राजा राममोहन राय पुण्यतिथि 2026: गडकरी, योगी, धामी समेत कई नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
राजा राममोहन राय की 27 सितंबर 2026 को पड़ने वाली पुण्यतिथि पर देशभर के केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। ब्रह्म समाज के संस्थापक और भारतीय नवजागरण के अग्रदूत राय को सती प्रथा के उन्मूलन, महिला सशक्तीकरण और आधुनिक शिक्षा के प्रसार में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए याद किया गया।
केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत के सामाजिक और धार्मिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में राजा राममोहन राय का विशिष्ट स्थान है। उन्होंने कहा, 'उनकी पत्रकारिता ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों को सही दिशा दिखाने का कार्य किया।'
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने राय को 'भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत' बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के लिए जो कार्य किया वह अतुलनीय है। उनके अनुसार, राय के कल्याणकारी विचारों और दूरदर्शिता ने समाज को अंधविश्वास तथा कुरीतियों से मुक्त कराने में अद्वितीय भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्रियों ने किया नमन
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सती प्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष से लेकर नारी सम्मान और आधुनिक शिक्षा के प्रसार तक, राय ने समाज को रूढ़ियों से निकालकर नई चेतना और प्रगति की राह दिखाई।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्म समाज की स्थापना के साथ राष्ट्र निर्माण के प्रति राय का दृष्टिकोण और प्रगतिशील चिंतन सभी के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने राय को 'सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और महिला सशक्तीकरण का संवाहक' बताया।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए राय को 'शत्-शत् नमन' अर्पित किया और कहा कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध उनका संघर्ष और समाज में जागरूकता के लिए किए गए प्रयास सदैव प्रेरणादायी रहेंगे।
राजस्थान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों का संदेश
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सती प्रथा के उन्मूलन, स्त्री शिक्षा के प्रसार और आधुनिक विचारों की नींव रखने में राय का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि रूढ़िवादिता को समाप्त कर समाज में समता और तार्किकता स्थापित करने वाले उनके विचार आज भी समतामूलक व प्रगतिशील समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राय को 'सामाजिक एवं धार्मिक नवजागरण का अग्रदूत' बताते हुए कहा कि महिला अधिकारों, शिक्षा एवं सामाजिक समानता के लिए उनके अथक प्रयासों ने भारतीय समाज में नई चेतना का संचार किया।
राजा राममोहन राय का ऐतिहासिक योगदान
गौरतलब है कि राजा राममोहन राय को आधुनिक भारत का जनक माना जाता है। उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की और 1829 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक के सहयोग से सती प्रथा उन्मूलन कानून पारित कराने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह ऐसे समय में आया है जब सामाजिक सुधारों की विरासत पर राष्ट्रीय विमर्श फिर से केंद्र में आ रहा है।
राय की पुण्यतिथि हर वर्ष देश को यह स्मरण कराती है कि सामाजिक बदलाव के लिए व्यक्तिगत साहस और संस्थागत प्रयासों का संयोजन कितना आवश्यक है — और उनकी विरासत आज भी नीति-निर्माताओं एवं समाज-सुधारकों के लिए दिशासूचक बनी हुई है।