वी.वी. गिरि की पुण्यतिथि: शिवराज सिंह चौहान, भजनलाल शर्मा समेत कई नेताओं ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
भारत रत्न एवं देश के चौथे राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकट गिरि (वी.वी. गिरि) की पुण्यतिथि पर 24 जून को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रमिक अधिकारों के प्रबल पैरोकार रहे गिरि को 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से विभूषित किया गया था।
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों के संदेश
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा, 'महान स्वतंत्रता सेनानी, देश के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न वी.वी. गिरि की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन करता हूं। राष्ट्र व समाज सेवा के साथ श्रमिकों के जीवन में उजाला लाने वाले एक सच्चे नायक के रूप में आपको सदैव याद किया जाएगा।'
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट किया, 'महान स्वतंत्रता सेनानी, भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न वी.वी. गिरि की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन! श्रमिक कल्याण, राष्ट्र निर्माण और लोकतंत्र को मजबूत करने में उनका अतुलनीय योगदान देश हमेशा याद रखेगा। उनके विचार और आदर्श हमारे लिए सदैव प्रेरणापुंज रहेंगे।'
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, 'देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकट गिरि की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि एवं सादर नमन।'
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक्स पर लिखा, 'भारत रत्न एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरि की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और श्रमिकों के अधिकारों के लिए उनके प्रयासों को देश हमेशा याद रखेगा।'
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने भी एक्स पर लिखा, 'भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न वी.वी. गिरि की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। श्रमिक अधिकारों के प्रबल पक्षधर और राष्ट्रहित के लिए समर्पित आपका जीवन देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।' बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें 'प्रखर वक्ता, प्रसिद्ध लेखक एवं कुशल राजनीतिज्ञ' कहकर नमन किया।
वी.वी. गिरि का जीवन और योगदान
वराहगिरि वेंकट गिरि भारत के चौथे राष्ट्रपति थे और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने श्रमिक आंदोलनों और ट्रेड यूनियनों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे संगठित मज़दूर वर्ग को नई दिशा मिली।
वे देश के श्रम मंत्री, विभिन्न राज्यों के राज्यपाल और उपराष्ट्रपति के रूप में भी राष्ट्र सेवा में रहे। सार्वजनिक जीवन में उनके बहुआयामी योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 1975 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
श्रमिक अधिकारों की विरासत
गिरि की विरासत आज भी प्रासंगिक है — वे उस दौर में श्रमिक अधिकारों के लिए खड़े हुए जब संगठित मज़दूर आंदोलन अपनी जड़ें जमा रहा था। यह ऐसे समय में स्मरणीय है जब श्रम सुधारों पर राष्ट्रीय बहस जारी है। गौरतलब है कि वे उन विरले नेताओं में से थे जिन्होंने राजनीतिक और श्रमिक — दोनों मोर्चों पर समान रूप से काम किया।
राष्ट्रीय स्मरण का संदेश
विभिन्न दलों और राज्यों के नेताओं का एक साथ श्रद्धांजलि देना यह दर्शाता है कि वी.वी. गिरि की स्वीकार्यता दलगत सीमाओं से परे थी। उनकी पुण्यतिथि पर यह सामूहिक स्मरण उनकी राष्ट्रीय विरासत को पुनः रेखांकित करता है।