26 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजा राममोहन राय पुण्यतिथि: सती प्रथा समाप्त कराने वाले समाज सुधारक को 27 सितंबर को देश कर रहा याद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजा राममोहन राय पुण्यतिथि: सती प्रथा समाप्त कराने वाले समाज सुधारक को 27 सितंबर को देश कर रहा याद

सारांश

27 सितंबर 1833 को ब्रिस्टल में निधन से पहले राजा राममोहन राय ने वह कर दिखाया जो किसी ने नहीं सोचा था — 1829 में सती प्रथा को कानूनन अपराध घोषित करवाया, ब्रह्म समाज खड़ा किया, और बहुभाषी पत्रकारिता की नींव रखी। आधुनिक भारत के हर प्रगतिशील मूल्य में उनकी विरासत जीवित है।

मुख्य बातें

राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के ब्राह्मण परिवार में हुआ; निधन 27 सितंबर 1833 को ब्रिस्टल, इंग्लैंड में।
1829 में लॉर्ड विलियम बेंटिक द्वारा सती प्रथा को कानूनन अपराध घोषित करवाने में उनकी निर्णायक भूमिका रही।
1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जो एकेश्वरवाद और सामाजिक समानता पर आधारित था।
मात्र 15 वर्ष की आयु तक बंगाली, संस्कृत, अरबी और फारसी भाषाओं में दक्षता प्राप्त की।
'बंगदूत' सहित चार प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया; बांग्ला, हिंदी और फारसी में एक साथ प्रकाशन।
मुगल सम्राट द्वारा 'राजा' की उपाधि से सम्मानित; इंग्लैंड और फ्रांस यात्रा करने वाले पहले भारतीयों में से एक।

राजा राममोहन राय — जिन्हें आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है — की पुण्यतिथि 27 सितंबर को मनाई जाती है। 27 सितंबर 1833 को ब्रिस्टल, इंग्लैंड में उनका निधन हुआ था। उन्होंने एक साथ दो मोर्चों पर संघर्ष किया — औपनिवेशिक शासन की नीतियों के विरुद्ध और भारतीय समाज में गहरी जड़ें जमाए कुरीतियों के खिलाफ। आज उनकी पुण्यतिथि पर देश उस महान विभूति को श्रद्धा से नमन कर रहा है।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता रमाकांत राय और माता तारिणी देवी थीं। असाधारण मेधा के धनी राममोहन राय ने मात्र 15 वर्ष की आयु तक बंगाली, संस्कृत, अरबी और फारसी भाषाओं पर पूर्ण अधिकार प्राप्त कर लिया था। किशोरावस्था में उन्होंने देशभर की यात्राएँ कीं, जिससे उन्हें समाज की तह में जाकर उसकी विषमताओं को समझने का अवसर मिला।

1809 से 1814 तक उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन कार्य किया। लेकिन जल्द ही उन्होंने नौकरी त्याग दी और अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र-सेवा और समाज-सुधार को समर्पित कर दिया। यहीं से उनके जीवन का सबसे निर्णायक अध्याय आरंभ हुआ।

सती प्रथा उन्मूलन: सबसे ऐतिहासिक योगदान

उस दौर में भारतीय समाज बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड और पर्दा प्रथा जैसी बुराइयों की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। राय ने इन अमानवीय परंपराओं को निर्भीकता से चुनौती दी। उनका सर्वाधिक चर्चित और स्थायी योगदान सती प्रथा के उन्मूलन में रहा। उन्होंने इस क्रूर प्रथा के विरुद्ध अनवरत आंदोलन चलाया, जिसके फलस्वरूप 1829 में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को कानूनन अपराध घोषित किया।

इस साहसिक अभियान के दौरान उन्हें रूढ़िवादी वर्ग के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि उनके अपने परिवार में भी इस प्रथा का सामना हुआ था, जिसने उनके संकल्प को और दृढ़ किया।

ब्रह्म समाज की स्थापना और शैक्षिक सुधार

1828 में राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना की, जो एकेश्वरवाद के सिद्धांत पर आधारित था और मूर्ति-पूजा का विरोध करता था। यह संस्था भारतीय नवजागरण की आधारशिला बनी। उनके सबसे प्रमुख अनुयायियों में देवेंद्रनाथ टैगोर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

