुंबई में वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद मजीद मेमन ने स्वरा के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनका आशय यह था कि किसी गंभीर अपराध का सामना करने के बाद पीड़ित को कानूनी दायरे में लड़ना चाहिए, न कि जान देनी चाहिए। उन्होंने स्वरा को एक सामाजिक मुद्दों पर मुखर कलाकार बताया।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि पुरानी परंपराओं को उनके समय और आज के दौर के नजरिए से अलग-अलग समझना जरूरी है। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज में बदलाव की यह प्रक्रिया सतत चलती रहती है।

भाजपा नेताओं की तीखी आलोचना

जयपुर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक गोपाल शर्मा ने स्वरा पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे लोगों को देश की परंपराओं और भावनाओं की समझ नहीं है। भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कहा, 'कम जानकारी खतरनाक होती है और स्वरा के बयान से साफ जाहिर होता है कि उन्हें इतिहास की कितनी समझ है।'

जयपुर में वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि जिस दौर में वीरांगनाओं ने जौहर किया, उस समय की परिस्थितियां आज से बिल्कुल भिन्न थीं। उन्होंने कहा, 'आज का समाज न सती प्रथा का समर्थन करता है और न जौहर का, लेकिन इतिहास में जो हुआ उसे आज के नजरिए से सीधे गलत ठहराना भी उचित नहीं।'

विवाद का आगे का रुख

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब फिल्मों में ऐतिहासिक घटनाओं के चित्रण और उनके सामाजिक संदेश को लेकर बहस पहले से ही जारी है। स्वरा भास्कर के बयान पर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि इतिहास, नारी सम्मान और सिनेमाई जिम्मेदारी के सवाल अभी भी भारतीय समाज में गहराई से उलझे हुए हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और व्यापक रूप ले सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे खुद इस बहस की जटिलता को उजागर करती हैं — एक तरफ BJP नेता इसे राष्ट्र-विरोधी बता रहे हैं, दूसरी तरफ मौलाना साजिद रशीदी जैसे धार्मिक नेता भी फिल्म के संदेश पर सवाल उठा रहे हैं, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नजरअंदाज होता है। असली सवाल यह नहीं है कि स्वरा ने क्या कहा, बल्कि यह है कि क्या भारतीय सिनेमा ऐतिहासिक घटनाओं को महिमामंडित करते समय आज के सामाजिक संदर्भ की जिम्मेदारी लेता है। बयान को संदर्भ से काटकर वायरल करने की प्रवृत्ति और उस पर राजनीतिक ध्रुवीकरण — दोनों मिलकर असली बहस को दबा देते हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वरा भास्कर ने 'पद्मावत' को लेकर आखिर क्या कहा था?
स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कहा कि फिल्म का जौहर दृश्य एक रेप सर्वाइवर को यह संदेश दे सकता है कि जीवित रहना 'कायरता' है। उन्होंने यह बात फिल्म के सामाजिक संदेश की आलोचना के संदर्भ में कही थी, न कि जौहर करने वाली महिलाओं को सीधे 'कायर' बताने के लिए।
मौलाना साजिद रशीदी ने इस विवाद पर क्या कहा?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि 'पद्मावत' की कहानी को मलिक मोहम्मद जायसी ने कई सदियों बाद लिखा था, इसलिए इसे पूरा ऐतिहासिक सत्य मानना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म का संदेश यह देता है कि रेप सर्वाइवर 'बुजदिल' है, जो बेहद दुखद है और सेंसर बोर्ड को ऐसी कहानियों को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।
BJP नेताओं ने स्वरा भास्कर के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि स्वरा भास्कर को देश की परंपराओं और भावनाओं की समझ नहीं है। BJP नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि स्वरा के बयान से उनकी इतिहास की सीमित समझ जाहिर होती है।
कांग्रेस ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को उनके समय और आज के नजरिए से अलग-अलग समझना जरूरी है। पूर्व राज्यसभा सांसद मजीद मेमन ने स्वरा का बचाव करते हुए कहा कि उनका आशय यह था कि अपराध के बाद पीड़ित को कानूनी दायरे में लड़ना चाहिए।
क्या स्वरा भास्कर ने अपने बयान पर सफाई दी?
हाँ, विवाद बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर ने स्वयं एक वीडियो जारी कर अपने बयान का मतलब स्पष्ट किया और कहा कि उन्होंने जौहर करने वाली महिलाओं को 'कायर' नहीं कहा था। उनका कहना था कि बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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