27 सितंबर 2026
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राजा राममोहन राय पुण्यतिथि 2026: गडकरी, योगी, धामी समेत कई नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

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राजा राममोहन राय पुण्यतिथि 2026: गडकरी, योगी, धामी समेत कई नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

सारांश

राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें नमन किया। सती प्रथा उन्मूलन और ब्रह्म समाज की स्थापना की विरासत को याद करते हुए नेताओं ने कहा — उनके सुधार आज भी समाज को दिशा देते हैं।

मुख्य बातें

27 सितंबर 2026 को राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि पर देशभर के केंद्रीय मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट कर राय की पत्रकारिता और सामाजिक-धार्मिक पुनर्जागरण में भूमिका को याद किया।
योगी आदित्यनाथ , रेखा गुप्ता , भजनलाल शर्मा और पुष्कर सिंह धामी ने राय को महिला अधिकार, शिक्षा और समाज सुधार का अग्रदूत बताया।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर राय को 'शत्-शत् नमन' करते हुए उनके कुरीति-विरोधी संघर्ष को अनुकरणीय बताया।
राय ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की और 1829 में सती प्रथा उन्मूलन कानून पारित कराने में निर्णायक भूमिका निभाई।

राजा राममोहन राय की 27 सितंबर 2026 को पड़ने वाली पुण्यतिथि पर देशभर के केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। ब्रह्म समाज के संस्थापक और भारतीय नवजागरण के अग्रदूत राय को सती प्रथा के उन्मूलन, महिला सशक्तीकरण और आधुनिक शिक्षा के प्रसार में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए याद किया गया।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत के सामाजिक और धार्मिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में राजा राममोहन राय का विशिष्ट स्थान है। उन्होंने कहा, 'उनकी पत्रकारिता ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों को सही दिशा दिखाने का कार्य किया।'

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने राय को 'भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत' बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के लिए जो कार्य किया वह अतुलनीय है। उनके अनुसार, राय के कल्याणकारी विचारों और दूरदर्शिता ने समाज को अंधविश्वास तथा कुरीतियों से मुक्त कराने में अद्वितीय भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्रियों ने किया नमन

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सती प्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष से लेकर नारी सम्मान और आधुनिक शिक्षा के प्रसार तक, राय ने समाज को रूढ़ियों से निकालकर नई चेतना और प्रगति की राह दिखाई।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्म समाज की स्थापना के साथ राष्ट्र निर्माण के प्रति राय का दृष्टिकोण और प्रगतिशील चिंतन सभी के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने राय को 'सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और महिला सशक्तीकरण का संवाहक' बताया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए राय को 'शत्-शत् नमन' अर्पित किया और कहा कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध उनका संघर्ष और समाज में जागरूकता के लिए किए गए प्रयास सदैव प्रेरणादायी रहेंगे।

राजस्थान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों का संदेश

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सती प्रथा के उन्मूलन, स्त्री शिक्षा के प्रसार और आधुनिक विचारों की नींव रखने में राय का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि रूढ़िवादिता को समाप्त कर समाज में समता और तार्किकता स्थापित करने वाले उनके विचार आज भी समतामूलक व प्रगतिशील समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राय को 'सामाजिक एवं धार्मिक नवजागरण का अग्रदूत' बताते हुए कहा कि महिला अधिकारों, शिक्षा एवं सामाजिक समानता के लिए उनके अथक प्रयासों ने भारतीय समाज में नई चेतना का संचार किया।

राजा राममोहन राय का ऐतिहासिक योगदान

गौरतलब है कि राजा राममोहन राय को आधुनिक भारत का जनक माना जाता है। उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की और 1829 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक के सहयोग से सती प्रथा उन्मूलन कानून पारित कराने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह ऐसे समय में आया है जब सामाजिक सुधारों की विरासत पर राष्ट्रीय विमर्श फिर से केंद्र में आ रहा है।

राय की पुण्यतिथि हर वर्ष देश को यह स्मरण कराती है कि सामाजिक बदलाव के लिए व्यक्तिगत साहस और संस्थागत प्रयासों का संयोजन कितना आवश्यक है — और उनकी विरासत आज भी नीति-निर्माताओं एवं समाज-सुधारकों के लिए दिशासूचक बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि जिस पार्टी के नेता सबसे मुखर होकर राय को याद कर रहे हैं, उसी की सरकारों में सामाजिक समानता और महिला शिक्षा से जुड़े कई संस्थागत सुधारों की गति पर सवाल उठते रहे हैं। असली श्रद्धांजलि शब्दों में नहीं, नीतियों में होती है — और राय की विरासत इस कसौटी पर हर सरकार को परखती है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा राममोहन राय कौन थे और उनका योगदान क्या है?
राजा राममोहन राय आधुनिक भारत के जनक और ब्रह्म समाज के संस्थापक थे, जिन्होंने 1828 में इस समाज सुधार आंदोलन की नींव रखी। उन्होंने 1829 में सती प्रथा उन्मूलन कानून पारित कराने में निर्णायक भूमिका निभाई और महिला शिक्षा तथा आधुनिक विचारों के प्रसार के लिए अथक प्रयास किए।
राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि कब है?
राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष 27 सितंबर को मनाई जाती है। इस वर्ष 27 सितंबर 2026 को उनकी पुण्यतिथि पर देशभर के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
ब्रह्म समाज की स्थापना कब और किसने की?
ब्रह्म समाज की स्थापना राजा राममोहन राय ने 1828 में की थी। यह संस्था भारतीय समाज से कुरीतियों को दूर करने और तार्किक व आधुनिक विचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
किन नेताओं ने 2026 में राममोहन राय को श्रद्धांजलि दी?
27 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मनोहर लाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
राजा राममोहन राय की विरासत आज भी क्यों प्रासंगिक है?
राय ने सती प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों की वकालत की और आधुनिक तार्किक सोच को बढ़ावा दिया — ये मुद्दे आज भी भारतीय समाज में पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। नेताओं का मानना है कि उनके विचार समतामूलक और प्रगतिशील समाज के निर्माण में आज भी दिशादर्शक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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