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चौधरी चरण सिंह पुण्यतिथि: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, अमित शाह और नितिन गडकरी ने किसान नेता को दी श्रद्धांजलि

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चौधरी चरण सिंह पुण्यतिथि: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, अमित शाह और नितिन गडकरी ने किसान नेता को दी श्रद्धांजलि

सारांश

भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उपराष्ट्रपति से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी। उनके परपोते और केंद्रीय मंत्री जयंत सिंह चौधरी ने उन्हें 'लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति' का प्रतीक बताया। किसान राजनीति के इस स्तंभ की विरासत आज भी ग्रामीण भारत की नीतियों में दिखती है।

मुख्य बातें

29 मई 2026 को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
राधाकृष्णन , गृहमंत्री अमित शाह , लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला , कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने एक्स पर संदेश साझा किए।
परपोते और आरएलडी प्रमुख जयंत सिंह चौधरी ने उन्हें 'लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति' का प्रतीक बताया।
चरण सिंह जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे और ऋण मुक्ति विधेयक (1939) व भूमि धारण अधिनियम (1960) के सूत्रधार थे।
उनका जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में हुआ था और 1987 में निधन हुआ।

भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर 29 मई 2026 को देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और कई केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। किसानों के अधिकारों और ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए समर्पित इस दूरदर्शी नेता की विरासत आज भी देश की नीतियों और राजनीति में प्रासंगिक मानी जाती है।

उपराष्ट्रपति और गृहमंत्री की श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक्स पर लिखा, 'पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। दूरदर्शी नेता और किसानों के अथक हिमायती, उन्होंने अपना जीवन कृषि समुदाय के कल्याण और ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और किसान समुदायों के सशक्तीकरण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को सदा याद रखा जाएगा।'

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न चौधरी चरण सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल तक लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने समृद्ध किसान और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था का विकास मॉडल प्रस्तुत कर भारत को नई दिशा दी। ईमानदारी, सादगी और किसान हितों के प्रति समर्पित चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि वंदन।'

संसद और मंत्रिमंडल के अन्य नेताओं के संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का सम्पूर्ण जीवन देश के किसानों, श्रमिकों और गाँवों के उत्थान के लिए समर्पित था और देश उनके योगदान को सदैव कृतज्ञता के साथ याद करता रहेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, 'किसानों के मसीहा चौधरी साहब का स्पष्ट विचार था कि देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं खलिहानों से होकर गुजरता है। विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनके विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे।'

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसानों के प्रति चौधरी चरण सिंह का अटूट समर्पण आज भी 'अन्नदाता' के सम्मान और समृद्ध भारत के संकल्प को साकार करने की प्रेरणा देता है।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें 'किसानों की आवाज़ बुलंद करने वाले प्रखर नेता' बताते हुए एक्स पर श्रद्धांजलि दी।

पोते जयंत चौधरी का भावपूर्ण नमन

आरएलडी (राष्ट्रीय लोक दल) प्रमुख और केंद्रीय मंतत्री जयंत सिंह चौधरी ने अपने परदादा को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'किसान मसीहा चौधरी साहब ने भारतीय राजनीति को सत्ता-केंद्रित सोच से निकालकर गांव, खेत, खलिहान और श्रमशील भारत की आकांक्षाओं से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने किसान, श्रमिक और वंचित वर्ग के सम्मान को केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति माना।' भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी उन्हें 'शत्-शत् नमन' अर्पित किया।

चौधरी चरण सिंह: किसान राजनीति के स्तंभ

चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ था। विज्ञान और विधि की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से राजनीतिक जीवन आरंभ किया और 1937 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। उन्होंने 1970 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला।

वे ऋण मुक्ति विधेयक (1939) और भूमि धारण अधिनियम (1960) जैसे ऐतिहासिक भूमि सुधारों के सूत्रधार थे। जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। 1987 में उनका निधन हुआ। उनकी विरासत आज भी ग्रामीण भारत की राजनीतिक चेतना में जीवित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक रूप से भी सुविचारित है — उत्तर प्रदेश और पश्चिमी भारत के जाट-किसान मतदाताओं तक संदेश पहुँचाने की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि जयंत सिंह चौधरी की आरएलडी अब भाजपा के साथ गठबंधन में है, इसलिए परदादा की विरासत को केंद्र में रखना दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी है। हालाँकि, चरण सिंह के भूमि सुधार और किसान-केंद्रित अर्थव्यवस्था के विचारों की तुलना में मौजूदा कृषि नीतियों की जमीनी हकीकत पर बहस अभी भी जारी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौधरी चरण सिंह कौन थे और उनकी विरासत क्यों महत्वपूर्ण है?
चौधरी चरण सिंह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित किसान नेता थे, जिन्होंने जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक प्रधानमंत्री पद संभाला। उन्होंने ऋण मुक्ति विधेयक और भूमि धारण अधिनियम जैसे ऐतिहासिक कृषि सुधारों के जरिए ग्रामीण भारत को नई दिशा दी।
29 मई को चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और आरएलडी प्रमुख जयंत सिंह चौधरी ने एक्स पर श्रद्धांजलि संदेश साझा किए।
चौधरी चरण सिंह के प्रमुख योगदान क्या थे?
उन्होंने 1939 में ऋण मुक्ति विधेयक और 1960 में भूमि धारण अधिनियम के जरिए किसानों को ज़मींदारी से मुक्ति दिलाई। वे कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के प्रबल समर्थक थे और उनका मानना था कि देश की समृद्धि का मार्ग गांवों के खेतों से होकर गुजरता है।
जयंत सिंह चौधरी का चौधरी चरण सिंह से क्या संबंध है?
जयंत सिंह चौधरी, चौधरी चरण सिंह के परपोते हैं और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के प्रमुख तथा केंद्रीय मंत्री हैं। उन्होंने पुण्यतिथि पर अपने परदादा को 'भारतीय ग्रामीण चेतना को वैचारिक आधार देने वाले दूरदर्शी राष्ट्रनेता' बताया।
चौधरी चरण सिंह का जन्म और निधन कब हुआ था?
चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में हुआ था और 1987 में उनका निधन हुआ। उन्होंने 1937 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुनाव जीता था।
राष्ट्र प्रेस
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