1825 में उन्होंने वेदांत विश्वविद्यालय की स्थापना की और अंग्रेजी शिक्षा, आधुनिक चिकित्सा तथा विज्ञान के अध्ययन को प्रोत्साहित किया। वे भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक भी थे। यह ऐसे समय में आया जब उपनिवेशवाद के दबाव में भारतीय परंपरागत ज्ञान-तंत्र कमज़ोर पड़ रहा था।

पत्रकारिता में अग्रणी भूमिका

राजा राममोहन राय महज समाज-सुधारक नहीं थे — वे एक निर्भीक पत्रकार भी थे। उन्होंने 'ब्रह्ममैनिकल मैग्जीन', 'संवाद कौमुदी', 'मिरात-उल-अखबार' और 'बंगदूत' जैसे महत्वपूर्ण पत्रों का संपादन एवं प्रकाशन किया। 'बंगदूत' अपने समय का अनूठा प्रकाशन था, जिसमें एक साथ बांग्ला, हिंदी और फारसी तीन भाषाओं का प्रयोग किया जाता था।

1821 में जब एक अंग्रेज जज ने भारतीय नागरिक प्रताप नारायण दास को कोड़ों की सजा सुनाई और उसकी मृत्यु हो गई, तो राय ने इस बर्बरता के विरुद्ध बेबाक लेख लिखा। उन्होंने स्वतंत्रता-संघर्ष और पत्रकारिता को एक-दूसरे का पूरक बनाया।

विरासत और प्रासंगिकता

मुगल सम्राट ने उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें 'राजा' की उपाधि दी। वे इंग्लैंड और फ्रांस की यात्रा करने वाले पहले भारतीयों में से थे। 27 सितंबर 1833 को ब्रिस्टल, इंग्लैंड में उनका निधन हुआ — परंतु उनके विचार आज भी भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों में जीवित हैं।

आज जब हम वैज्ञानिक सोच, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित भारत की कल्पना करते हैं, तो उसकी बुनियाद में राजा राममोहन राय की दृष्टि और संघर्ष की छाप स्पष्ट दिखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों को एक साथ चुनौती दी, जबकि उस दौर में अधिकांश सुधारक किसी एक मोर्चे पर ही लड़ते थे। ब्रह्म समाज का एकेश्वरवाद और बहुभाषी पत्रकारिता का प्रयोग — ये सब बताते हैं कि वे आधुनिकता को पश्चिम की नकल के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय तर्कबुद्धि के विस्तार के रूप में देखते थे। आज जब सामाजिक सुधार की बहसें फिर तीखी हो रही हैं, तो राय का यह मॉडल — संवाद, लेखन और कानूनी अभियान का समन्वय — उतना ही प्रासंगिक है जितना 19वीं सदी में था।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि कब है?
राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि 27 सितंबर को मनाई जाती है। 27 सितंबर 1833 को ब्रिस्टल, इंग्लैंड में उनका निधन हुआ था।
राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को समाप्त कराने में क्या भूमिका निभाई?
राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया, जिसके फलस्वरूप 1829 में गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने इसे कानूनन अपराध घोषित किया। इस अभियान में उन्हें रूढ़िवादी वर्ग के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा।
ब्रह्म समाज की स्थापना कब और क्यों की गई?
1828 में राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना की। यह संस्था एकेश्वरवाद पर आधारित थी, मूर्ति-पूजा का विरोध करती थी और सामाजिक समानता को बढ़ावा देती थी।
राजा राममोहन राय को 'राजा' की उपाधि कैसे मिली?
मुगल सम्राट ने राजा राममोहन राय के समाज-सुधार कार्यों और विद्वत्ता से प्रभावित होकर उन्हें 'राजा' की उपाधि दी थी। वे इंग्लैंड और फ्रांस की यात्रा करने वाले पहले भारतीयों में से भी थे।
राजा राममोहन राय ने किन पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन किया?
उन्होंने 'ब्रह्ममैनिकल मैग्जीन', 'संवाद कौमुदी', 'मिरात-उल-अखबार' और 'बंगदूत' का संपादन-प्रकाशन किया। 'बंगदूत' विशेष रूप से उल्लेखनीय था क्योंकि उसमें बांग्ला, हिंदी और फारसी तीनों भाषाओं का एक साथ प्रयोग होता था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले