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क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि को श्रद्धांजलि दी?

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क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि को श्रद्धांजलि दी?

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दिन उनके योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। जानिए वीवी गिरि के जीवन और काम के बारे में अधिक जानकारी।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीवी गिरि को श्रद्धांजलि अर्पित की।
वीवी गिरि का जन्म 10 अगस्त 1894 को हुआ था।
वे भारतीय श्रमिक आंदोलनों के प्रमुख नेता थे।
महात्मा गांधी से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
उन्होंने ट्रेड यूनियन आंदोलन को मजबूत किया।

नई दिल्ली, 10 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में वीवी गिरि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया।

भारत के राष्ट्रपति की आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा गया, "राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।"

देश के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण नेता और श्रमिक आंदोलनों का प्रमुख चेहरा थे। उनका जन्म 10 अगस्त 1894 को ओडिशा के बेरहामपुर में हुआ था। एक शिक्षित और जागरूक परिवार में जन्म लेने के कारण गिरि का प्रारंभिक जीवन से ही शिक्षा और राजनीति की ओर झुकाव था।

उनकी शिक्षा डबलिन, आयरलैंड में हुई थी जहां उन्होंने कानून की पढ़ाई की। डबलिन में रहते हुए वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जागरूक हो गए और वहां के छात्र आंदोलनों में भाग लेना शुरू कर दिया। उनके इस रुख ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया। वह महात्मा गांधी से प्रभावित होकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।

गिरि का प्रमुख योगदान भारतीय श्रमिक आंदोलनों में देखा गया। वे अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे और श्रमिकों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। गिरि ने भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और श्रमिकों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाते रहे।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और बाद में भी, वीवी गिरि ने कई महत्वपूर्ण सरकारी और गैर-सरकारी पदों पर काम किया। वह 1937 में मद्रास प्रेसीडेंसी के श्रम मंत्री बने और 1946 में भारत सरकार के श्रम मंत्री नियुक्त हुए। उनके इस कार्यकाल में श्रमिकों के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए, जिससे भारतीय मजदूर वर्ग के जीवन में सुधार आया। वह 1967 में उपराष्ट्रपति और 1969 में राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। उसी वर्ष, उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति चुनाव लड़ा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्थन से विजयी हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें हमेशा ऐसे नेताओं की सराहना करनी चाहिए जिन्होंने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। वीवी गिरि का योगदान आज भी हमारे समाज में महत्वपूर्ण है। उनका संघर्ष और नेतृत्व हमें प्रेरित करते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीवी गिरि का जन्म कब हुआ था?
वीवी गिरि का जन्म 10 अगस्त 1894 को ओडिशा के बेरहामपुर में हुआ था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीवी गिरि की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
वीवी गिरि का प्रमुख योगदान क्या था?
वीवी गिरि का प्रमुख योगदान भारतीय श्रमिक आंदोलनों में था।
वीवी गिरि ने किस पार्टी में शामिल होकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया?
वीवी गिरि ने महात्मा गांधी से प्रभावित होकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए।
वीवी गिरि का शिक्षा का स्तर क्या था?
वीवी गिरि की शिक्षा डबलिन, आयरलैंड में हुई थी, जहां उन्होंने कानून की पढ़ाई की।
राष्ट्र प्रेस
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