वंदे मातरम विवाद: भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा बोले — नेहरू न मिटा सके RSS, पवन खेड़ा क्या करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने 11 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन के 'वंदे मातरम' संबंधी बयान और कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर की गई टिप्पणी — दोनों पर एक साथ तीखा पलटवार किया। मिश्रा ने कहा कि जब जवाहरलाल नेहरू भी RSS को समाप्त नहीं कर सके, तो खेड़ा की यह घोषणा खोखली है।
वंदे मातरम पर भाजपा का पलटवार
भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा, 'उन दो छंदों को गाना कांग्रेस का मुस्लिम लीग के सामने आत्मसमर्पण था। आज भारत एक आजाद देश है। इस देश में लाखों लोग स्वतंत्रता आंदोलन में 'वंदे मातरम' गाते हुए शहीद हुए थे। कांग्रेस पार्टी ने खुद 'वंदे मातरम' गाते हुए एक आंदोलन चलाया था। इसलिए, ऐसा कुछ कहना पूरी तरह से देश विरोधी बयान है। इससे शहीदों की आत्मा को बहुत ठेस पहुंचेगी।'
यह ऐसे समय में आया है जब सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने लाल किले से 'वंदे मातरम' के पूर्ण गायन को देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर आघात बताया था। सुमन का तर्क था कि संविधान सभा में सर्वसम्मति से केवल दो छंद तय किए गए थे, ताकि सभी धर्मों के नागरिक इसे गा सकें, और अब इसे जबरन थोपना एक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है।
RSS पर पवन खेड़ा के बयान का जवाब
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान कहा था कि उनकी सरकार आने पर RSS को समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि भाजपा ने युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को घुसाया है।
इस पर भाजपा सांसद मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा, 'नेहरू जी ने भी एक बार कहा था कि वह RSS को खत्म कर देंगे। उन्हें कोशिश करते रहने दें, लेकिन उनकी कोशिशों के बावजूद RSS दुनिया का सबसे बड़ा वॉलंटियर संगठन बनकर उभरा है और काम कर रहा है। जब नेहरू में भी RSS को खत्म करने की ताकत नहीं थी, तो वे ऐसा कैसे कर सकते हैं?'
झारखंड और इस्कॉन पर खेड़ा के अन्य बयान
खेड़ा ने झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को दबाया नहीं जाना चाहिए। इस्कॉन मंदिर के ड्रेस कोड विवाद पर उन्होंने कहा कि यह उनकी निजी व्यवस्था है और परंपराओं के अनुकूल लिया गया निर्णय है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' और RSS को लेकर यह विवाद संसद सत्र के बाहर सार्वजनिक मंचों पर तेज़ होता दिख रहा है। विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों और संगठनों की भूमिका पर यह तकरार आने वाले समय में और गहरी हो सकती है।